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स्विमिंग पूल में डूबने वाले मासूम हर्ष का शहर के नाम भावभीना पत्र…

मेरे साथ उस दिन स्वीमिंग पूल में 60 से अधिक बच्चे और उनके माता-पिता या अंकल थे। परंतु उस दिन कोई भी मुझे बचाने नहीं आया।

Dainik Bhaskar

May 23, 2018, 03:07 PM IST
हर्ष की मौत के बाद उसकी पीड़ा को दर्शाता पत्र। हर्ष की मौत के बाद उसकी पीड़ा को दर्शाता पत्र।

सूरत। इस समय शहर में स्वीमिंग पूल में डूबे मासूम हर्ष का एक काल्पनिक पत्र वायरल हुआ है, जिसमें वह गुहार लगा रहा है कि मेरी मौत के जिम्मेदार आज भी क्यों खुले आम घूम रहे हैं। उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? क्या कर रही हैं मेयर आंटी और क्या कर रहे हैं पुलिस कमिश्नर अंकल? पत्र काफी भावभीना है, जिसमें वह लोगों को सचेत कर रहा है कि ऐसे क्लब संचालकों पर कार्रवाई तो होनी ही चाहिए, ताकि मेरी तरह किसी और हर्ष की जान न जा पाएं। हर्ष का भावभीना पत्र…

प्रिय सूरत,

मैं 11.3 साल का था, आज मेरी मौत का 7 वां दिन है। इन दिनों जो कुछ भी हुआ, उसे देखकर लगता है कि केवल मैं ही नहीं, बल्कि पूरे समाज, सरकार और ऐसे तमाम लोगों की संवेदनाएं भी डूबकर मर गई है, जिनका काम है, मुझे न्याय दिलाने का। 17 मई के पहले मैं कितना खुश था। समर वेकेशन होने से मुझे स्वीमिंग सीखनी थी। इसके लिए पापा ने कापड़िया हेल्थ क्लब में क्लास ज्वाइन करवा दी। मैं खूब तेजी से स्वीमिंग सीख रहा था। आखिर मेरा कसूर क्या था? मैं पूरी तरह से स्वीमिंग सीख भी नहीं पाया था कि मुझसे फ्लोटर दूर कर दिया गया। इसके बाद भी मेरी स्वीमिंग की ओर ध्यान क्यों नहीं रखा गया। वहां 7-7 सर थे, किसी ने भी मुझे डूबता नहीं देखा। डूबते समय मुझे जो दर्द हुआ, उसे मैं कैसे व्यक्त कर सकता हूं। मुझे ऐसा लगा कि मुझे किसी ने जबर्दस्ती इतना अधिक पानी पिला दिया कि मैं सांस भी नहीं ले पाया। मुझे लग रहा था कि पालिका की मेयर एक आंटी हैं, वे क्लब के खिलाफ एक्शन लेंगी। पुलिस कमिश्नर अंकल भी त्वरित कार्रवाई करते हुए कोच सर और क्लब के मालिकों को पकड़कर जेल में बंद करेंगे। मुझे अभी भी घुटन हो रही है। मेरे साथ उस दिन स्वीमिंग पूल में 60 से अधिक बच्चे और उनके माता-पिता या अंकल थे। परंतु उस दिन कोई भी मुझे बचाने नहीं आया। कुछ दिनों बाद सब अपने-अपने काम पर लग जाएंगे। फिर मेरे जैसे किसी और हर्ष को डूबकर अपनी जान देनी पड़ेगी।

आपका हर्ष

संचालकों को पनाह दे रहीं है पुलिस

कापड़िया हेल्थ क्लब में एक सप्ताह पहले स्विमिंग पूल में कपड़े के एक व्यापारी के बेटे हर्ष की मौत के मामले में क्लब के संचालकों की घोर लापरवाही सामने आई है। हर महीने 2300 रुपए की तगड़ी फीस लेने वाले इस क्लब के संचालकों ने बच्चों के जीवन को खतरे में डालने के लिए अनक्वालिफाइड इंस्ट्रक्टर्स की नियुक्ति की गई। पुलिस ने अभी तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

अकुशल कोच की नियुक्ति

गत 16 मई को कापड़िया हेल्थ क्लब में स्विमिंग सीखने गए वेसु के कपड़ा व्यापारी पिंकेश पोद्दार के 11 वर्षीय बेटे हर्ष की स्विमिंग पूल में डूब जाने से मौत हो गई। इस मामले में हर्ष की मां पूजा बेन ने अपने बेटे की मौत के लिए इंस्ट्रक्टर की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। इसके बाद भी अभी तक पुलिस ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे लगे वह इस मामले में गंभीर है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि कोच रितेश मोरे के पास कोच बनने का प्रमाण पत्र है। जबकि करण के पास इस तरह का कोई सर्टिफिकेट नहीं है। इसके बाद भी उसे कोच के रूप में नियुक्ति दी गई।

हेल्थ क्लब के संचालकों की लापरवाही

-अनक्वालिफाइड इंस्ट्रक्टर रखे गए।

-सीसीटीवी फुटेज के अनुसार पूल के पानी में लाइफ सेविंग संसाधनों की कमी।

-किसी से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं लिया गया।

-फर्स्ट एड के साधन उपलब्ध नहीं।

-निजी हास्पिटल करीब होने के बाद भी हर्ष को सिविल अस्पताल ले जाया गया।

304 के तहत अपराध बनता है

स्विमिंग सिखाने वाले कर्मचारी सर्टिफाइड नहीं होने के संबंध में संचालक द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण किसी की मौत होती है, तो संचालक के खिलाफ आईपीसी की धारा304(ब) के तहत अपराध बनता है। एक्सपर्ट न रखने के कारण किसी की जान को खतरा हो, तो उसकी जवाबदारी संचालकों की होने से संचालक के खिलाफ एफआईआर लिखवाई चाहिए।

एडवोकेट यशवंत वाला

कापड़िया क्लब के दो कोच की धरपकड़। कापड़िया क्लब के दो कोच की धरपकड़।
एक कोच बाहर ही बैठा था, दूसरा पूल पर था, जिसने मुझ पर ध्यान नहीं दिया। एक कोच बाहर ही बैठा था, दूसरा पूल पर था, जिसने मुझ पर ध्यान नहीं दिया।
इस कोच की धरपकड़ की गई। इस कोच की धरपकड़ की गई।
इस कोच को भी अरेस्ट किया गया। इस कोच को भी अरेस्ट किया गया।
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हर्ष की मौत के बाद उसकी पीड़ा को दर्शाता पत्र।हर्ष की मौत के बाद उसकी पीड़ा को दर्शाता पत्र।
कापड़िया क्लब के दो कोच की धरपकड़।कापड़िया क्लब के दो कोच की धरपकड़।
एक कोच बाहर ही बैठा था, दूसरा पूल पर था, जिसने मुझ पर ध्यान नहीं दिया।एक कोच बाहर ही बैठा था, दूसरा पूल पर था, जिसने मुझ पर ध्यान नहीं दिया।
इस कोच की धरपकड़ की गई।इस कोच की धरपकड़ की गई।
इस कोच को भी अरेस्ट किया गया।इस कोच को भी अरेस्ट किया गया।
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