मां की समझदारी / आधुनिक टेक्नालॉजी से घर लौटा मूक-बधिर बेटा



हाथ पर नाम और मोबाइल नम्बर का टेटू हाथ पर नाम और मोबाइल नम्बर का टेटू
प्रसव के बाद नवजात बेटा-बेटी प्रसव के बाद नवजात बेटा-बेटी
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हाथ पर नाम और मोबाइल नम्बर का टेटूहाथ पर नाम और मोबाइल नम्बर का टेटू
प्रसव के बाद नवजात बेटा-बेटीप्रसव के बाद नवजात बेटा-बेटी

  • मां ने हाथ पर गुदवाया घर का पता और मोबाइल नंबर
  • गुम हुआ तो इसी से लौटा 10 साल का मूक-बधिर बेटा

Dainik Bhaskar

Nov 07, 2019, 01:01 PM IST

सूरत. बच्चा न सुन पाता है और न बोल पाता है। सिर से पिता का साया उठ चुका है। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए मां ने बच्चे के हाथ पर टैटू गुदवा दिया, जिसमें घर का पता और मोबाइल नंबर लिखा है। रविवार को यही टैटू परिवार के लिए वरदान साबित हो गया। पांडेसरा निवासी 10 साल का बच्चा घर से गायब हो गया और किसी तरह नवसारी पहुंच गया। किसी ने उसके हाथ पर लिखे नम्बर पर फोन कर बच्चे के बारे में बताया। जिसके बाद बच्चा घर लौट पाया।
 

6 माह पहले हाथ पर बनवाया था टैटू
पांडेसरा प्रेमनगर निवासी लताबेन अपने दो बच्चो के साथ रहती हैं। पति के देहांत के बाद लता मजदूरी कर बच्चों का पेट पालती हैं। बच्चों को घर पर ही छोड़कर काम पर जाती हैं। रविवार को वह अपने दूसरे बेटे राहुल (बदला हुआ नाम) जो जन्म से ही मूक बधिर है, को छोड़कर काम पर चली गई थी। राहुल खेलते खेलते कहीं गायब हो गया। शाम को जब लता घर आई तो एक बेटा था पर राहुल नहीं था। आस पड़ोस में तलाश शुरू हुई। लेकिन, राहुल नहीं मिला। देर रात तक तलाश चलती रही। पुलिस में प्राथमिक शिकायत दी। बुधवार को लता को एक फोन आया, उसने कहा मैं नवसारी से बोल रहा हूं, एक बच्चा यहां रो रहा है, उसके हाथ पर मोबाइल नम्बर लिखा है। मुझे नहीं पता किसका है, मैंने इसी नम्बर पर फोन कर दिया। उसकी बात सुनकर लता खुशी से रोने लगी। लता ने कहा वह मेरा बच्चा है। बचपन से मूक बधिर है, इसलिए छह माह पहले उसके हाथ पर नाम पता और मोबाइल नम्बर का टैटू करवा दिया था। लता नवसारी जाकर अपने बच्चे को ले आई।
 

108 कर्मियों की सूझबूझ ने एक मां की जटिलता खत्म की
सूरत. पांडेसरा की एक प्रसूता की 108 एंबुलेंस कर्मियों ने फुटपाथ पर ही नॉर्मल डिलीवरी करवाई। महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, जिसमें एक बेटी एक बेटा है। तीनों का सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। बच्ची को सांस लेने में समस्या है, इसलिए एनआईसीयू में इलाज चल रहा है। परिजनों ने बताया कि सिविल और निजी अस्पताल के डॉक्टर कहते रहे कि पेट में जुड़वा बच्चे हैं, इसलिए सिजेरियन करना पड़ेगा। ऐसे में 108 एंबुलेंस कर्मियों द्वारा नॉर्मल डिलीवरी करवा देने से परिजनों में काफी खुशी है। वहीं डॉक्टरों ने भी कर्मियों की प्रशंसा की है। 108 एम्बुलेंस सर्विस कर्मियों ने इसी साल जनवरी से सितंबर यानी 9 माह में इस तरह की 320 सफल डिलीवरी करवाई हैं। 
 

झूठा साबित हुआ डॉक्टर का दावा
पांडेसरा जय अंबे नगर निवासी मनीष मिश्रा ऑटो चलाकर परिवार का गुजर-बसर करते हैं। 6 साल के एक बच्चे के बाद मनीष की पत्नी 25 वर्षीय नीतू 9 माह से गर्भवती थी। सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा था। 10 दिन पहले डॉक्टरों ने कहा था कि पेट में दो बच्चे हैं, इसलिए सिजेरियन करना पड़ेगा। इसके बाद नीतू दवा लेकर घर आ गई थी। मंगलवार देर रात उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। रात करीब 2:00 बजे जेठ ने 108 एंबुलेंस को फोन करके बुलाया। कुछ ही मिनट बाद पांडेसरा लोकेशन पर तैनात एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक नीतू को प्रसव पीड़ा तेज हो गई थी। वह फुटपाथ पर बैठ गई। जब तक उसे एम्बुलेंस में शिफ्ट किया जाता, उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद एंबुलेंस कर्मियों ने फुटपाथ पर ही बेसिक सुविधाओं के साथ डिलीवरी कराई। थोड़ी देर बाद एक बच्ची को भी जन्म दिया।
 

बच्ची के गले पर फंस गई थी नाल
बच्ची के गले में नाल फंस गई थी, 108 एंबुलेंस के ईएनटी हीरेन बारोट और पायलट आहिरे ने बताया कि बच्चा स्वस्थ है। बच्ची को सांस लेने में समस्या है। जन्म के समय बच्ची के गले में नाल फंस गई थी। उसे निकाला। गैलोजन से गर्मी दी। ऑक्सीजन के साथ उसे अस्पताल पहुंचाया।
 

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