बदहाल शिक्षा / उत्तर पुस्तिका में लिखा- मुझे कुछ आता नहीं, टीचर पढ़ाते नहीं, टाइम पास कर रहा हूं



नर्मद यूनिवर्सिटी, सूरत नर्मद यूनिवर्सिटी, सूरत
X
नर्मद यूनिवर्सिटी, सूरतनर्मद यूनिवर्सिटी, सूरत

  • आंसर शीट में फिल्मी गीत लिखने के साथ दो हजार रुपए के नोट रख रहे हैं छात्र
  • एक छात्र ने अपनी जगह अपने दोस्त को परीक्षा देने को भेज भेजा, जांच में पकड़ा गया

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 05:48 PM IST

अनूप मिश्रा, सूरत. सूरत की शिक्षा व्यवस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां ग्रेजुएशन के छात्र उत्तर पुस्तिकाओं में शायरी, फिल्मी गीत लिखने के साथ 2000-2000 रुपए का नोट रख रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ सिर्फ 500 रुपए का जुर्माना लगाया जा रहा है। कुछ को तो चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है, क्योंकि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का नियम बदलकर ढीला नियम बना दिया गया था।

 
वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी से संलग्न कॉलेजों की परीक्षाओं में छात्रों ने पास होने के लिए एग्जामिनर को लालच तक दे डाला। मामला सामने आने के बाद फैक्ट कमेटी ने साधारण से सजा सुना दी। नियम सख्त नहीं होने से छात्रों को डर नहीं होता और वे कुछ भी लिख देते हैं। अब सिंडीकेट ने जांच कराने की बात कही है।


नकलची: 6 छात्रों को परीक्षा से पहले मिल गई उत्तर पुस्तिका
एक छात्र ने अपनी जगह अपने दोस्त को परीक्षा देने को भेज दिया था, लेकिन वह जांच में पकड़ा गया। सिंडीकेट ने इस मामले को भी वापस भेज दिया है। एक काॅलेज के छात्र को तो पहले ही उत्तर पुस्तिका मिल गई। वे घर से उत्तर लिखकर ले गए, लेकिन परीक्षा के समय पकड़े गए। फैक्ट कमेटी के निर्णयों को जब सिंडीकेट में रखा गया तो पता चला कि कई मामले में काॅलेज और प्रोफेसरों की मिली भगत है। सिंडीकेट ने जांच कराने की बात कही है।


तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे
एक छात्र ने उत्तर पुस्तिका में "तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे, गीत पूरा का पूरा लिख डाला। उसके बाद लिखा कि 30 मिनट पहले क्लास से निकलना है, इसलिए ऐसा लिख रहा हूं, कुछ आता नहीं है मुझे, तो प्रेम ही लिखना पड़ रहा है। मेरी मजबूरी समझकर मुझे पास कर देना। 

 

क्या करूं मुझे कुछ आता ही नहीं है
अमरोली के एक छात्र ने उत्तर पुस्तिका में लिखा- क्या करूं मुझे कुछ आता ही नहीं है। क्लास में टीचर पढ़ाते भी नहीं हैं, सप्लीमेंट्री जमा करवा रहा हूं, तो लेते भी नहीं हैं। मैं भी टाइम पास कर रहा हूं और गप्पे मार रहा हूं साहब। कुछ पढ़ाते ही नहीं हैं। मैं तो पास नहीं हो पाऊंगा। मुझे पता है कि आप इसे पढ़कर गुस्सा करेंगे, लेकिन क्या करें साहब हमें क्लास के बाहर जाने ही नहीं देते।
 

तेरी ज़ुल्फों के साये में जीना है मुझे
उत्तर की जगह लिखा- 'तेरी ज़ुल्फों के साये में जीना है मुझे, मोहब्बत को जल समझ पीना है मुझे...' एक छात्र ने उत्तर पुस्तिका में 2 हजार रुपए के नोट रख दिए। जब परीक्षक ने कॉपी जांचनी शुरू की तो नोट मिले। जानकारी फैक्ट कमेटी को दी। एक अन्य छात्र ने 100 रुपए के नोट रखे थे। उसके खिलाफ भी फिर से सुनवाई की जाएगी। सिंडीकेट ने इन मामलों को रिफर बैक किया है।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना