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वडोदरा / सयाजी अस्पताल के बाल विभाग के एनआईसीयू में आग



Fire breaks out in pediatric departmant of Sayaji Hospital in Vadodara 57 children rescued
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Fire breaks out in pediatric departmant of Sayaji Hospital in Vadodara 57 children rescued

  • 57 बच्चों को बचाया
  • शार्ट सर्किट से लगी आग

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 02:19 PM IST

वडोदरा. सयाजी अस्पताल में मंगलवार को दोपहर 2.45 बजे पीडियाट्रिक विभाग के एनआईसीयू में आग लगने से भगदड़ मच गई। विभाग में 22 बच्चों का इलाज चल रहा था, तभी एसी में भीषण आग लग गई। एसी में लगी आग पर्दे के जरिए छल में लगे थर्मोकॉल तक फैल गई। आग लगने के बाद रेस्क्यू करके 57 बच्चों को बचा लिया गया। एनआईसीयू और वार्ड के कुल 57 बच्चों को दूसरी जगह ले जाया गया। 
 

शार्ट सर्किट से लगी आग
सयाजी अस्पताल में मंगलवार को दोपहर में वार्ड 17 के पीडियाट्रिक विभाग के एनआईसीयू के एसी में शॉर्ट-सर्किट से आग लग गई। देखते ही देखते आग खिड़की पर झूल रहे पर्दे के सहारे छत पर लगे थर्मोकॉल तक फैल गई। थर्मोकॉल में आग लगते ही तेेजी से धुआं बाहर निकलने लगा। धुएं के कारण बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। आग लगते ही अस्पताल के डॉक्टर बच्चों को बचाने में जुट गए। वेंटिलेटर और बॉक्स पेटी के बच्चों को डॉक्टर खुद ही बाहर निकालने लगे। बच्चों के अभिभावकों के रोने की आवाज से वातावरण काफी गमगीन हो गया था। 
 

दमकलकर्मी पहुंचे
घटना की जानकारी मिलते ही दमकलकर्मी मौके पर पहुंच गए। दमकलकर्मियों ने कड़ी मेहनत करके आग को काबू में कर लिया। बच्चों को बाहर निकालकर दूसरी जगह ले जाने में दीपक रिक्शावाला, बग्गी और एंबुलेंस की मदद ली गई। जानकारी मिलते ही मेयर, कलेक्टर मौके पर पहुंच गए। 15 बच्चों को रुक्ष्मणी चैना के बेबी रूम और अन्य बच्चों को दूसरे वार्ड में ले जाया गया।
 

एसी में लगी आग पर्दे के कपड़े और फिर छत के थर्मोकॉल तक फैल गई
मैं दीपक फाउंडेशन के ऑफिस में था। अचानक आग लगते ही बचाव के लिए दौड़ पड़ा। वार्ड से धुआं बाहर निकल रहा था। मैं अंदर गया और बच्चों को उठाकर डॉक्टरों को देने लगा। डॉक्टर ऑक्सीजन पंप और दूसरे उपकरणों के साथ बच्चों के ले जाने के लिए समझाया। हादसे के 15 मिनट बाद फायर विभाग की गाड़ियां मौके पर आ गई। धुआं इतना तेज था कि अंदर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। फायर विभाग ने कांच तोड़कर बचाव कार्यवाई शुरू की। 30 मिनट में सभी बच्चों को वार्ड से निकाल लिया गया।
 

वार्ड से 45 बच्चों को 3 अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया
घटना की जानकारी मिलते ही हमने सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मरीज को तीन कैटेगरी में बांटा गया। क्रिटिकल को बेबी रूम और शेष बच्चों को इमरजेंसी और दूसरे वार्ड में रखा गया। 45 बच्चे हैं और सभी सुरक्षित हैं। गाेत्री अस्पताल से आवश्यक साधन-सामग्री मंगाई जाएगी। -डॉ. राजीव देवेश्वर, सुपरिटेंडेंट
 

हाथ से खिड़की का कांच तोड़ा
हाथ से कांच तोड़कर धुएं को बाहर निकालने वाले कृष्णा नंद किशोर सोलंकी ने बताया कि शॉर्ट-सर्किट से आग लगने के कारण धुआं कमरें में भर गया था। अंदर जाने के लिए धुएं को बाहर निकालना जरूरी था। ब्रिज के रास्ते से होते हुए फ्लोर की खिड़की के पास पहुंचने के बाद कांच तोड़ने के लिए इधर-उधर ढूंढा, पर कुछ नहीं मिला। आखिर में हाथ से कांच को तोड़ने का निर्णय लिया। इस तरह मैंने हाथ से कई खिड़कियों के कांच तोड़कर धुएं को बाहर निकाला। मेरी ड्यूटी पूरी होने वाली थी, तभी बच्चों के वार्ड में धुआं दिखाई दिया। बच्चों को वहां से हटाने का काम तुरंत शुरू किया गया। बच्चों को तुरंत दूसरे वार्ड में ले जाया गया।

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