एक भी ट्रेन नहीं गुजरती, फिर भी दिन में 3 बार बंद होता है रेलवे फाटक

Bhaskar News | Aug 26,2018 18:01 PM IST

अमरेली (गुजरात)। रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक बंद होने और खोलने की समस्या पूरे देश में है किंतु गुजरात की ये रेलवे क्रॉसिंग कुछ अलग है। दिन में एक भी ट्रेन इस क्रॉसिंग से नहीं गुजरती फिर भी तीन बार इसे नियमित बंद किया जाता है। मामला अमरेली के लाठी रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग का है। ये अमरेली रेलवे स्टेशन के बाद ही स्थित है।

19 साल पहले गुम हुआ था भाई, सबने छोड़ दी थी जिंदा होने की उम्मीद, पर बहन ने खोज निकाला; आज रक्षाबंधन पर मिलेंगे दोनों

अनूप मिश्रा | Aug 26,2018 09:03 AM IST

सूरत। पटना का रवीश 19 साल पहले गुम हो गया था। पूरे परिवार ने उसे मृत मान लिया था, पुलिस ने भी खोजबीन कर हार मान ली। लेकिन रवीश की बड़ी बहन प्रेमादेवी को यकीन था कि उनका भाई जिंदा है। भाई को ढूंढना जारी रखा और आखिर अब उसे सूरत से खोज निकाला। आज रक्षाबंधन के दिन बहन-भाई पटना में साथ होंगे। रवीश पटना के शिवम इंटरनेशल स्कूल चेन के संचालक परिवार से हैं।

बाइक हादसे में लकवाग्रस्त हुआ युवक तो पत्नी ने छोड़ दिया साथ, इस मुश्किल घड़ी में बहन आई आगे और ढाई साल से कर रही भाई की सेवा

बिनोद पांडेय | Aug 25,2018 19:00 PM IST

सूरत. रक्षाबंधन पर बहनें अपनी रक्षा का वचन लेती हैं, लेकिन यहां एक बहन ने उस स्थिति में भाई के लिए अपना घर छोड़ दिया जब वो लाचार और शारीरिक रूप से अक्षम हो गया था। यह कहानी है पालनपुर जकातनाका के रहने वाले 38 वर्षीय राजू पटेल की। वे ढाई साल पहले एक हादसे के शिकार हो गए थे। इसमें कमर से नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। जिंदगी बिस्तर पर ही बीतने लगी। पत्नी ज्योति भी उन्हें छोड़कर चली गई। ऐसी मुश्किल घड़ी में राजू की 35 वर्षीय बहन हंसा आगे आई और ढाई साल तक भाई की सेवा के साथ उनके दो बच्चों और बूढ़ी मां को संभाला।

एक्सीडेंट में लकवाग्रस्त हुए तो पत्नी भी छोड़ चली गई, तब बहन ने ढाई साल तक भाई की सेवा की

Dainikbhaskar.com | Aug 25,2018 17:32 PM IST

सूरत। रक्षाबंधन पर बहन अपनी रक्षा का वचन लेती है, लेकिन यहां एक बहन ने उस स्थिति में अपने भाई के लिए अपना घर छोड़ दिया जब लाचार और शारीरिक रूप से अक्षम हो गया था। यह कहानी है पालनपुर जकातनाका के रहने वाले राजू पटेल (38) की। राजू पटेल ढाई साल पहले एक हादसे के शिकार हो गए थे। इसमें उनके कमर से नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। इससे वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। ऐसे में बहन ने उसका साथ दिया। इस काम में बहनोई ने भी बहुत साथ दिया।