दमण-दीव और दानह में गुपचुप लागू हुआ पासा एक्ट, गिरफ्तारी हुई तो एक साल तक नहीं मिलेगी जमानत

3 वर्ष पहले
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  • पुडुचेरी के बाद दमण-दीव एवं दानह में लागू
  • संघ प्रदेश दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली में अपराध काबू में तो इतना सख्त कानून क्यों, उठ रहे ये तीन सवाल

वीरेंद्र कुमार राय, दमण. संघ प्रदेश दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली प्रशासन ने दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली प्रिवेंशन ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटीज एक्ट-2018 (पासा) को मंजूरी दे दी है। इस सख्त कानून को प्रशासन ने इतना गुपचुप रखा कि किसी को कानोकान खबर नहीं होने दी। आला अफसर भी सिर्फ इतना ही कह रहे हैं कि हां पासा लागू हो गया है।

 

इस एक्ट के लागू होते ही स्थानीय प्रशासन कानून व्यवस्था के नाम पर कोई भी गिरफ्तारी करता है तो आरोपी को एक साल तक जेल में रहना होगा। पुडुचेरी के बाद दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली पासा को लागू करने वाला दूसरा संघ प्रदेश बन गया है। हालांकि पुड्डुचेरी में विधानसभा है। ऐसे में सीधे प्रशासक के माध्यम से प्रशासित होने वाला दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली पहला ऐसा यूटी बन गया है, जहां पासा लागू किया गया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि प्रशासक के बढ़ते विरोध को देखते हुए पासा लाया गया है, ताकि विरोधियों का मुंह बंद किया जा सके। फिलहाल इसको अभी गजट नहीं किया गया है।

 

एडवाइजरी बोर्ड से ही होगा खारिज: इस मामले में आरोपी सबसे पहले राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एडवाइजरी बोर्ड में अपील कर सकता है। अगर बोर्ड को लगता है कि एक्ट का गलत उपयोग किया गया है तो वह पासा एक्ट को खारिज कर सकता है। अगर यहां से भी आरोपी को राहत नहीं मिली तो वह हाईकोर्ट और फिर उसके बाद सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।
 

चर्चा है कि राजनीतिक विरोध पर नियंत्रण के लिए पासा का होगा उपयोग : चूंकि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार दमण-दीव और दादरा नगर हवेली में अपराध अन्य राज्यों के तुलना में काफी कम है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि फिर पासा जैसे कड़े कानून को लागू करने की क्या जरूरत थी। इस बारे में जब एक पुलिस अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा, मामला पूरी तरह राजनीतिक है। पिछले कुछ दिनों से जिस तरह प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखी जा रही है। ऐसे ही विरोध पर नियंत्रण के लिए यह एक्ट लागू किया गया है।
 

1. दिल्ली और चंडीगढ़ में भी नहीं है पासा : देश में सबसे ज्यादा क्राइम के लिए विख्यात राजधानी दिल्ली में भी पासा जैसा कानून नहीं है और न ही चंडीगढ़ में। इससे मिलता जुलता कड़ा कानून भी लागू नहीं है। चंडीगढ़ में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ में मकोका जैसा लागू करने की मांग गृह मंत्रालय से की गई है, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

 

2. अपराध में दोनों प्रदेश 33वें और 35वें नंबर पर : दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2016 के अनुसार दमण-दीव 36 राज्य व केन्द्र शासित राज्यों में 33वें नंबर पर आता है जबकि दादरा नगर हवेली 35वें नंबर पर है।

 

3. आम चुनाव तक पास करवाना जरूरी नहीं : विधि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एक्ट को नोटिफाइड करने के छह महीने के अंदर संसद या विधानसभा से पास कराना होता है। यानी कि लोकसभा चुनाव होने तक इसे पास करवाने की जरूरत नहीं है।
 

डीआईजी ने माना कि एक्ट नोटिफाइड हुआ, पर नहीं दी जानकारी : इस मामले में जब दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली के डीआईजी बीके सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हां यह सही है कि पासा को संघ प्रदेश दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली में नोटिफाइड कर दिया गया है, लेकिन ज्यादा जानकारी देने से उन्होंने मना कर दिया। वहीं कार्मिक विभाग की उप सचिव गुरुप्रीत कौर ने भी सिर्फ इतना ही कहा कि कानून को नोटिफाइड कर दिया गया है।

 

उमेश पटेल बोले- मेरी गिरफ्तारी करवा सकते हैं प्रशासक, लेकिन मैं जनता के लिए लड़ता रहूंगा : स्थानीय प्रशासक प्रफुल्ल पटेल व भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले दमण यूथ एक्शन फोर्स के प्रमुख उमेश पटेल ने आशंका जताई कि इस एक्ट से मेरी गिरफ्तारी की जा सकती है। उन्होंने भास्कर से कहा कि प्रशासक ने साबित किया कि विरोध उन्हें पसंद नहीं है। वह मेरी आवाज को बंद करना चाहते हैं। लेकिन, मैं चुप रहने वाला नहीं हूं। जनता के लिए लड़ता रहूंगा। सूत्रों का कहना है कि उमेश पटेल की लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी और दमण-दीव की सीट बचाने के लिए ही प्रशासक की अनुशंसा पर यह कानून लाया गया है। 

 

तीन केस और कलेक्टर की सहमति पर लगेगा पासा : पासा में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले उसके खिलाफ आईपीसी सहित अन्य एक्ट में तीन मामले दर्ज होने चाहिए। इसके बाद थाना इंचार्ज कलेक्टर के पास अप्रूवल के लिए फाइल भेजता है। वहां से संतुष्टी मिलने के बाद आरोपी को पासा के तहत गिरफ्तार किया जाता है।