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पोरबंदर में 30 फीसदी से अधिक बोट पानी के मोल बिकने को तैयार

15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध से मछुआरों का धंधा-रोजगार ठप: आजीविका बेचने की नौबत।

Danik Bhaskar | Jun 08, 2018, 01:29 PM IST
15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध से मछुआरों का धंधा-रोजगार ठप: आजीविका बेचने की नौबत 15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध से मछुआरों का धंधा-रोजगार ठप: आजीविका बेचने की नौबत

पोरबंदर। पोरबंदर सहित प्रदेशभर के मछुआरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मानसून से पहले राेजगार छीनने से परेशान हैं। मछुआरों की स्थिति को देखते हुए समस्त खारवा जाति के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से आर्थिक मदद देने की मांग की है। मछलियों की संख्या में लगातार कमी...

समुद्र में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण मछलियों की संख्या भी दिनोंदिन घटती जा रही है। दूसरी ओर पाकिस्तान द्वारा मछुआरों की बोट और खलासियों को अगवा किए जाने से स्थिति और विकट हो गई है। मछुआरों के परिवार के लोग और बोट मालिक आर्थिक संकट में पड़ गए हैं। मानसून के अाने से पहले ही समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

धंधा पूरी तरह से चौपट

समस्त खारवा जाति के अध्यक्ष सुनील गोहेल ने बताया कि बरसात के मौसम में मछुआरों का धंधा पूरी तरह से ठप हो जाता है। अधिकांश मछुआरों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता है। मछुआरों की आय का दूसरा कोई साधन नहीं है। समस्त खारवा जाति के अध्यक्ष ने सरकार से मछुआरों को रोजगार भत्ता देने की मांग की है। सुनील गोहेल ने बताया कि मछली पकड़ने का सीजन खत्म हो गया है। पोरबंदर में 30 फीसदी बोट बिकाऊ हैं, पर पानी के भाव में भी कोई खरीदने को तैयार नहीं है। मछुआरे आजीविका बेचने को मजबूर हैं।

10 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध

पोरबंदर में 10 जून से 15 अगस्त तक समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है। बरसात का मौसम खत्म होने के बाद ही मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं। बरसात के दौरान मछुआरे नदी-तालाब से मछली पकड़कर अपना गुजर-बसर करते हैं। सरकार से छोटे बोट धारकों काे समुद्र में जाने की छूट देने की मांग की गई है।

समस्त खारवा समाज ने मछुआरों को राेजगार भत्ता देने की मांग की समस्त खारवा समाज ने मछुआरों को राेजगार भत्ता देने की मांग की
धंधा ही चौपट हो गया। धंधा ही चौपट हो गया।