गुजरात / 12 प्रकार की पतंगें बनाते हैं खंभात के कारीगर, अहमदाबाद से लेकर अमेरिका तक है इनकी मांग

Pole kite demand from Ahmedabad to America
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Pole kite demand from Ahmedabad to America

  • 1 साल में 4 करोड़ का टर्न ओवर, अलग डिजाइन, उत्तम कागज और आकर्षक डिजाइन के कारण हैं लोकप्रिय
  • एक पतंग की कीमत 5 रुपए से 2 हजार रुपए तक खंभात के चुनारा और मुस्लिम समाज के लोग बनाते हैं पतंगें

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2020, 03:53 PM IST

खंभात. खंभात की पतंगें अपनी डिजाइन, कागज और हर साल कुछ नई कलात्मक कारीगरी के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। गुजरात समेत मुम्बई, कोलकाता, जयपुर में भी खंभाती पतंगों की डिमांड है। यहां के कारीगर इस व्यवसाय पर 4 करोड़ का टर्न ओवर हर साल देते हैं। इस उद्योग में 100 परिवार जुड़े हैं। इनका गुजारा भी इन्हीं पतंगों से होता है। विदेशों में कनाड़ा,ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और अमेरिका में भी खंभात की पतंगों की डिमांड रहती है।


राज्य के सभी जिलों में खंभाती पतंगों की डिमांड
गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, जंबुसर, भरुच, राजकोट, आणंद, नडियाद जैसे शहरों में खंभाती पतंगों की काफी डिमांड रहती है। खंभात में वर्षों से पतंग उत्पादन के साथ जुड़े बिपीन चंद्र चुनारा ने बताया कि प्राचीन नगरी खंभात में नवाबी काल से परंपरागत रूप से उत्तरायण मनाया जाता रहा है। एक अंदाज के मुताबिक सूरत में खंभात की 70 लाख से अधिक की पतंगों की बिक्री होती है। मकर संक्रांति तक यह आंकड़ा एक करोड़ भी पार कर जाता है।


हजारों कारीगरों को रोजगार देती है पतंग
खंभात नगर के कारीगर को पतंग उत्पादन की कला अपने बुजुर्गों से मिली है। हर साल कुछ नया करने की इच्छा के चलते वे कारीगर पतंगों को नया रूप देने को तत्पर रहते हैं। यहां के चुनारा और मुस्लिम समाज के हजारों परिवारों को यही पतंगें रोजगार दे रही हैँ। इस बिजनेस का वार्षिक टर्न ओवर 4 करोड़ रुपए है।


12 तरह की पतंगें बनाई जाती हैं
खंभात में 12 तरह की पतंगें बनाई जाती हैं। इसे बनाते समय 8 प्रकार की विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत गुजारा जाता है। पतंगों के लिए बांस वलसाड़ और असम से मंगाया जाता है। इन बांस से कमान तैयार की जाती है। पतंग हवा में स्थिर रहे, इसके लिए बांस को छीलकर उसकी कमान तैयार की जाती है। राज्य के अन्य शहरों की अपेक्षा खंभाती पतंगों का कागज उच्च गुणवत्ता का होता है। एक कागज से 6,3 या 2 पतंगें बनाई जाती हैं। इन पतंगों को आधी, पौनी या पावली कहा जाता है। दूसरी ओर चील, घेसियो, चांपट, गोल और सूर्य पतंगें भी विभिन्न रंगों से बनाई जाती हैं।


विदेशी दस गुना अधिक दाम देते हैं
विदेशों में खंभात की पतंगों की डिमांड अधिक होने से कई बार दस गुना दाम मिल जाता है। यहां चील पतंग 5 से 10 रुपए में बिकती है। यही पतंग वहां 50 से 60 रुपए में बिक जाती है। अफ्रीका के नैरोबी में भी पतंगोत्सव होता है। तब वहां भी खंभाती पतंगों की डिमांड बढ़ जाती है।


5 से 2000 रुपए की पतंगें
खंभात की विभिन्न वेरायटी की पतंगें गुजरात के अलावा अमेरिका, अफ्रीका, कनाडा जैसे देशों में जाती हैं। इसकी फिनिशिंग अन्य राज्यों में बनने वाली पतंगों से अच्छी होती है। यहां दो इंच से लेकर बारह फीट तक की पतंगें मिलती हैं। जिसकी कीमत 5 से 2000 रुपए तक होती है। खंभात में गवरा रोड, चकडोल मैदान, लाल दरवाजा में पतंग के स्टॉल देखने को मिलते हैं।

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