गुजरात / महा तूफान का साया: शहर सहित 40 तटीय गांवों के प्रभावित होने की आशंका



सूरत में महा तूफान के असर को देखते हुए शुक्रवार को ही तैयारियां शुरू कर दी गई। सूरत में महा तूफान के असर को देखते हुए शुक्रवार को ही तैयारियां शुरू कर दी गई।
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सूरत में महा तूफान के असर को देखते हुए शुक्रवार को ही तैयारियां शुरू कर दी गई।सूरत में महा तूफान के असर को देखते हुए शुक्रवार को ही तैयारियां शुरू कर दी गई।

  • 6 से 8 नवंबर तक जरूरी हो तभी बाहर निकलें, तूफानी बारिश हो सकती है
  • दो दिन में गुजरात तट से टकराएगा महा तूफान, चल सकती हैं तेज हवाएं

Dainik Bhaskar

Nov 05, 2019, 12:16 AM IST

सूरत. अरब सागर में बना महा तूफान के 6 नवंबर की रात या 7 की सुबह सूरत आने की आशंका है। यह अभी वेरावल से 690, दीव से 740 व पोरबंदर से 650 किमी की दूरी पर अरब सागर में है। यह तेजी से बढ़ रहा है। सूरत में इसके असर को देखते हुए प्रसाशन और मनपा ने दो दिन पहले ही तैयारी शुरू कर दी है।


गुजरात के राजस्व विभाग के सचिव  ने कलेक्टर व फायर विभाग सहित कई विभागों के साथ सोमवार शाम 5 बजे चर्चा कर सभी तैयारियां समय से पूरी करने को कहा। कलेक्ट्रेट के अनुसार 6 नवंबर की रात से लेकर 7 नवंबर की सुबह तक सूरत पर तूफान का असर दिखाई देने की आशंका है। महानगर पालिका ने भी महा तूफान के लिए अपनी तरफ से तैयारियां शुरू कर दी हैं। मनपा आयुक्त बंछानिधि पाणी ने अपने हर विभाग और जोन को अलग-अलग से काम सौंप दिया है। फायर, शहरी विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग को प्रमुख तौर पर स्टैंड बाय रखा गया है। एहतियातन सोमवार से ही पूरे शहर में होर्डिंग हटाने और जर्जर मकानों को खाली करवाने का काम शुरू कर दिया गया। सोमवार देर रात तक लगभग 55 होर्डिंग निकाले जा चुके थे। किसी भी आपदा से निपटने के लिए साथ ही फायर डिपार्टमेंट को स्टैंड बाय पर रखा गया है।


मनपा आयुक्त के आदेश पर सभी आठों जोन के अधिकारियों को तात्कालिक रूप से उनके जोन में स्थित सभी हाई राइज होर्डिंग को निकालने के आदेश दिए हैं। ठेकेदारों को भी होर्डिंग उतारने को कहा गया है। शुक्रवार  दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक सेंट्रल जोन में 2, कतारगाम जोन में 6, वराछा जोन में 12 लिंबायत जोन में 13, उधना में 16, अठवा जोन में 6, रांदेर जोन में 3 होर्डिंग निकाल दिए गए थे। दक्षिण गुजरात के कई जिलों व केद्रशासित प्रदेशों में भी स्थिति से निपटने की तैयारियां की जा रही हैं। दमण में पुलिस व फायर बिग्रेड के कर्मचारियों की छुटि्टयां रद्द कर दी गई हैं।

 

ओड़िशा जैसी तैयारी

ओड़िशा ने क्या किया था? तूफान ‘फेनी’ का सामना करने ओडिशा ने 11 लाख से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया था। 1500 से ज़्यादा बसें, 43 हजार वॉलंटियर्स,1000 आपातकालीन कर्मी, 880 विशेष शिविर, चार हजार आश्रय स्थल, एनडीआरएफ की 65 टीमें, नौसेना के 6 जहाजों तैनात थे। फेनी के दौरान 220 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं, लेकिन नुकसान काफी कम हुआ। यूएन ने भी ओडिशा के इस प्रयास की सराहना की।

