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पुलिस हिरासत में रात भर तड़पता रहा युवक, सुबह हो गई मौत

एक वर्ष पहले
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मृतक विमल की फाइल तस्वीर - Dainik Bhaskar
मृतक विमल की फाइल तस्वीर
  • बिना एफआईआर रात भर लॉकअप में रखा
  • अस्थमा से घुटा दम, तो मांगता रहा इनहेलर, नहीं दिया, सुबह हो गई मौत
  • साथ में लॉकअप में बंद भाई ने कहा- दो हजार मांगे थे
  • पुलिस बोली- चलकर गया था एंबुलेंस तक
  • परिवार वालों ने किया लाश को स्वीकारने से इंकार

सूरत. पांडेसरा थाने में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई। दो परिवारों के आपसी झगड़े में पुलिस ने एक परिवार के कुछ लोगों को पकड़कर थाने के लॉकअप में डाल दिया, जिसमें एक अस्थमा पीड़ित मरीज भी था। मरीज बार-बार कहता रहा है कि वो अस्थमा का पेशेंट है उसे यहां न रखें। वह रात भर मदद की गुहार लगाता रहा और अस्थमा अटैक को रोकने के लिए पंप मांगता रहा, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी, जिसके कारण सुबह में उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने मांगी थी रिश्वत
मृतक के साथ जेल में बंद उसके भाई ने कहा कि जब एंबुलेंस बुलाकर उसे अस्पताल भेजा गया तब तक मौत हो चुकी थी। वहीं पुलिस का दावा है कि उसकी इलाज के दौरान मौत हुई। इन सबके बीच यह भी आरोप है कि पुलिस ने घर जाने के लिए दो हजार रुपए मांगे थे, नहीं देने पर सभी को थाने के लॉकअप में डाल दिया, जो मौत की वजह बनी। मौत के बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई को लेकर उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया। पुलिस के आला अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। 
 

मामूली विवाद पहुंचा थाने तक
होली की रात लगभग 8.30 बजे पांडेसरा के बालाजी नगर में प्लॉट नंबर 458 और 459 में रहने वाले विमल त्रिभुवन यादव और राकेश कुमार बिंद के बीच विवाद हुआ था। मामला बढ़ा तो राकेश ने 100 नंबर डायल कर पुलिस बुला ली। पीसीआर नंबर 41 से संजय रणछोड़ और गुलाब नामक पुलिसकर्मी मौके पर आए और विमल त्रिभुवन यादव, भाई विनय यादव और पिता त्रिभुवन यादव को अपने साथ थाने ले गए। साथ में उन्होंने शिकायतकर्ता राकेश को भी थाने बुलाया। जहां दोनों का पक्ष सुनने के बाद पुलिस ने विमल, विनय और त्रिभुवन को दो-दो थप्पड़ मारकर लॉकअप में डाल दिया। इसके बाद इनके परिवार के अन्य लोग भी आए और पुलिस ने बाहर निकालने का अनुरोध करने लगे।
 

पुलिस ने मांगे 2000 रुपए
आरोप है कि इसके लिए उन्होंने पैसे की मांग की। मृतक विमल के भाई विनय ने बताया कि रात में जब पुलिस वाले उन्हें लॉकअप में बंद किया तो उस वक्त उनसे 2000 रुपए मांगे गए थे, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। इसलिए उन्हें घर नहीं जाने दिया गया। यही वजह है कि उसके भाई विमल की मौत हो गई। इसकी पुष्टि राकेश बिंद ने भी की है।
 

अस्थमा पेशेंट को पंप नहीं मिलने से हो जाती है मौत: डॉ. वडगामा
सिविल की टीबी चेस्ट विभाग की प्रोफेसर डॉ. पारुल वडगामा ने बताया कि अस्थमा अटैक वाले मरीज को दो से तीन मिनट में पंप की जरूरत होती है। विशेषतौर पर सुबह शाम। अटैक की स्थिति में कई बार पंप देना जरूरी होता है साथ ही उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए। सुबह में मरीजों को अस्थमा की शिकायत ज्यादा होती है। ऐसी स्थिति में पंप नहीं मिला तो फेफड़े ब्लॉक हो जाते हैं इससे ब्रेन को मिलने वाला ऑक्सीजन नहीं मिलता, हार्ट भी काम करना बंद करने लगता है।
 

