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पाकिस्तान में शाम को बेटियों को घर से बाहर नहीं भेज सकते

राजकोट में रहने वाले 125 से अधिक पाकिस्तानी हिंदू को अभी तक नागरिकता नहीं मिली।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 03, 2018, 03:51 PM IST

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    मूल रूप से राजकोट के पाकिस्तानी हिंदू।

    राजकोट। पाकिस्तान में शाम होते ही घर से बाहर गई बेटी किो बुला लिया जाता है। शाम के बाद बेटियों को घर से बाहर नहीं भेजा जा सकता। इधर राजकोट में बेटियां देर रात तक बाहर रहें, तब भी सुरक्षित हैं। वहां तो बेटे भी जब तक बाहर रहते हैं, तो चिंता लगी रहती है। यहां तो सुरक्षा की कोई बात ही नहीं है। यह विचार हैं राजकोट के मोरबी रोड पर भगवतीपुरा इलाके में डेढ़ साल से रहने वाली वालबाई तेजपाल नाम की वृद्धा के। पाकिस्तान के हिंदू नागरिकों की व्यथा…

    गुजरात सरकार ने हाल ही में राजकोट में 7 साल से रह रहे स्थायी हुए 20 पाकिस्तानी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र दिया। तब इन नागरिकों की तरह भारत में रहने का आवेदन करने वाले अन्य 125 से अधिक भारतीय नागरिकता के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कई आवेदन तो एक साल से लम्बित हैं। कुछ मामलों में तो पति को भारतीय नागरिकता मिल गई है, परंतु पत्नी का आवेदन पेंडिंग है। कई मामलों में इसका उलट भी है।

    बेटी को पांचवीं के बाद पढ़ाया ही नहीं जा सकता

    पाकिस्तान के करांची से आए और राजकोट में स्थायी रूप से रहने वाली मूलबाई आसमल, राणबाई खेराज, मूलबाई अर्जुन भाई, लक्ष्मी गोपाल आसमल, वालबाई तेजपाल आदि महिलाओं का कहना है कि पाकिस्तान में बेटियों को 5 वीं के बाद पढ़ाना इसलिए मुश्किल हो जाता है कि पांचवी के बाद इस्लामिक शिक्षा दी जाती है। यहां राजकोट में इस प्रकार का कोई भेदभाव नहीं है। यहां रोजगार भी आसानी से मिल जाता है। यहां आकर हम खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

    शहर में 1000 से अधिक पाकिस्तानी हिंदू

    पाकिस्तान में 25 साल से अधिक समय से रहने वाले राजकोट में स्थायी हुए हरिभाई माहेश्वरी बताते हैं कि राजकोट में करीब 1000 पाकिस्तानी हिंदू हैं। इसमें से 400 को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है। केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से भारत आए हिंदुओं के लिए लांग टर्म वीजा के लिए प्राेसेस को सरल किया है। अधिकारी भी खूब सहयोग कर रहे हैं। पाकिस्तान से आए लोगों को यहां आसानी से रोजगार भी मिल जाता है।

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