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लापरवाही / कामरेज में 1 माह 20 दिन के जुड़वा बच्चों की मौत



मृतक जुड़वा बच्चे, इनसेट मां मृतक जुड़वा बच्चे, इनसेट मां
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मृतक जुड़वा बच्चे, इनसेट मांमृतक जुड़वा बच्चे, इनसेट मां

  • चार बेटियों के बाद हुआ था जन्म
  • बच्चों को बुखार भी नहीं आया

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 04:20 PM IST

सूरत. कामरेज के मुन्ना भरवाड़ के घर चार बेटियों के बाद अगस्त में खुशी की खबर आई। दो जुड़वा बेटे हुए। बुधवार को गांव की आंगनबाड़ी से कार्यकर्ता आई और बोली कि सब बच्चों को पोलियो के इंजेक्टेबल टीके लगाने हैं। मुन्ना की पत्नी भावुबेन सभी छह बच्चों को बुधवार दोपहर 12 बजे जाकर टीका लगवा लाई।


बच्चों को जगाया, तो नींद ही नहीं टूटी
गुरुवार सुबह जब भावुबेन ने एक माह 20 दिन के दोनों बेटों को जगाया तो उनकी नींद ही नहीं टूटी। फटाफट अस्पताल लेकर भागे। लेकिन, उम्मीद टूट चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। परिजनों के साथ गांव वालों ने जमकर हंगामा किया। फिलहाल मेडिकल कॉलेज की एक टीम को मामले की जांच सौंपी गई है। पुलिस भी जांच में लगी है। लेकिन, मुन्ना के घर मातम छाया हुआ है। समझ नहीं आ रहा कि इतने सालों के बाद आई खुशी को किसकी नजर लग गई। सिविल अस्पताल में दोनों शवों का फोरेंसिक पोस्टमार्टम किया गया है। सैंपल भी लैब भेजे गए हैं। 32 वर्षीय मुन्ना भरवाड़ की पत्नी भावुबेन को एक माह 20 दिन पहले सामान्य डिलीवरी से जुड़वां बेटे पैदा हुए थे। हालांकि टीका लगाने वाली कार्यकर्ता ने बताया था कि टीका लगने से बुखार आ सकता है, लेकिन घबराने की कोई बात नहीं।


बच्चों को बुखार भी नहीं आया
ओरना पीएचसी के इंचार्ज मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि टीके 24 साल का अनुभव रखने वाली सीनियर नर्स पार्वती बेन पटेल ने 9 बच्चों को लगाए थे। आधे घंटे बच्चों को ऑब्जर्वेशन में रखा था। बुखार आने की स्थिति में दवाई भी दी थी। टीका देने के आधे घंटे तक अगर कोई रिएक्शन होता है तो एंटी डोज भी देते हैं। लेकिन, किसी भी बच्चो को कोई परेशानी नहीं हुई। परिजनों ने बताया कि बच्चों को बुखार भी नहीं आया था और न ही दवा पिलाई थी। वैक्सीन में कोई कमी होती तो अन्य बच्चों को भी समस्या होती।


दो माह पर लगता है पहला टीका
अमेरिकी सरकार की संस्था सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से सलाह दी जाती है कि पोलियो आईपीवी वैक्सीन की पहली डोज के लिए उम्र कम से कम दो माह होनी चाहिए। इसके बाद चार महीने, छह से 18 महीने और फिर चार से छह साल की उम्र पर चार डोज दी जाती हैं। वहीं, भारत सरकार के नेशनल हेल्थ पोर्टल के अनुसार बच्चे की उम्र कम से कम साढ़े तीन साल होनी चाहिए, जब ओरल के साथ आईपीवी वैक्सीन दी जानी चाहिए। जबकि, इस मामले में डेढ़ महीने में ही वैक्सीन दे दी गई।

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