जमीन अधिग्रहण / बुलेट ट्रेन के लिए आए जीका के अधिकारी भी नाकाम, नहीं मना पाए नाराज किसानों को

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 09:10 AM IST



JICA officials came for bullet train could not agree to angry farmers
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JICA officials came for bullet train could not agree to angry farmers
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  • समाधान का आश्वासन दिया तो 700 किसान बोले- अब तक तो कुछ नहीं हुआ
  • जीका के अधिकारियों ने नवसारी-सूरत के किसानों से समस्याओं पर की चर्चा

सूरत. बुलेट ट्रेन के जमीन अधिग्रहण के मामले पर किसानों और स्थानीय प्रशासन के बीच बात नहीं बनने पर अब जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जीका) के तीन अधिकारी समस्या का हल खोजने आए हैं। यह एजेंसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए भारत को लोन दे रही है। कंपनी के अधिकारियों ने शुक्रवार किसानों के साथ बैठक की और उनकी समस्याएं सुनी।

 

सूरत के ओलपाड, तरसाडी, मांगरोल, कामरेज और चौर्यासी के करीब 200 किसानों की जमीन बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में जा रही है। दक्षिण गुजरात में ऐसे करीब 1400 किसान हैं। नवसारी में 4 घंटे की बैठक में वलसाड और नवसारी के 300 किसान शामिल हुए। चलथाण की 3.30 घंटे की बैठक में भरूच-सूरत के 400 किसान मौजूद रहे। सरकार ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन किसानों के विरोध के कारण यह अभी तक दक्षिण गुजरात में शुरू नहीं हो पाया है।

 

किसानों ने टीम से बताईं ये समस्याएं
किसानों ने जीका टीम से कहा कि गुजरात और दादरा नगर हवेली की जमीन के दाम एक नहीं होने चाहिए। सी लेवल नापने के नाम पर अधिकारी खेत नाप रहे। स्थानीय अधिकारियों और माप अधिकारी के पास मुआवजे के संबंध में कोई जवाब नहीं रहता।

सामाजिक, पर्यावरण को लेकर कोई सर्वे नहीं हुआ। भरूच, नवसारी सभी जगह एक ही दर पर मुआवजा दिया जा रहा। किसकी जमीन कहां पर है, उसकी वैल्यू क्या है, यह सब भी नहीं देख रहे। रूट कहां से जाएगा इसकी जानकारी भी नहीं देते। गुजरात के दौरे पर आई जापान की टीम इसी 18 जुलाई को सूरत आकर किसानों से मिली थी।

 

 

जमीन अधिग्रहण पर अटका मामला
बुलेट ट्रेन केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। स्थानीय प्रशासन कई बार दावा कर चुका है कि वह किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा दे रहे हैं, लेकिन किसानों का विरोध जारी है। जीका कत्सु मत्सु मोटो, मिस मोमो सहित 3 अधिकारी शुक्रवार को दक्षिण गुजरात के किसानों से उनकी समस्याएं जानने पहुंचे। नवसारी और सूरत के चलथाण गांव में किसानों के साथ बैठक की। किसानों ने अपनी समस्याएं बताते हुए कहा कि उन्हें जमीन की वैल्यू के हिसाब से मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। मकान के लिए मुआवजा और रिसेटलमेंट की नीति भी अभी तक स्पष्ट नहीं की गई है।

 

प्रशासन ने कहा- उचित मुआवजा दे रहे; किसान बोले- हमारे साथ अन्याय
दो महीने पहले जिला प्रशासन ने घोषणा की थी कि सरकार सभी किसानों को जमीन की वैल्यू के हिसाब से मुआवजा देने को तैयार है। किसान इस पर मान गए हैं और अपनी जमीन देने को तैयार हैं। हालांकि इस घोषणा के बाद भी नाराज किसानों ने सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। कलेक्टर धवल पटेल खोलवड में किसानों को समझाने के लिए गए थे, लेकिन किसानों ने कहा कि जमीन का मुआवजा देने में अन्याय किया जा रहा है।

 

जीका अधिकारी कलेक्टर और बुलेट ट्रेन के पीआरओ को भी नहीं ले गए साथ

जीका की टीम जब किसानों से मिलने गई तो कलेक्टर धवल पटेल और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पीआरओ धनंजय कुमार को साथ नहीं लिया। कहा जा रहा है कि जीका टीम को वर्तमान स्थिति जाननी थी, इसलिए उन्होंने यह भी नहीं बताया था कि वे कहां-कहां किसानों से मिलेंगे।

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