रूट तय / अप्रैल से सूरत से यूपी-बिहार के यात्रियों के लिए आईआरसीटीसी की प्राइवेट ट्रेन चलाने की योजना

लंबी दूरी के लिए हम सफर को निजी ट्रेन बनाने की योजना लंबी दूरी के लिए हम सफर को निजी ट्रेन बनाने की योजना
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लंबी दूरी के लिए हम सफर को निजी ट्रेन बनाने की योजनालंबी दूरी के लिए हम सफर को निजी ट्रेन बनाने की योजना

  • उधना से वाराणसी तक चल सकती है चौथी निजी ट्रेन
  • तेजस की तरह नहीं होगी, हमसफर की रेक लगाएंगे

दैनिक भास्कर

Feb 15, 2020, 03:22 PM IST

सूरत. सूरत से वाराणसी के बीच देश की चौथी निजी ट्रेन चलाने की रेलवे की योजना है। यह ट्रेन अहमदाबाद-मुंबई तेजस एक्सप्रेस जैसी तो नहीं होगी, लेकिन इसमें प्रीमियम ट्रेन हम सफर के रेक का इस्तेमाल किया जा सकता है। 
 

इंदौर से वाराणसी ट्रेन 20 फरवरी से
देश में कुल 150 निजी ट्रेनों के परिचालन को लेकर विभिन्न जोन से रेल बोर्ड ने रूट मंगाए थे। पश्चिम रेलवे ने अपने जोन से कुल 11 रूट दिए थे। इनमें उधना-दादर, उधना-आसनसोल, उधना-पटना और उधना -मंडुआडीह (वाराणसी) रूट दिया गया था। उधना-वाराणसी रूट पर लगभग 110 प्रतिशत पैसेंजर ऑक्युपेंसी बताई जा रही है। 20 फरवरी से इंदौर से वाराणसी के बीच देश की तीसरी निजी ट्रेन की शुरुआत होगी। इसके बाद अब तीन और रूट पर निजी ट्रेन चलाने की योजना बनाई जा रही है।
 

अप्रैल में उधना-मंडुआडीह निजी ट्रेन की घोषणा
अगर स्लॉट परिचालन के अनुसार रहा तो अप्रैल में उधना-मंडुआडीह निजी ट्रेन के परिचालन की घोषणा की जा सकती है। आने वाले दिनों में यहां कम दूरी पर तेजस की तर्ज पर निजी ट्रेन, जबकि लंबी दूरी पर हम सफर, एलएचबी के रूप में निजी ट्रेनें चलेंगी। इसके लिए प्राइवेट प्लेयर्स के लिए योग्यता तय की जा रही है। यह पूरी योजना 22500 करोड़ रुपए की होगी। पहला कंसेशन पीरियड 35 साल का होगा।
 

नोटिफिकेशन मिलते ही करेंगे घोषणा
आईआरसीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लंबी दूरी पर जिन निजी ट्रेनें चलाने की योजना है। इसके लिए हमने हम सफर ट्रेन के रेक के इस्तेमाल की योजना बनाई है, जबकि शार्ट डिस्टेंस यानि 500 किमी दूरी तक के लिए हम तेजस चलाएंगे। रेलवे ने प्राइवेट पार्टी को रोलिंग स्टॉक उपलब्ध कराया है। परिचालन क्रू भी रेलवे का होगा। इसके लिए प्राइवेट पार्टीज को रेलवे के साथ प्रॉफिट शेयर करना होगा और प्रति किमी का किराया देना होगा। इसके लिए प्राइवेट पार्टीज को टर्मिनल कॉस्ट, विद्युत, ट्रांसपोर्टेशन, ट्रैक मेंटेनेंस, सिगनलिंग और ओवरहेड का हॉलेज चार्ज रेलवे को देना होगा। इसके आलावा मुनाफे में हिस्सेदारी भी देनी होगी।
 

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