--Advertisement--

वनविभाग का खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन, घायल शावक का इलाज

खतरा उठाकर घायल शेर के बच्चे का वनविभाग की टीम ने किया इलाज।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 04:43 PM IST
घायल शावक का इलाज करते हुए वनविभाग की टीम। घायल शावक का इलाज करते हुए वनविभाग की टीम।

अमरेली। जिले में सबसे अधिक एशियाटिक शेर हैं। इस पूरे क्षेत्र को एशियाटिक शेरों से पहचाना जाता है। ऐसे में एक शेरनी और उसके 3 बच्चों को खोजने में वनविभाग ने काफी मशक्कत की। इस दौरान टीम ने पाया कि शेरनी का एक बच्चा घायल है। तब रेस्क्यू कर उसका इलाज किया गया। काम जोखिमपूर्ण था, फिर भी कर लिया…

अमरेली जिले के सुदूर रेवेन्यू इलाके धोबा गांव में तीन दिनों से वनविभाग को दो-दो शेरनियों और उसके साथ तीन बच्चों की लोकेशन मिल रही थी। फिर पता चला कि एक बच्चे के कंधा चोटिल है। तब वनविभाग ने इस बच्चे के इलाज के लिए उसे खोजना शुरू किया। बच्चे के साथ जब उसकी मां भी साथ हो, तो केवल बच्चे का इलाज कैसे संभव हो पाता? तीन दिनों की मेहनत के बाद वनविभाग ने एक शेरनी और तीन बच्चों को किसी तरह से पिंजरे में कैद कर लिया। पर एक शेरनी के बाहर रहने से शावक का इलाज संभव नहीं था। फिर भी वनविभाग की टीम ने यह खतरा उठाया।

इलाज के दौरान शेरनी आसपास ही थी

आखिर घायल बच्चे के इलाज की व्यवस्था की गई। धोबा के सरपंच की बाड़ी में इस काम को अंजाम दिया गया। इस दौरान शेरनी आसपास ही घूमती रही। आखिर में शावक का इलाज संभव हो पाया, उसके बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया। तब सबने राहत की सांस ली।