एक्सीडेंट / लोहे का एंगल पैर को पार करते हुए फेफड़े तक पहुंच गया



ध्रुवी बेन को जब अस्पताल लाया गया, तब 60 सेंटीमीटर लंबा एंगल पैर में ही फंसा हुआ था। ध्रुवी बेन को जब अस्पताल लाया गया, तब 60 सेंटीमीटर लंबा एंगल पैर में ही फंसा हुआ था।
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ध्रुवी बेन को जब अस्पताल लाया गया, तब 60 सेंटीमीटर लंबा एंगल पैर में ही फंसा हुआ था।ध्रुवी बेन को जब अस्पताल लाया गया, तब 60 सेंटीमीटर लंबा एंगल पैर में ही फंसा हुआ था।

  • मौत को अपने बेहद करीब पाया-ध्रुवी गोसालिया
  • यह रेरेस्ट ऑफ द रेयर केस था

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2019, 04:04 PM IST

अहमदाबाद. ‘23 जनवरी को मैं पति के साथ साणंद से आ रही थी। मैं अगली सीट पर सो रही थी। अचानक तेज आवाज होने पर मेरी आंख खुली, तो देखा कि रोड पर रेलिंग का एल आकार’ का एंगल कार के इंजन और डेशबोर्ड को छेद कर मेरे पैर की हड्डी को तोड़ते हुए मेरी जांघ में घुस गया। यही एंगल पांच पसलियों को तोड़ते हुए मेरे फेफड़े तक पहुंच गया। इस दौरान मौत को मैंने बहुत ही करीब से देखा।’


हर हालात में जूझने की शक्ति ने बचाया
उपरोक्त शब्द हैं वायएमसीए क्लब के पास एक्सीडेंट का शिकार बनी ध्रुवी बेन गोसालिया के। वह कहती हैं कि मुश्किल पलों में भी जूझने की आदत ने मुझे बचा लिया। भास्कर से बात करते हुए ध्रुवी ने बताया कि मेरे परिवार के लोगों की हिम्मत और डॉ.स्वागत शाह और उनकी टीम ने 4 घंटे की मशक्कत के बाद सलाख बाहर निकालकर मुझे नवजीवन दिया। घटनास्थल पर पहुंचकर फायर ब्रिगेड ने सलाख काट दी थी। कुल 70 टांके आए।


25 मिनट तक मैं दर्द से छटपटाती रही
ध्रुवी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही 108 वहां पहुंच गई। पर स्टाफ ने मेरे दर्द को कम करने के बजाए वहीं खड़ा रहा। उसने फायर ब्रिगेड को भी सूचना नहीं दी। जब मेरे भाई ने फायर ब्रिगेड को फोन किया, तो उसकी टीम ने वहां पहुंचकर सलाख को काटा। इस तरह से मैं 25 मिनट तक दर्द से छटपटाती रही। यदि 108 ने तुरंत फायर ब्रिगेड को फोन कर दिया होता, तो मुझे दर्द से जल्द ही मुक्ति मिल जाती। अस्पताल में जब डॉ. शाह ने मेरी जांच की, तो पता चला कि सलाख रेलिंग का एल आकार’ का एंगल कार के इंजन और डेशबोर्ड को छेद कर मेरे पैर की हड्डी को तोड़ते हुए मेरी जांघ में घुस गया है।


क्या कहा डॉ. शाह ने
आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. स्वागत शाह ने बताया कि एक्सीडेंट इतना गंभीर था कि लोहे का एंगल कार के इंजन, डेशबोर्ड को चीरते हुए ध्रुवी बेन के दाएं पैर, जांघ और 5 पसलियों को तोड़ते हुए फेफड़े तक पहुंच गया। इस दौरान उनका पैर ठंडा पड़ गया। नस की धड़कन बंद होने से तत्काल सर्जरी आवश्यक थी। मेरे साथ वासक्यूलर सर्जन डॉ. सुजल शाह और ट्रोमा सर्जन डॉ. संजय शाह भी थे। 8 दिनों बाद  ध्रुवी को डिस्चार्ज किया गया। यह रेरेस्ट ऑफ द रेयर केस था। इस केस को मेडिकल जनरल में पब्लिश किया जाएगा।


खून की नली लॉक कर हड्डियां जोड़ी
सर्जन डॉ.शाह ने बताया कि लोहे के एंगल के साथ धूल के बारीक कण और कलर से इंफेक्शन हो सकता था। यदि तुरंत सर्जरी न की गई होती, तो गेंगरीन हो सकता था। फेफड़ा काला पड़ जाता, तो ऑक्सीजन के अभाव में उसका जीवन जोखिम में पड़ जाता। एंगल निकालने के पहले फेफड़े में नली रखकर, सर्जरी में बहने वाले खून को रोकने के लए खून की मुख्य नली को लॉक की,  उसके बाद फेफड़े, जांघ और पैर की टूटी हुई हड्डी-मसल्स और एक्टर्नल फिक्सेटर से हड्डियों को जोड़ा।

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