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नवरात्रि / फीके पड़े गरबे के भव्य आयोेजन, गलियों में रही बहार



शेरी गरबे में युवतियाें-महिलाओं ने एक ही तरह के ड्रेस पहनकर रास-गरबा किया। शेरी गरबे में युवतियाें-महिलाओं ने एक ही तरह के ड्रेस पहनकर रास-गरबा किया।
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शेरी गरबे में युवतियाें-महिलाओं ने एक ही तरह के ड्रेस पहनकर रास-गरबा किया।शेरी गरबे में युवतियाें-महिलाओं ने एक ही तरह के ड्रेस पहनकर रास-गरबा किया।

  • परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका
  • घर-आंगन में गरबा खेलकर हो जाते हैं खुश

Dainik Bhaskar

Oct 09, 2019, 01:14 PM IST

सूरत. इस बार लोगों ने यह अच्छी तरह से महसूस किया कि गरबा का भव्य आयोजन करने वालों के गरबे फीकिे रहे, वहीं दूसरी ओर गलियों और सोसायटियों में आयोेजित किए गए गरबे काफी सफल माने गए। यहां लोगों ने अपनी परंपरा को बनाए रखा और पूरी शालीनता के साथ भक्ति रस में डूबे रहे।
 

परंपरागत रास-गरबा
यहां वराछा के सरथाणा जकातनाके के पास परब रोड पर स्थित भूमि पार्क सोसायटी में शेरी गरबा में महिलाओं ने एक जैसे कपड़े पहनकर नवरात्रि के अंतिम दिन मां की आराधना की। इस दौरान डोढिया, टीटोडा, दांडिया समेत कई परंपरागत रास-गरबा खेला।
 

घर-आंगन पर खेला रास
भूमि पार्क की शेरी नम्बर 3 के किशोर भाई ने बताया कि बड़े आयोजनों में जाने के बजाए सोसायटियों में ही मां की आराधना करना अच्छा लगता है। इसमें बच्चों से लेकर युवा और रास-गरबा खेलते हैं। उधर बुजुर्ग सभी के लिए नाश्ते की व्यवस्था करते हैं। पूरे नौ दिनों तक मां की आराधना के बाद दशहरे पर सभी सामूहिक भोज में शामिल होते हैं। इससे सबके बीच मेल-मिलाप बढ़ता है, सौहार्द की भावना बढ़ती है। सब एक-दूसरे के करीब आते हैं।
 

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