उत्तरायण पर भास्कर की अपील / तलवार की तरह गला काटने वाले चाइनीज धागे से दूर रहो, तभी पतंगबाजी का सही मजा आएगा

परमपूज्य महंत स्वामी, डॉ. एम एफ शेख, एडवोकेट योगेश परीख, तथा समाज सेवक मनोज भावसार परमपूज्य महंत स्वामी, डॉ. एम एफ शेख, एडवोकेट योगेश परीख, तथा समाज सेवक मनोज भावसार
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परमपूज्य महंत स्वामी, डॉ. एम एफ शेख, एडवोकेट योगेश परीख, तथा समाज सेवक मनोज भावसारपरमपूज्य महंत स्वामी, डॉ. एम एफ शेख, एडवोकेट योगेश परीख, तथा समाज सेवक मनोज भावसार

  • दो दिनों तक पतंगबाजी का मजा अवश्य लें
  • ध्यान रखो, किसी की जिंदगी की डोर न कटे

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2020, 04:17 PM IST

अहमदाबाद. अब दो दिनों तक शहर में पतंगबाजी के नजारे देखने को मिलेंगे। उत्तरायण का पर्व हर्षोंल्लास के साथ मनाया जा रहा है। ऐस में भास्कर ने इस पर्व की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से अपील की है कि तलवार की तरह गला काटने वाली चाइनीज डोरी से दूर रहें। पर्व मनाएं, पर ध्यान रखें कि किसी निर्दोष के जीवन की डोरी न कटे। साथ ही उन बेजुबान पशु-पक्षी का भी ध्यान रखें, जो हमारी लापरवाही से मौत के कगार तक पहुंच जाते हैं।
 

हर साल धारदार डोरी से 50 लोग घायल होते हैं
उत्तरायण के दौरान इंसानों के अलावा पशु-पक्षी भी धारदार मांजे के शिकार होते हैँ। हर साल करीब 50 ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसमें डोरी से गले कटने की वारदात होती है। जब से चाइनीज धागे का इस्तेमाल बढ़ा है, तब से इस तरह के मामले और भी अधिक खतरनाक हो गए हैं। इसलिए त्योहार के दौरान यह ध्यान रखा जाए कि किसी निर्दोष के जीवन की डोर न कट जाए।
 

चाइनीज धागे को कहें- बाय-बाय
परमपूज्य महंत स्वामी, बीएपीएस के सर्वेसर्वा का मानना है कि काफी समय से पतंग की डोरी से अनेक निर्दोष पशु-पक्षी और इंसानों को मृत्यु की वेदना सहन करनी पड़ रही है। यह दु:खद है। अपने आनंद के लिए दूसरों को कष्ट देना भला कहां का नियम है। सभी को जीने का अधिकार है। अनजाने में भी किसी को हमारी ओर से तकलीफ न पहुंचे, इसका हमें बराबर ध्यान रखना चाहिए। पशु-पक्षी स्वच्छंद विचरण करेंगे, तो हमारे आनंद में वृद्धि होगी। इसलिए अभी से चाइनीज धागे को बाय-बाय कह दें।
 

टूटती नहीं, सीधे गले में फंस जाती है
चाइनीज डोरी तलवार की तरह सीधे गले में उतर जाती है। इससे व्यक्ति की हालत गंभीर हो जाती है। चाइनीज डोरी टूटती नहीं, बल्कि खिंचती चली जाती है। इससे वह गले की धमनी की तरफ बढ़कर उसे काट देती है। जिससे जिंदगी खत्म होने के करीब पहुंच जाती है। कई बार खून अधिक बह जाता है, इसलिए व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो जाती है। यह विचार हैं सिविल अस्पताल के डॉ. एम.एफ. शेख के, जो प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष हैं।
 

मासूम की मौत नहीं भूल पाया हूं-योगेश पारेख
एडवोकेट योगेश पारेख का कहना है कि उत्तरायण में पिता के साथ स्कूटर पर निकले 5 साल के मासूम के गले में अचानक चाइनीज डोरी फंस गई। खून अधिक बह जाने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। उसकी मौत को मैं आज तक नहीं भूल पाया हूं। यह तो अपराध है। ऐसा अपराध जिस पर जमानत भी नहीं होनी चाहिए। योगेश बताते हैं कि मैं इस चाइनीज डोरी का शिकार हो चुका हूं। इस डोरी के विक्रय पर बेन लगा है, फिर भी इसे बेचा जा रहा है। यह डोरी बहुत ही ज्यादा घातक है। मैं इसका शिकार हो चुका हूं। इस डोरी ने कई निर्दोष मानव, पशु-पक्षी की जान ले ली है। जो भी चाइनीज धागे के साथ पकड़ा जाए, उस पर भारतीय दंड विधान 188 के तहत एक साल की कैद और 200 रुपए के दंड का प्रावधान है। सरकार इस कानून को और भी सख्त बनाए। व्यापारियों से भी अपील है कि वे इस तरह के धागे बेचे ही नहीं।
 

गले कटने की वेदना असह्य है-मनोज भावसार
पिछले 13 साल से उत्तरायण पर पतंग की डोरी से कोई घायल न हो, इसलिए हर ब्रिज पर लोेहे के तार बांधने का काम कर रहा हूं। पिछले साल फर्स्ट रिस्पाण्डर मेडिकल सेंटर भी खोला, इसमें चाइनीज डोरी से प्रभावित 38 लोग इलाज के लिए पहुंचे। इस घायलों की वेदना इतनी तीव्र थी कि उन्हें देखकर आंखें भर आई। एक नवयुगल ऐसा भी आया, जिसकी हालत देखकर कुछ भी कहा नहीं जा सकता। उस समय शब्द मौन हो गए। इसलिए कहता हूं कि चाइनीज डोरी का उपयोग बिलकुल भी न करें।

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