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मौत का ब्रिज / काकरा खाड़ी पार करते 7 साल की बेटी का पैर फंसा, तो निकालने गई मां, दोनों की मौत

काकरा खाड़ी ब्रिज पर अगर रेलवे ने साइडिंग ट्रॉली बनाई होती तो इस मासूम की ऐसी दर्दनाक मौत नहीं होती। काकरा खाड़ी ब्रिज पर अगर रेलवे ने साइडिंग ट्रॉली बनाई होती तो इस मासूम की ऐसी दर्दनाक मौत नहीं होती।
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काकरा खाड़ी ब्रिज पर अगर रेलवे ने साइडिंग ट्रॉली बनाई होती तो इस मासूम की ऐसी दर्दनाक मौत नहीं होती।काकरा खाड़ी ब्रिज पर अगर रेलवे ने साइडिंग ट्रॉली बनाई होती तो इस मासूम की ऐसी दर्दनाक मौत नहीं होती।

  • इमरजेंसी ब्रेक भी बचा नहीं पाया दो जिंदगियां
  • काकरा खाड़ी के इसी तरह कई ब्रिजों पर साइडिंग ट्रॉली नहीं
  • आदेश के बाद भी साइडिंग ट्रॉली नहीं बना पाई रेल्वे

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 01:05 PM IST

सूरत. सोमवार को उधना-सूरत के बीच काकरा खाड़ी उत्तर ब्रिज पर रेलवे की 30 वर्षीय कॉन्ट्रैक्ट महिला कर्मचारी और उसकी 7 साल की बच्ची वलसाड दाहोद इंटरसिटी एक्सप्रेस से कट गए। इसके अलावा एक 10 साल की बच्ची घायल हो गई। उसका स्मीमेर अस्पताल में इलाज चल रहा है। 
 

हादसा सुबह साढ़े 8 बजे हुआ
हादसा सुबह 8.30 बजे के करीब तब हुआ, जब कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी घास काटने के लिए काकरा खाड़ी वाले सेक्शन की तरफ आ रहे थे। इनमें महिला और उसकी बच्ची भी थी। ब्रिज क्रास करते समय महिला तो पार हो गई, लेकिन बच्ची का पैर ट्रैक में फंस गया। बेटी को बचाने के लिए महिला गई तो यह दर्दनाक हादसा हो गया। दोनों को बचाने के लिए लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक से रफ्तार घटाने की कोशिश की, लेकिन हादसा टला नहीं। घास काटने का ठेका अहमदाबाद की इंफ्रा बिल्ड एजेंसी को दिया गया है। उसी का ठेकेदार कर्मचारियों को लेकर काम पर जा रहा था। इसी साल 13 जुलाई को काकरा खाड़ी के चैनल ब्रिज पर भी ऐसा हादसा हुआ था, जिसमे राजस्थान के 4 युवक ट्रेन से कट गए थे। चैनल ब्रिज पर भी लॉरी साइडिंग गैलरी नहीं बनी थी। इसके अलावा वर्ष 2008 में चैनल ब्रिज पर एक साथ 16 लोगों की कट कर जान गई थी।
 

रेलवे की गलती: ब्रिज पर न रेलिंग बनाई, न साइडिंग लाॅरी
जिस ब्रिज पर यह हादसा हुआ वह ब्रिज 65 मीटर लंबा है। इस ब्रिज पर रेलिंग नहीं लगाई गई है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि ब्रिज में साइडिंग लाॅरी नहीं बनाई गई है। साइडिंग लॉरी ब्रिज के किनारे का वह हिस्सा होता है जिसमें रेलवे ट्रैक पर मरम्मत का काम करने वाले कर्मचारियों के लिए गैलरी बनी होती है। ऐसे हादसों से बचने के लिए कर्मचारी वहां खड़े हो सकते हैं। पिछले तीन-चार साल से इंजीनियरिंग विभाग से साइडिंग लाॅरी बनाने की मांग की जा रही है। महिला मध्यप्रदेश के झाबुआ की रहने वाली थी। उसके पति ने उसे सूरत बुलाया था। रविवार को ही उसकी नौकरी लगी थी। सोमवार को काम का पहला दिन था।
 

