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उद्यमियों को झटका / मनपा और सूडा क्षेत्र की जीआईडीसी में हुए अवैध निर्माण अब नहीं होंगे वैध



Illegal construction in GIDC will no longer be valid Of Municipal and suda
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Illegal construction in GIDC will no longer be valid Of Municipal and suda

  • ऑनलाइन आवेदन मांगने के बाद सरकार ने बंद की योजना
  • सूरत से 130 आवेदन किए जा चुके हैं रेगुलाइज करने के लिए, आवेदन मंगाने के बाद सरकार ने किया इनकार
  • स्वीकार ही नहीं किए जा रहे 100 से ज्यादा आवेदन

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2018, 09:15 AM IST

सूरत. मनपा और सूडा  क्षेत्र में स्थित जीआईडीसी में किए गए अवैध निर्माण अब वैध नहीं हो पाएंगे। अवैध निर्माण कर ऑनलाइन एप्लिकेशन करने के बाद निर्माण वैध होने का इंतजार कर रहे इकाइयों के मालिकों बड़ा झटका लगा है। शहर की पांडेसरा, सचिन, हजीरा, कतारगाम, भाटपोर, एपेरल, खटोदरा जीआईडीसी में से अवैध निर्माण को वैध करने के लिए 130 ऑनलाइन आवेदन किए गए थे।

 

हालांकि बहुत सी एप्लिकेशन पेंडिंग होने के कारण जीआईडीसी ने इस डेट को 3 माह के लिए बढ़ाया। हालांकि 31 मार्च 2018 के बाद 100 से अधिक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार ही नहीं किए जा रहे। इस बात को भी 5 माह बीत गए, लेकिन आवेदनों का क्या हुआ, किसी को कुछ नहीं पता। उद्यमी भी इंतजार करते रहे। भास्कर ने जब सूरत जीआईडीसी के कार्यपालक इंजीनियर से बात की तो उन्होंने बताया कि गांधीनगर से जीआईडीसी एमडी ने अवैध निर्माण को वैध करने से इनकार कर दिया है।

 

फोगवा ने मुख्यमंत्री रूपाणी और जीआईडीसी एमडी को लिखा पत्र
सचिन इंडस्ट्रियल सोसायटी के पूर्व सेक्रेटरी और फोगवा के प्रतिनिधि मयूर गोलवाला ने मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और जीआईडीसी के एमडी को पत्र लिखकर बताया कि शहर की जीआईडीसी से 31 मार्च तक 130 ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। लेकिन, अभी तक  उसका नतीजा नहीं आया है। तत्काल इसका निराकरण किया जाए। सभी ने इंजीनियरों ने जमीन की पैमाइश करवाकर लाखों रुपए खर्च कर आवेदन किए थे।

 

मनपा क्षेत्र में 2011 तक हो चुके थे वैध
सूरत मनपा और सूडा  क्षेत्र में जितनी भी जीआईडीसी हैं, सभी ने फरवरी 2011 से पूर्व इम्पैक्ट शुल्क भरकर उसे वैध कर लिया है। राज्य सरकार ने यही सोचकर अपने ही निर्णय को वापस लिया है। शहर और सूडा  क्षेत्र के बाहर की जीआईडीसी की अवैध संपत्ति वैध की जाएंगी। लेकिन, सूरत के शहर और सूडा  क्षेत्र से बाहर की जीआईडीसी से एक भी आवेदन नहीं किया गया था।

 

सबने ले लिया लाभ, इसलिए स्कीम बंद की
सूरत जीआईडीसी के कार्यपालक इंजीनियर एनपी वाडलिया ने बताया कि स्कीम बंद कर दी गई है। शहर और सूडा  क्षेत्र में जो लोग 2011 में इम्पैक्ट शुल्क का लाभ लेने से बाकी रह गए, उनके लिए जीआईडीसी ने सोचा था कि उन्हें यह लाभ दिया जाए। लेकिन जीआईडीसी एमडी और सरकार ने आखिर में यह निर्णय लिया कि 2011 में शहर और सूडा  क्षेत्र में सभी ने लाभ ले लिया है। इसलिए इस स्कीम को बंद कर दें।

 

अब क्या: हो सकती है कार्रवाई
जीआईडीसी में अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। जिन लोगों ने फरवरी 2011 से पूर्व अवैध निर्माण किया था और उसे वैध करवा लिया, उनके अलावा किसी ने अवैध निर्माण किया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

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