हमारी तैयारी ऐसी?: सूरत में महा तूफान के असर की आशंका से और मनपा ने दो दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। 55 होर्डिंग निकाले गए, बाकी निकाले जा रहे हैं। फायर ब्रिगेड को स्टैंड बाय पर रखा गया है। डायमंड बुर्स का काम रोक दिया गया है। जर्जर मकानों से लोगों को निकालने की तैयारी है। मछुआरों को समुद्र में जाने से रोक दिया गया है। समुद्र तटीय 40 गांवों में अलर्ट किया है। लोगों को हटाने की भी तैयारी है।

 

समुद्र में एक से डेढ़ मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं 
महा तूफान के कारण सूरत के नजदीक समुद्र में  1 से 1.5 मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं। 65 से 80 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चलेगी। तेज बारिश होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मौसम में परिवर्तन से तापमान गिर सकता है। हालांकि तूफान सूरत के समुद्री तट से टकराने की संभावना नहीं है, लेकिन तेज हवा व बारिश से शहर के साथ समुद्र तटी 40 गांवों में जानमाल का खतरा हो सकता है। डेढ़ साल पूर्व ओखी साइक्लोन से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की आशंका व्यक्त की गई थी।

 

डायमंड बुर्स का काम रोका, फायर कर्मियों की छुट्‌टी रद्द
होर्डिंग हटाना जारी रहेगा। फायर बिग्रेड के चीफ फायर आॅफिसर बसंत पारीख ने बताया कि फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीम को 24 घंटे स्टैंड बाय रखा गया है। सभी की छुट्टियां रद्द कर गई हैं। बोट, कटर और लैडर एक्स को तैयार कर लिया गया है। एनडीआरएफ की टीम मंगलवार को पहुंचेगी। नए वराछा जोन में तीन, लिंबायत में 33, उधना में 174, अठवा में 40, रांदेर में 57, सेंट्रल में 322 कतारगाम 38 जर्जर मकानों को खाली कराने की तैयारी है। डायमंड बुर्स सहित ऊंची इमारतों के निर्माण कार्य को रोक दिया गया है।

 

महा तूफान के समय घर से न निकलें, खिड़कियां बंद रखें
समुद्र से 12 नौकाओं को वापस बुला लिया गया है। समुद्र में जाने पर रोक लगा दी गई  है। बीच पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। कलेक्टर धवल पटेल ने बताया कि महा तूफान के असर की आशंका से मजूरा के 4, चौर्यासी के 6 और ओलपाड तहसील के 30 गांवों के लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। इन 40 गांवों में 8 हजार 835 लोग हैं। स्थिति को देखते हुए इनकी शिफ्टिंग की सारी व्यवस्था की गई है। शहरीजनों से अपील की है कि तूफान के समय घर से बाहर न निकलें। घर के दरवाजे व खिड़कियां बंद रखें।

 

शहर में 669 मकान जर्जर, आज से खाली कराए जाएंगे
मनपा के अठवा जोन के इंजीनियर महेश चावड़ा ने बताया कि जर्जर मकानों को खाली कराने की तैयारी है। शहर में 669 मकान जर्जर हैं। हालांकि अभी इन मकानों से निकालने के बाद लोगों को कहां रखा जाएगा इसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। हमने पहले ही सभी लोगों को नोटिस देकर घर खाली करने के लिए कह दिया था। नोटिस के बाद भी अभी तक लोगों ने घर खाली नहीं किया गया। हम मंगलवार से मकान खाली करवाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। महा तूफान के नुकसान से बचने के लिए हर तरह की तैयारी की जा रही है। उकाई से रविवार जहां 6.19 बजे एक लाख 4 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सोमवार शाम 6 बजे उकाई में पानी की आवक शून्य हो गई और 16 हजार 696 क्यूसेक पानी छोड़ना जारी रखा गया। डैम का जलस्तर 344.92 फीट पर पहुंच गया।

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