ठेकेदार की गलती: कर्मचारियों को सुरक्षा की जानकारी नहीं दी
ठेकेदारों को यह देखना होता है कि उनके लेबर रेलवे के नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। साथ ही उन्हें अपने कर्मचारियों को बताना होता है कि ट्रैक की किस दिशा में चलना है, ताकि उन्हें ट्रेन के आने की दिशा का पता चल सके। ठेकेदार ने किसी भी तरह के नियम का पालन नहीं किया। अपने कर्मचारियों को सुरक्षा की जानकारी भी नहीं दी थी। कर्मचारियों के बच्चों की सुरक्षा के लिए भी कुछ नहीं किया। ट्रैक पर बच्चों को ले जाने से मना भी नहीं किया। बच्चों की देखरेख ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है। उन्हें गाइड करना होता है ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। सभी कर्मचारी 30 साल से कम उम्र के थे।
 

जान बचाने को मां-बेटी दोनों भागे, लेकिन ट्रेन ने चपेट में ले लिया
रेलवे के पीडब्ल्यूआई के अनुसार ट्रैक किनारे बड़ी घास काटने वाले ठेकेदार ने अपनी टीम की सोमवार को काकरा खाड़ी के पास ड्यूटी लगाई थी। इसके लिए 25 कर्मचारी सुबह लगभग 8.30 बजे सहारा दरवाजा और मानदरवाजा के बीच ब्रिज क्रमांक 442 काकरा खाड़ी उत्तर ब्रिज के पास से होकर गुजर रहे थे। इसमें से 30 वर्षीय महिला लेबर रेखा डामोर, उसकी 7 वर्षीय बेटी रितिका डामोर और उसी ग्रुप की एक और 10 साल की बच्ची अरुणा देवदा ब्रिज की डाउन दिशा से होकर सूरत की तरफ आ रहे थे। इस ट्रैक पर ट्रेन भी सूरत की ओर आती है। यह ब्रिज 65 मीटर लंबा है। वे ब्रिज पर 20 मीटर चली थी कि तेज रफ़्तार से वलसाड-दाहोद इंटरसिटी हॉर्न देते आ रही थी। लोगों ने यह देख शोर मचाया तो रेखा और उसकी बच्ची ने दौड़ कर निकलने की कोशिश की, लेकिन तब तक ट्रेन नजदीक आ गई और दोनों उसकी चपेट में आ गए। मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। अरुणा ट्रेन की टक्कर से बुरी तरह से घायल हो गई।
 

ट्रेन के हाॅर्न से बच्ची भागी तो उसका पैर ट्रैक पर फंस गया
मेरी टीम काम करने जा रही थी। उसमें से ये तीनों डाउन ट्रैक पर से ब्रिज के उस पार जा रहे थे। जब ट्रेन का हॉर्न सुनाई पड़ा तो उसकी सात वर्षीय बच्ची दौड़ कर ट्रैक पर ही भागने लगी, लेकिन उसका पैर ब्रिज के किसी हिस्से में फंस गया और उसकी मां रेखा उसे निकालने की कोशिश कर रही थी। तब तक ट्रेन ने उसे धक्का मार दिया और दोनों की मौत हो गई। अरुणा नाम की बच्ची भी टक्कर से घायल हो गई। हमने कर्मचारियों को सतर्क रहने को कहा था, फिर भी वे ट्रैक पर चल रहे थे।
फर्स्ट पर्सन जयंतभाई, ठेकेदार
 

एक्सीडेंटल डेथ केस दर्ज
दाहोद वलसाड इंटरसिटी की चपेट में आकर महिला और बच्ची की मौत हुई और एक घायल हुई। तीनों ट्रेन की ही दिशा में आ रही थी। रेलवे पुलिस द्वारा एडीआर के तहत मामला दर्ज कर किया गया है। -ईश्वरसिंह यादव, प्रभारी सूरत आरपीएफ
 

ट्रॉली बनाने को कहा है
हादसे की जानकारी मिलते ही हम मौके पर पहुंचे और वहां का जायजा लिया। सभी ठेकेदार के कर्मचारी थे। हमने इस ब्रिज पर लॉरी साइडिंग के लिए इंजीनियरिंग विभाग से कहा है, ताकि हादसों में कमी आए। -सीआर गरुडा, निदेशक सूरत स्टेशन

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