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महामारी ने भारत को चारों तरफ से घेरा, मंदी की चपेट में क्रूड, बुलियन-शेयर बाजार ढलान पर, रुपया गिरा

एक वर्ष पहले
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  • पिछले 2 साल में रुपया रिकॉर्ड ढलान पर
  • लगातार बिक्री से सेंसेक्स 2018 के निचले स्तर पर पहुंचा

नीलेश झींझुवाड़िया, अहमदाबाद. कोरोनावायरस जिस तरह से चीन के बाद अन्य देशों में फैल रहा है, उसके कारण विश्व के अर्थतंत्र को झटका लगा है। इस कारण वैश्विक बाजार में पिछले दो सप्ताह में मंदी जैसा माहौल खड़ा हो गया है। स्टॉक मार्केट, क्रूड ऑयल, करंसी और सोने में काफी गिरावट आई है। इन सभी कारकों का असर भारतीय शेयर बाजार में दिखाई दे रहा है।
 

स्टॉक मार्केट रेड जोन में
विदेशी निवेशकों द्वारा शेयरों की बिक्री के कारण देश का स्टॉक मार्केट लगातार रेड जोन में दिखने लगा है। 12 मार्च को 2919 पाइंट गिरकर सेंसेक्स 32,778 के स्तर पर आ गया था। इसके पहले 2018 में उसे 32453.84 के नीचले स्तर पर देखा गया था। इस तरह से बीते 3 साल में जो तेजी आई थी, वह एक साथ खत्म हो गई है।
 

2020 के हाई से सेंसेक्स 22.46% घट गया
इस साल 41,349.36 के स्तर पर खुला मार्केट बढ़कर 42,173.87 के स्तर पर पहुंच गया था। इस दौरान बाजार में ऐसा माहौल बन गया था, जिससे लगता था कि सेंसेक्स 45,000 हो जाएगा। बाद में कोरोनावायरस के कारण चीन और अन्य देश मार्च महीने में मंदी की चपेट में आ गए। गुरुवार को एक ही दिन मेें सेंसेक्स 2919.26 पाइंट घटकर 32,778.14 के स्तर पर पहुंच गया था। इस तरह से 2020 के हाई से सेंसेक्स 22.46% घट चुका है।
 

वर्तमान स्तर पिछले 2018 की तरह देखने को मिला
सेंसेक्स का इस समय जो स्तर है, वह 2018 में देखने को मिला था। इसके पहले 2018 में 32,483.84 के निचले स्तर पर देखने को मिला था। इसके बाद बाजार इतना नीचे कभी नहीं पहुंचा। इसी साल सेंसेक्स ने 38,989.65 पाइंट का भी रिकॉर्ड बनाया था।
 

2017 में 7300 पाइंट की तेजी के बाद 2020 में 12 मार्च तक 8500 अंकों की गिरावट
सेंसेक्स का स्तर 2017 की शुरुआत में 26711.15 पर खुला था, जो बढ़कर 34137.97 तक पहुंचने के बाद 34056.86 के स्तर पर बंद हुआ था। इस तरह से 2017 में 7346 पाइंट की तेजी आई थी। इसके बाद चालू वर्ष में 2020 सेंसेक्स 41349.36 के स्तर पर खुला था, जो बढ़कर 42273.87 के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। बाद में सेंटीमेंट बदलने से केवल दो महीने 12 दिनों में ही सेंसेक्स साल की ओपनिंग से 8571 पाइंट टूटकर 32778.14 के स्तर पर पहुंच गया था।
 

12 साल में क्रूड के भाव में उच्चतम 145 डॉलर और निम्नतम 30 डॉलर 
वैश्विक बाजार 2008 की सब-प्राइम मंदी के बाद कोरोनावायरस से शुरु हुई महामारी की विकट परिस्थिति में फंस गए हैं।  एक तरफ कोरोनावायरस की गंभीर स्थिति निर्मित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ रशिया-ओपेक देश के बीच प्राइज वॉर छिड़ गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। 1991 में ख्राड़ी युद्ध के बाद क्रूड के भाव में ऐतिहासिक कमी देखी गई थी। डब्ल्यूएचओ ने कोरोना ने वैश्विक महामारी घोषित करने के बाद क्रूड प्रति बैरल 31 डॉलर हो गया है।
 

