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11 हार्ट डोनेट कर चुके सूरत में एयर एंबुलेंस नहीं होने के चलते 2 घंटे अटका रहा ट्रांसप्लांट

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2017, 06:58 AM IST

अहमदाबाद के सीम्स हॉस्पिटल में शुक्रवार को नवनीत चौधरी का हृदय ट्रांसप्लांट कर सूरत के ही 23 वर्षीय कल्पेश जयसुख काकरोड़िया के शरीर में लगाया गया।

11 Hart donated Surat, due to lack of air ambulance, transplanted for 2 hours
सूरत. सूरत के एक आदिवासी युवा का दिल उसकी मृत्यु के बाद भी धड़कता रहेगा। अहमदाबाद के सीम्स हॉस्पिटल में शुक्रवार को नवनीत चौधरी का हृदय ट्रांसप्लांट कर सूरत के ही 23 वर्षीय कल्पेश जयसुख काकरोड़िया के शरीर में लगाया गया। इसके लिए नवनीत का हृदय देर रात एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद ले जाया गया।
मुंबई से आई एयर एंबुलेंस ने नवनीत का हृदय सूरत से 277 किलोमीटर दूर अहमदाबाद पहुंचाया। जहां डॉ. धवल नायक और ‌उनकी टीम ने यह ऑपरेशन किया। गुजरात में यह दूसरा हार्ट ट्रांसप्लांट है।
हालांकि सूरत में एयर एंबुलेंस न होने और मुंबई से इसे मंगाने में हुई देरी से हार्ट ट्रांसफर की प्रक्रिया काफी जद्दोजहद भरी रही।
बाइक से गिरकर जख्मी हुए थे नवनीत: सूरत के मांगरोल तहसील के लवेट गांव के रहने वाले बाबूभाई चौधरी के बेटे नवनीत को बीते सोमवार को बाइक से गिर जाने के कारण सिर में गहरी चोट लगी थी।
30 वर्षीय नवनीत को सूरत के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके दिमाग में रक्त का थक्का जम गया है। बाद में नवनीत को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि इससे पहले न्यूरोसर्जन डॉ. मेहुल मोदी और न्यूरोफिजिशियन डॉ. परेश जांजमेरा ने नवनीत को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था।
इसकी जानकारी मिलते ही डोनेट लाइफ की टीम ने ऑर्गन डोनेशन के बारे में बताया तो नवनीत के पिता तैयार हो गए। इसके बाद संस्था के नीलेश मांडलेवाला ने अहमदाबाद के आईकेडीआरसी और सीम्स हॉस्पिटल को यह जानकारी दी।
रात 1.30 बजे एयर एंबुलेंस पहुंची, तब भेजा सके हृदय

सूरत से नवनीत के हृदय को अहमदाबाद ले जाने की जद्दोजहद भरी कवायद ने सूरत में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए। विधायक हर्ष संघवी ने बताया कि गुरुवार रात 11 बजे उनके पास अहमदाबाद के डॉक्टर का फोन आया। जिसने सूरत से हार्ट ट्रांसप्लांट के बारे में बताया।
संघवी ने तत्काल सूरत एयरपोर्ट पर उपलब्ध 10 सीटों वाले विमान से इंतजाम की बात कही। लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी से पता चला कि विमान चिकित्सा सुविधाओं से लैस नहीं है। इसलिए न तो मरीज और न किसी मानव अंग को ले जा सकता है।
आनन-फानन में संघवी ने मुंबई से संपर्क कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। रात में ही एयरपोर्ट को खुलवाया, तब जाकर 1.30 बजे एंबुलेंस सूरत पहुंची और हृदय अहमदाबाद ले जाया गया।
इसलिए जरूरी है एयर एंबुलेंस
एयर एंबुलेंस के लिए आमतौर पर हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल होता है। विमान के बजाय यह कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और मरीज के लिए सुरक्षित होते हैं। डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन के नियमों के अनुसार एयर एंबुलेंस में एक मेडिकल टीम, स्ट्रेचर और सभी विशिष्ट उपकरण होने चाहिए।
एंबुलेंस दो इंजन वाला हो और उसमें आपातकाल के लिए सभी संचारी उपकरण हों, ताकि जरूरत पड़ने पर नजदीकी कंट्रोल रूम से संपर्क हो सके।
मुंबई से एंबुलेंस मंगाकर भेजा ह्दय, चार लोगाें को जीवन दे गया नवनीत
नवनीत के अंगदान से कल्पेश ही नहीं, बल्कि गुजरात के तीन अन्ोय लोगों को भी नया जीवन मिला है। डोनेट लाइफ संस्था के नीलेश ने बताया कि नवनीत की एक किडनी अहमदाबाद के 14 वर्षीय तिलक शाह, दूसरी किडनी सूरत के ही 31 साल के पुनीत जालान को ट्रांसप्लांट की गई। लिवर मोरबी के 48 वर्षीय व्यक्ति को ट्रांसप्लांट किया गया।
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