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निर्दयता / टीसी की एक छोटी-सी हरकत ने पल भर में बदल दी जिंदगी



पलभर में बदली जिंदगी: ट्रेन के डिब्बे में बेटी के साथ मुस्कुरा रहा था, लेकिन बाहर आते ही पूरे परिवार की आंखों में थे आंसू  पलभर में बदली जिंदगी: ट्रेन के डिब्बे में बेटी के साथ मुस्कुरा रहा था, लेकिन बाहर आते ही पूरे परिवार की आंखों में थे आंसू 
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पलभर में बदली जिंदगी: ट्रेन के डिब्बे में बेटी के साथ मुस्कुरा रहा था, लेकिन बाहर आते ही पूरे परिवार की आंखों में थे आंसू पलभर में बदली जिंदगी: ट्रेन के डिब्बे में बेटी के साथ मुस्कुरा रहा था, लेकिन बाहर आते ही पूरे परिवार की आंखों में थे आंसू 

  • टीसी ने व्यापारी को बेटिकट बताकर की धक्का-मुक्की
  • प्लेटफार्म में गिरने से कट गया पैर
  • पुलिस ने इस दुर्घटना का मामला माना
  • मुआवजा भी मिलना मुश्किल 
  • रक्षाबंधन के लिए पत्नी व बेटी जा रही थी गांव
  • ट्रेन में बैठाने गया था युवक 

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 12:50 PM IST

सूरत. सूरत रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह अपनी पत्नी को ट्रेन में बिठाने गए कपड़ा व्यापारी मुकेश यादव (28) को बेटिकट बताकर टीटी ने धक्का-मुक्की की, जिससे गिरने से उसका दाहिना पैर कट गया। मुकेश ने प्लेटफॉर्म टिकट लिया था और उसने टीटी को बताया भी, लेकिन वह मान ही नहीं रहा। टीटी ने कहा कि वह बेटिकट ट्रेन में चढ़ा था, इसलिए जुर्माना देना पड़ेगा। जीआरपी ने इसे सिर्फ अकस्मात घटना माना। 


ट्रेन से उतरते समय टीसी ने हाथ पकड़ा
मुकेश के साले छोटू का कहना है कि ट्रेन से उतरते समय टीसी ने उनका हाथ पकड़ लिया, जिससे धक्का लगा और वह गिर गए। चलती ट्रेन के नीचे उनका पैर आकर कट गया। मुकेश अपने परिवार के सामने ही तड़पता रहा। घायल होने के बाद उसका परिवार भी गांव नहीं जा पाया। मुकेश रक्षा बंधन के लिए अपनी पत्नी और साले को उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित गांव भेजने के लिए ट्रेन में बिठाने गया था। ट्रेन चलने लगी तो वह उतर रहा था, तभी टीटी टिकट मांगने लगा। सूचना मिलने के बाद स्टेशन मास्टर ने एंबुलेंस मंगाई और पीड़ित को सिविल अस्पताल भेज दिया। 


टीटी ने हाथ पकड़ा तो मुकेश फिसलकर गैप में गिर गया 
नीलगिरि में रहने वाले कपड़ा व्यापारी मुकेश यादव ने अपनी पत्नी और साले का टिकट 11104 बांद्रा-झांसी एक्सप्रेस से निकाला था। ट्रेन सुबह 8.45 बजे सूरत स्टेशन पहुंची। मुकेश ने अपनी पत्नी और साले को कोच एस 4 की सीट नंबर 14 और 15 पर बैठा दिया। ट्रेन सुबह 8.57 बजे चलने लगी तो मुकेश तुरंत गेट के पास पहुंचा और उतरने लगा। उसी दौरान ट्रेन के टीसी ने मुकेश से टिकट मांगा। मुकेश ने कहा कि मेरे पास प्लेटफॉर्म टिकट है, मैं यात्रा नहीं कर रहा हूं, लेकिन टीसी जबरन टिकट दिखाने को कहने लगा। इतने में ट्रेन धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ने लगी। मुकेश ने आग्रह किया कि मुझे उतरने दीजिए। इसी दौरान टीसी ने उसका हाथ पकड़ लिया, जिससे मुकेश गेट से फिसल गया और गैप में गिर गया। मुकेश के साले ने चेन पुलिंग कर दी। ट्रेन रुकी, लेकिन मुकेश का दाहिना पैर कट चुका था। 


ट्रेन की चेन पुलिंग की, लेकिन पैर कट चुका था 
पीड़ित मुकेश के साले छोटू ने बताया, मेरे जीजा जी मुझे और दीदी को ट्रेन में बैठाने आए थे। ट्रेन चलने लगी तो वह उतरने लगे। इसी दौरान टीसी ने टिकट मांगा। उन्होंने प्लेटफाॅर्म टिकट लिया था, लेकिन टीसी उनसे ट्रेन का टिकट मांग रहा था। ट्रेन रफ्तार पकड़ने लगी तो जीजाजी उतरने लगे, लेकिन टीसी हाथ पकड़ने लगा। इसी दौरान वे नीच गिर गए। मैंने चैन पुलिंग की, लेकिन उनका पैर कट गया था। उन्हें सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। रक्षा बंधन के लिए मैं अपनी दीदी के साथ गांव जा रहा था, लेकिन टीसी की गलती से अचानक यह दुर्घटना हो गई। हम खुशी से गांव जा रहे थे, लेकिन इस घटना के बाद हमें ट्रेन छोड़कर अस्पताल जाना पड़ा। 


अस्पताल ले जाने की हड़बड़ी में दर्ज नहीं कराया मामला 
इस मामले में पीड़ित के साले छोटू ने खबर लिखे जाने तक जीआरपी में अपनी तरफ से किसी प्रकार का बयान देकर मामला दर्ज नहीं कराया था, इसलिए जीआरपी ने इसे दुर्घटना का मामला दर्ज किया। छोटू ने कहा कि मेरे जीजाजी अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए मामला दर्ज नहीं करा पाया। मैं इसमें टीसी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराऊंगा, क्योंकि यह घटना मेरी आंखों के सामने हुई। मैंने खुद टीटी से आग्रह किया कि यात्रा मैं कर रहा हूं वह नहीं, लेकिन टीसी नहीं माना और उनसे टिकट मांगने के लिए रोके रखा। 


मामले को जीआरपी देख रही है
इस मामले को जीआरपी देख रही है। पीड़ित के रिश्तेदारों ने अभी तक कोई ऐसी शिकायत नहीं की है कि टीटी की गलती की वजह से हादसा हुआ है। यह हादसा प्लेटफाॅर्म नंबर 1 पर वडोदरा एंड की तरफ हुआ। घटना के दौरान आरपीएफ के कांस्टेबल उदय सिंह भी वहां थे। वे पीड़ित मुकेश को अस्पताल ले जाने में परिवार के साथ रहे। हमने घटना का एक लिखित मेमो जीआरपी को दिया है। -ईश्वर सिंह यादव, प्रभारी, आरपीएफ 

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