सब प्राइम आपात वर्ष जैसा संकट
2008 में वैश्विक अर्थतंत्र में आई सब प्राइम मंदी के कारण क्रूड ऑयल में भारी अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला था। अमेरिका की लेहमेन ब्रदर्स समेत दिग्गज कंपनियों के दिवालिया घोषित किए जाने के बाद सब प्राइम की मंदी के कारण वैश्विक बाजार में भूकंप आ गया था। क्रूड के भाव 2008 में 145 डॉलर की ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंच गए थे, अब 2020 में तेल के भाव 30.28 डॉलर प्रति बैरल के निम्नतम स्तर पर पहुंच गए हैं। क्रूड आयल के इतिहास में इतनी बड़ी गिरावट नहीं देखी गई।
 

वैश्विक अर्थतंत्र के सामने नई चुनौती
वर्ष 2008 में उच्च स्तर के बाद निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अगले तीन साल में क्रूड के भाव 100 डॉलर पार हो गए। 2011 में 113.39 डॉलर घटकर 75.40 डॉलर, 2012 में उच्चतम स्तर 109.39 डॉलर फिर 77.72 डॉलर, 2013 में 110.62 डॉलर और निचले स्तर पर 86.6.65 डॉलर, 2014 में उच्च 107.95 डॉलर और निम्न 53.45 डॉलर हो गया था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के भाव 2008 के सबसे नीचले स्तर पर
ऑयल की कीमतों में सबसे दिलचस्प बात यह है कि 2014 के बाद क्रूड के भाव 100 डॉलर पार कर गए थे। बहरहाल क्रूड के भाव वर्ष 2008 की सब प्राइम आपात स्थिति के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। डब्ल्यूटीआई क्रूड प्रति बैरल 31 डॉलर और ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल 33.45 डॉलर पर पहुंच गया है।
 

डॉलर के मुकाबले रुपए में भारी गिरावट
वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस के फैलने के कारण अर्थ तंत्र में आई अफरा-तफरी से 2020 में अब तक यूएस डॉलर के मुकाबले रुपए का भारी अवमूल्यन हुआ है। 2020 के जनवरी में 70.687, फरवरी में 71.090 था। मार्च महीने में आज स्थिति यह है कि यह भाव 74.345 हो गया है। यूएस डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं।
 

सात साल में रुपए डॉलर के मुकाबले 21 रुपए गिरा
यूएस डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। सरकार चाहे मनमोहन सिंह की हो, या फिर मोदी की। रुपए के मूल्य में लगातार आ रही गिरावट को किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की। पिछले सात साल में यानी 2013 से अब तक रुपए का मूल्य करीब 21 रुपए तक कम हुआ है। यह मूल्य 2013 में 53.90 था, जो मार्च 2020 में 72.026 हो गया है।
 

पिछले 5 साल में सोने के भाव 20,000 रुपए तक बढ़े
विश्व में भारत सोने का सबसे बड़ा निवेशक देश है। भारत में उसकी खपत में से अधिकांश सोने के आयात पर आधारित है। भारतीय शेयर बाजार में सोने के भाव 45,000 रुपए को पार हो गए हैं। पिछले 5 सालों में सोने के भाव में 26,343 से 45,000 की रेंज देखने को मिली। वर्ष 2016 में 26,623, 2017 में 29,667, 2019 में 31,438 और 2019 में 25,220 दर्ज किए गए। वर्ष 2019 के बाद अब सोने के भाव 45,000 रुपए हो गए हैं।  

अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में पिछले 20 साल में 1400 डॉलर का उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में लगातार उछाल देखने को मिला। वर्ष 2001 में एक औंस सोना 276.50 डाॅलर था। जो 2008 में सब प्राइम के संकट के समय करीब तीन गुना उछलकर 870 डॉलर हो गया था।  20 फरवरी , 2009 को सोने ने 1,000 डॉलर के स्तर को छुआ था। इसके बाद 2010 में 1,405 डॉलर और 2011 में 1531 डॉलर, 2017 में 1391 डॉलर और 2019 में 1,514 डॉलर क्वोट हुआ था। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव प्रति औंस 1,610 डॉलर है।