पर्यावरण / अहमदाबाद का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ



हवा के प्रदूषण के कारण शहर में मंगलवार की सुबह 11 बजे तक वातावरण धुंधला था। हवा के प्रदूषण के कारण शहर में मंगलवार की सुबह 11 बजे तक वातावरण धुंधला था।
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हवा के प्रदूषण के कारण शहर में मंगलवार की सुबह 11 बजे तक वातावरण धुंधला था।हवा के प्रदूषण के कारण शहर में मंगलवार की सुबह 11 बजे तक वातावरण धुंधला था।

  • फैक्टरी-वाहन का धुआं सबसे अधिक जवाबदार
  • ऑक्सीजन की मात्रा घट रही है
  • दो दिनों तक हालात ऐसे ही रहेंगे

Feb 06, 2019, 01:07 PM IST

अहमदाबाद. शहर में प्रदूषण का स्तर मंगलवार को 309 AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) था। दूसरी ओर रायखड में तो यह स्थिति 422 की अत्यंत खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। शहर में सोमवार को AQI 195 था, तो मंगलवार को अचानक ही 309 हो जाने पर सभी को आश्चर्य है।


नगर निगम सुस्त
इसके पहले AQI जब 350 था, तो नगर निगम ने एक घोषणा पत्र में लोगों से इस दिशा में सुझाव मांगे थे, पर इस बार निगम ने इस तरह का कोई प्रयास नहीं किया है। शहर के अन्य स्थानों का AQI आम तौर पर 300 से 345 रहा। देश के पश्चिमी भाग में इस समय कोल्ड वेव की स्थिति है। ऐसे में शहर का प्रदूषण अचानक ही खतरनाक स्तर पर पहुंचने पर म्युनि. एन्वायरमेंट इंजीनियर दर्शना पटेल ने बताया कि ठंड में आर्द्रता बढ़ने से रजकण ऊपर नहीं जाते पाते। इस कारण ऐसे हालात बनते हैं।


दो दिनों तक हालात ऐसे ही रहेंगे
ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रोपिकल मिटिरियोलॉजी के डॉ. गुरफान बेग ने इस संबंध में बताया कि देश के पश्चिमी भाग में इस समय कोल्ड वेव की स्थिति है,इस कारण ऊपर की हवा का दबाव अधिक होने के कारण प्रदूषण नीचे उतरता है। इस समय यही हालात हैं, अभी दो दिनों तक इसमें कोई बदलाव के आसार नहीं हैं।


ऑक्सीजन की मात्रा घट रही है
सीनियर चेस्ट फिजिशियन नरेंद्र रावल के अनुसार ठंडी-गर्मी के संधि मौसम में कार्बनडायऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड और धूल के रजकण की मात्रा बढ़ने से ऑक्सीजन की मात्रा घटती है, जो फेफड़ों में जांने से एक्यूट ब्रोंकाइटीस, एलर्जिक ब्रोंकाइटीस, दमा, प्लमोनरी फायब्रोसिस होता है। नाक बंद होना, अपच, उल्टी-उबकाई और गैस की तकलीफ होती है।


धीमे पवन से रजकण स्थिर हो जाते हैं
शहर में दो दिनों से हवा की गति प्रति घंटे 4 से 5 कि.मी. और सुबह-दोपहर को प्रति घंटे 0 कि.मी. थी। जब हवा की गति मंद होती है, तो हवा में मिले हुए धूल-रजकण आगे बढ़ने के बदले एक ही जगह पर स्थिर हो जाते हैं। इस कारण प्रदूषण में अचानक ही वृद्धि हो जाती है। 24 घंटे बाद हवा की गति बढ़ने से प्रदूषण घट सकता है। अंकित पटेल, मौसम विशेषज्ञ


फैक्टरी-वाहन का धुआं सबसे अधिक जवाबदार
दुधेश्वर और नारोल जैसे इलाकों में स्थित फैक्टरियों से जिस तेजी से काला धुआं निकल रहा है और वाहनों के धुएं से जो प्रदूषण हो रहा है, यही इसके लिए जवाबदार है। ठंड में धुआं जमीन की तरफ आता है। इससे प्रदूषण अधिक होने का अहसास होता है। प्रदूषण घटाने के लिए लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट और पुल कार जैसे विकल्पों को अपनाना चाहिए। कार्तिकेय साराभाई,डायरेक्टर सेंटर फॉर एन्वायर्मेंट एजुकेशन, सीईई


कार्बन डाय ऑक्साइड के कारण ऑक्सीजन घटती है
वातावरण में घुली कार्बनडाय ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड और धूल के कणों से ऑक्सीजन की मात्रा घटती है। इससे फेफड़ों की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।


एयर क्वालिटी इंडेक्स की मात्रा का असर

 

   क्षेत्र  कैसा माना जाए          असर
  रायखड़ गंभीर अस्थमा, हृदयरोगियों के लिए खतरनाक
   रखियाल               बहुत खराब सांस की बीमारी के लिए खतरनाक
  चांदखेड़ा          बहुत खराब    फेफड़ों की तकलीफ हो सकती है
   एयरपोर्ट                    खराब  सांस लेने में तकलीफ
  पिराणा                      मध्यम  सांस लेने में तकलीफ
  सेटेलाइट                  मध्यम   अस्थमा, हृदयरोगी को सांस में तकलीफ
 बोपल                      मध्यम अस्थमा, हृदयरोगी को सांस में तकलीफ


                  

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