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गुजरात / 62 की उम्र में महिला ने बेटे को जन्म दिया, पिता की उम्र 66 साल



मधुबेन और उनका बेटा मधुबेन और उनका बेटा
मधुबेन की बेटी मनीषा मधुबेन की बेटी मनीषा
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मधुबेन और उनका बेटामधुबेन और उनका बेटा
मधुबेन की बेटी मनीषामधुबेन की बेटी मनीषा

  • एक हादसे में बुजुर्ग दंपती ने अपने बेटे-बहू और पोता-पोती को खो दिया था
  • 24 साल की बेटी ने माता-पिता से कहा था- लोग-समाज की शर्म कैसी?

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 11:33 AM IST

सूरत. गुजरात की मधुबेन गहलोत ने 62 वर्ष की उम्र में बेटे को जन्म दिया है। सूरत की रहने वाली मधुबेन और उनके 66 वर्षीय पति श्यामभाई गहलोत ने 2016 में एक सड़क हादसे में अपने बेटे-बहू समेत परिवार के 9 लोगों को खो दिया था। इसके बाद उनकी 24 साल की बेटी मनीषा ने मां और पिता को टेस्ट ट्यूब पद्धति से दोबारा संतान सुख हासिल करने के लिए प्रेरित किया।

पिता ने कहा- बेटी ने समझाया तो हम ट्रीटमेंट को राजी हुए

  1. बेटे के जन्म के बाद पिता श्यामभाई गहलोत कहते हैं कि मेरी बेटी मनीषा ने टेस्ट ट्यूब बेबी का सुझाव दिया था। पहले तो मैंने इनकार किया। हम सोचते थे कि समाज क्या कहेगा? पत्नी मधुबेन से बेटी मनीषा ने कहा कि छोड़ो ये सब! यह सोचो कि परिवार का भला किसमें है? इसके बाद हम ट्रीटमेंट के लिए तैयार हुए। मैं खुश हूं कि बेटे का जन्म हुआ है। 

  2. बेटी ने कहा- भाई-भाभी की मौत से डिप्रेशन में थे माता-पिता

    मनीषा स्टूडेंट हैं। वे बताती हैं कि जिस घर में पलक झपकते ही नौ व्यक्तियों की मौत हो जाए, उस पर क्या बीतती है ये मैं जानती हूं। यह दु:ख हमें झेलना पड़ा। नवंबर 2016 में सूरत में हुए हादसे में मेरे पिता ने 28 साल का बेटा, 26 साल की पुत्रवधू, पौत्र-पौत्री, दामाद और एक बेटी समेत नौ लोगों को खो दिया था। इसके सदमे से मां घुट-घुट कर जी रही थीं। मां और पिता को देखते ही लगता था कि उनके अंदर से जीने की चाह चली गई है।

  3. सेमिनार में आईवीएफ के बारे में जाना, मां से की बात

    मनीषा बताती हैं कि हादसे के छह महीने बाद मैं एक सेमिनार का हिस्सा बनी। यह आईवीएफ के बारे में था। इसके बारे में जानने समझने के बाद मां से बात की। भरोसे के साथ कहा कि घुटन से उबरो। प्रयास करो। भगवान ने चाहा तो घर में दोबारा किलकारी गूंजेगी। हुआ भी ऐसा ही। आईवीएफ के पहले ही प्रयास में सफलता मिली। 

  4. बेटी ने कहा- लोग-समाज की शर्म कैसी?

    मनीषा कहती हैं कि पहली बार जब मां से बात की थी तो उन्होंने कहा था कि ऐसा संभव नहीं हो सकता। पिता तक बात पहुंची तो वे कुछ बोले नहीं, लेकिन उनकी आंखों में आए आंसुओं से मैंने पीड़ा भांप ली। तय किया कि प्रयास करने में क्या दिक्कत है। मन में एक ख्याल ये भी आया कि मैं खुद 24 साल की हूं। लोग और समाज क्या कहेंगे? तभी विचार आया कि समाज तो दो-चार दिन से ज्यादा साथ नहीं देत। यह भी कहता है कि बेटियों को मत पढ़ाओ। ऐसे में मैं समाज की चिंता क्यों करूं?

  5. डॉक्टर बोलीं- गहलोत दंपती की बात सुन मैं चौंक गई थी

    सूरत की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा नाडकर्णी ने बताया कि मधुबेन जब शुरुआत में आईं तो मैं उनकी बात सुनकर चौंक गई थी। हालांकि उनकी बात जानने के बाद तय कर लिया कि 100 प्रतिशत प्रयास करूंगी। सामान्यत: 50 साल तक की महिलाएं इस तकनीक के जरिए संतान प्राप्ति की चाहत के साथ आती हैं।

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