अस्थमेटिक अटैक की संभावना : डॉ. रुतुल
सिविल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. रुतुल ने बताया कि कोई भी मरीज आता है तो हम उसकी हिस्ट्री के लिए 108 कर्मी से जांच की रिपोर्ट मांगते हैं। इस केस में 108 कर्मी ने बताया कि जब मरीज को एम्बुलेंस में रखा तो उसका पल्स बीपी और हार्ट नहीं चल रहा था। शायद वह पहले ही मर चुका था। वहीं फोरेंसिक विभाग के एचओडी डॉ. गणेश गोवेकर ने बताया कि शव का फोरेंसिक पीएम किया गया। जरूरी सैंपल लैब भेजे गए हैं। शरीर पर कोई भी इंजरी के निशान नहीं हैं। अस्थमेटिक अटैक ही आशंका है।
 

जांच में जुटी पुलिस, सारे कैदियों को थाने में बुलाया
लॉकअप में मौत हो जाने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है। मामले की जांच एसीपी को दिए जाने के लिए कहा गया है। होली के दिन मृतक के साथ कितने आरोपी बंद थे सबको बुलाया गया है। साथ ही पीसीआर वैन चालक, कांस्टेबल और पीएसओ बिपिन सहित सभी से पूछताछ की जा रही है।
 

इस केस में आरोपी को कस्टडी में रखना कानूनी तौर पर गलत
एक रिटायर्ड जज ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस किसी भी नॉन कॉग्जिनेबल के मामले में आरोपी को लॉकअप में बंद नहीं कर सकती है। अभी तक इस मामले में जैसा जानने को मिला है उसमें पुलिस की गलती दिख रही है। यदि कॉग्जिनेबल एक्ट के मुताबिक आरोपी दोषी है तो भी जब तक मामला दर्ज ना हो जाए तब तक आरोपी को लॉकअप के अंदर नहीं रखा जा सकता है।
 

फर्स्ट पर्सन नितिन पटेल, 108 सर्विस के ईएमटी- पांडेसरा 
मुझे सुबह 8:10 मिनट पर कॉल मिला। मैंने तुरंत पॉयलट को पुलिस स्टेशन चलने के लिए कहा। कुछ ही मिनट में हम पहुंच गए। विमल एक टेबल के पास बेहोश पड़ा था। हमने पॉयलट की मदद से उसे स्ट्रेचर से एम्बुलेंस में लाए और 8:20 बजे सिविल अस्पताल के लिए रवाना हुए। रास्ते में मैंने उसकी पल्स बीपी और धड़कन की जांच की तो कुछ पता नहीं चल रहा था। 8:30 बजे हम सिविल अस्पताल पहुंचे। विमल को ट्रॉमा सेंटर में ले गए। मेडिकल ऑफिसर और अन्य डॉक्टरों की टीम ने तुंरत जांच की और बताया विमल की मौत हो चुकी है।
 

सुबह तक 100 बार इलाज को आवाज दी, लेकिन पुलिस ने अनसुना किया
लॉकअप में विमल यादव की तबीयत इतनी खराब हुई कि वह पूरी रात इलाज के लिए चिल्लाता रहा। वह सांस को सामान्य करने के लिए पंप की मांग करता रहा। विमल के भाई विनय ने बताया कि उसने सुबह 7 बजे तक कम से कम 100 बार पुलिस को आवाज दी होगी, लेकिन पुलिस वालों ने बाहर नहीं जाने दिया, जिसकी वजह से विमल की लॉकअप में ही मौत हो गई। विनय ने बताया कि पुलिस ने लॉकअप में डालने से पहले उनके मोबाइल ले लिए थे। भाई के इलाज को वह अपने दूसरे भाई को बुलाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उनका फोन नहीं दिया। 
 

मौत हो गई फोन करके बुलाने को कहा
विमल के चचेरे भाई ने बताया कि विमल का अस्थमा का इलाज चल रहा था। डॉक्टर ने दवा और पंप दे रखा है, लेकिन जब पुलिस उसे ले गई तो उसने दवा और पंप नहीं लिया था। सुबह चार बजे उसको सांस की समस्या बढ़ गई थी। पंप और दवा की मांग करने लगा, लेकिन पुलिस ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। सुबह सात बजे के आस-पास वह बेहोश हो गया। सुबह 8:10 बजे पुलिस ने 108 एम्बुलेंस को फोन कर बुलाया। विमल को सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।