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मुख्यमंत्री के रूप में विजय रूपाणी का नाम लगभग तय

जातिगत गणित की बात की जाए, तो दो मुख्यमंत्रियों की संभावना है।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 04:05 PM IST
सीएम के रूप में विजय रूपाणी एक बार फिर रिपीट हो सकते हैं। सीएम के रूप में विजय रूपाणी एक बार फिर रिपीट हो सकते हैं।

राजकोट। गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में एक बार फिर भगवा लहराया है। ऐसे में अब हर तरफ यही चर्चा है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा? बहुत ही जल्द भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें एक बार फिर सीएम के रूप में विजय रूपाणी का नाम तय माना जा रहा है। इसमें अब केवल औपचारिकताएं ही शेष हैं। आखिर रूपाणी ही क्यों…

विजय रूपाणी को उपचुनाव लड़वाकर मुख्यमंत्री के रूप में प्रमोट किया गया था। तब डेढ़ साल के कार्यकाल में उन्होंने तेजी से काम करके दिखाया। अपनी छवि को उज्ज्वल रखने में भी वे कामयाब रहे। आपात स्थिति में भी रूपाणी ने अपना स्थान साफ रखा। इसके अलावा संगठन की जवाबदारी भी बखूबी निभाई। इसके अलावा राजकोट-69 सीट से 53 हजार वोटों से जीतकर उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। इसी सीट पर पीएम नरेद्र मोदी और वजुभाई वाला ने भी चुनाव लड़ा, पर किसी ने इतने अधिक वोटों से जीत हासिल नहीं की।

उपमुख्यमंत्री की थ्योरी

जातिगत गणित की बात की जाए, तो इस समय दो उपमुख्यमंत्री की संभावना प्रबल है। इसमें एक पटेल और दूसरे ठाकोर समाज को स्थान मिल और प्रदेशाध्यक्ष में ओबीसी समाज को स्थान मिले, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल और दिलीप ठाकोर जैसे नाम इस समय सबसे आगे हैं। ऐसे में यदि ओबीसी समाज से किसी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाए, तो भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

जातिगत गणित की बात की जाए, तो दो मुख्यमंत्रियों की संभावना है। जातिगत गणित की बात की जाए, तो दो मुख्यमंत्रियों की संभावना है।
रूपाणी को उपचुनाव में लड़वाकर मुख्यमंत्री के रूप में प्रमोट किया गया। अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। रूपाणी को उपचुनाव में लड़वाकर मुख्यमंत्री के रूप में प्रमोट किया गया। अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
आपात स्थिति में भी रूपाणी अपना स्थान साफ रखा। इसके साथ-साथ संगठन की जवाबदारी भी उन्होंने बखूबी निभाई। आपात स्थिति में भी रूपाणी अपना स्थान साफ रखा। इसके साथ-साथ संगठन की जवाबदारी भी उन्होंने बखूबी निभाई।