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गुजरात / 2023 तक कैसे दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, पहले चरण में ही सूरत के 11 गांवों के नाराज किसान नहीं दे रहे जमीन



first phase for bullet train angry farmers of Surat 11 villages are not giving land in gujrat
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first phase for bullet train angry farmers of Surat 11 villages are not giving land in gujrat

  • यह है समस्या : गांवों में जमीन का जंत्री भाव बहुत कम, किसान बाजार भाव से मांग रहे मुआवजा 
  • नाराजगी : मेट्रो रूट में आ रही 28 गांवों की जमीन, अभी भी 17 गांवों में 177 ब्लॉकों के किसानों का जंत्री भाव से मुआवजा लेने से इनकार

Dainik Bhaskar

Jul 20, 2019, 05:13 PM IST

सूरत. अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा दिसंबर 2023 है, लेकिन अभी पहला चरण के जमीन अधिग्रहण अटका हुआ है। पहले चरण में सूरत से बिलिमोरा तक लगभग 50 किमी का रूट तैयार करने की योजना है। इस योजना में व्यवधान आ गया है। दक्षिण गुजरात के कई गांवों के किसानों के विरोध के कारण जमीन अधिग्रहण अटका हुआ है।

 

सूरत जिले के 28 गांवों में से सिर्फ 17 गांव के 395 में से 218 ब्लॉक का 80 फीसदी मुआवजा ही किसानों को दिया गया है। बाकी 177 ब्लॉक के किसानों ने मुआवजा लेने से ही इनकार कर दिया है। बाकी के 11 गांवों के किसान अब भी विरोध कर रहे हैं। गुजरात किसान समाज का कहना है कि इन 11 गांव के किसान जमीन की पैमाइश करने वालों को गांव में घुसने नहीं आने दे रहे हैं।

 

मार्च 2019 में राज्य के राजस्व मंत्री कौशिक पटेल के नेतृत्व में समीक्षा मीटिंग हुई थी। इसमें बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई थी। कलेक्टर ने कहा था कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में सूरत जिले के 28 में से 19 गांव के किसानों को मुआवजे को लेकर कोई समस्या नहीं है। दक्षिण गुजरात में यह पहला प्रोजेक्ट है, जिसमें सरकार को जमीन लेने में इस तरह की समस्या आ रही है।
 

प्रशासन ने 17 गांवों के 218 ब्लॉक को ही 587 करोड़ मुआवजा दिया 
बुलेट ट्रेन के रूट में सूरत जिले के 28 गांवों के किसानों की जमीन आ रही है। इनमें से वक्ताना, गोजा, बोणंद, टिंबरवा, खोलवड, लस्काना, अंतरोली, खुडसद, कछोली, भाटिया, ओवियान, कोसमाड़ा, पासोदरा, मोहणी, कठोर, नियोल और तरसाडी गांव के 395 में से 218 ब्लॉक के किसानों को 961 करोड़ में से 587 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया है।
 
किसान रोजाना बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के कार्यालय आ रहे, सहमति पत्र ही नहीं बन पा रहा है 
अब भी मुआवजे के लिए रोजाना किसान बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट कार्यालय जाते हैं। कागजात के अभाव के कारण कई को सहमति पत्र के बगैर ही लौटना पड़ता है। हालांकि कई लोगों का काम भी हो रहा है। जमीन संपादन की प्रक्रिया करीब एक साल पहले शुरू की गई थी, लेकिन 12 दिसंबर 2017 तक एक भी किसान से जमीन नहीं ले पाए थे। 13 दिसंबर 2018 को 27 किसानों ने 27 करोड़ रुपए लेकर अपनी जमीन के कागजात प्रशासन को दिए थे। इससे पहले 4-5 किसान जमीन देने को तैयार हुए थे, लेकिन उनसे मौखिक बातें ही हुई थीं।

 

किसानों को एक साल से मना रहा प्रशासन, लेकिन मुआवजे पर विरोध 
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में किसानों को मनाने में प्रशासन लगा हुआ है, लेकिन वे मुआवजे को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। किसान नेता दर्शन नायक ने बताया कि किसानों में अब भी इस कदर रोष है कि वे जमीन को मापने भी नहीं दे रहे हैं। किसानों की मांग यही है कि बाजार भाव के हिसाब से मुआवजा देने के साथ किसानों के रोजगार का भी ध्यान रखा जाए। जिन गांवों की जमीन रूट में आ रही है वहां जंत्री भाव कम है, इसलिए मुआवजे की रकम बहुत कम है। किसान अपनी जमीन दे देगा तो उसके पास बचेगा क्या।

 

बाजार भाव देने पर ही 27 किसान राजी हुए थे 
जंत्री रेट से 52 फीसदी रेट बढ़ाने, चार गुना अधिक मुआवजा देने और 12.5 फीसदी सालाना ब्याज देने को प्रशासन तैयार हुआ तो बाजार रेट के करीब दाम पहुंच गए, इसलिए वक्ताना, बंद और गोजा गांव के 27 किसान जमीन देने को तैयार हो गए थे। उन्होंने 13 दिसंबर को अपनी जमीन दी थी। 

 
टेंडर निकाले गए हैं, जमीन संपादन जल्द पूरा करने का लक्ष्य 
नेशनल हाई स्पीड रेलवे कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनएचएसआरसी) की प्रवक्ता सुषमा ने बताया कि टेंडर निकाले गए हैं, अहमदाबाद और वडोदरा में बेसिक काम शुरू किया गया है। दक्षिण गुजरात मे भी जमीन संपादन का काम टेंडर प्रक्रिया फाइनल होने तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। अधिकतर जमीन संपादन का काम पूर्ण हो चुका है। प्रारंभ में रेलवे पटरी के लिए जमीन क्लियर की जाएगी। 

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