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70 साल की घायल ट्रॉमा से सर्जरी और ऑर्थो के चक्कर लगाती रही, 3 घंटे बाद मौत

सिविल हॉस्पिटल में इलाज में हुई लापरवाही के कारण एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 04:29 AM IST
70 year old elderly dies due to negligence

सूरत. सिविल हॉस्पिटल में इलाज में हुई लापरवाही के कारण एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जिससे हॉस्पिटल प्रबंधन की व्यवस्थाओं और इलाज के दावों की पोल खुल गई। मृतक के बेटे का आरोप है कि ऑर्थो वार्ड में मां को लगभग डेढ़ घंटे तक इलाज नहीं मिला, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। सिर और हाथ में गंभीर चोट के कारण उन्हें सर्जरी और ऑर्थो के वार्ड में इधर-उधर घुमाया गया। बाद में ऑर्थो वार्ड में मां ने दम तोड़ दिया।


महाराष्ट्र मालेगांव की मूल निवासी 70 वर्षीय रावियावी सैयद अली कुछ दिन पहले अपने बेटे यूनुस सैयद अली के घर सूरत स्थित भाठेना आई थी। शुक्रवार सुबह घर पर ही बाथरूम में फिसल जाने से सिर और हाथ में गंभीर चोट आई। परिजन आनन-फानन में इलाज के लिए सिविल हॉस्पिटल ले गए। ट्रॉमा सेंटर में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सर्जरी विभाग में भेज दिया गया। इसके बाद सर्जरी के डॉक्टरों ने यह कहकर ऑर्थो वार्ड में रेफर कर दिया कि महिला का हाथ फैक्चर है, इसलिए पहले ऑर्थो में इलाज कराना होगा। इसके बाद जैसे-तैसे उन्हें ऑर्थो वार्ड ले जाया गया। यहां करीब डेढ़ घंटे तक इलाज नहीं दिया गया। इस बीच बेटे ने डॉक्टरों से इलाज के लिए बोला, लेकिन किसी डॉक्टर ने ध्यान नहीं दिया और बुजुर्ग महिला की मौत हो गई।


ट्रॉमा में प्राथमिक उपचार के अलावा कोई सुविधा नहीं: सिविल हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में प्राथमिक उपचार के बाद कोई सुविधा नहीं है, जबकि ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू बन कर रेडी है, लेकिन उन्हें खोला नहीं जा रहा है। मरीजों को यहां सभी सुविधाएं समय पर मिले तो लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है। लेकिन, हॉस्पिटल प्रबंधन की लापरवाही के कारण मरीजों की मौत हो रही है।

इलाज के लिए बेटा डॉक्टरों से लगाता रहा गुहार

यूनुस सैयद अली ने बताया कि इलाज के लिए उसने कई बार डॉक्टरों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। मरीज अधिक होने का हवाला देकर डॉक्टर इलाज के लिए टाल रहे थे। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि महिला की हालत पहले से बहुत नाजुक थी। वैसे भी किसी मरीज का इलाज बंद करके किसी का इलाज नहीं हो सकता। मरीजों की संख्या आए दिन बढ़ रही हैं, जबकि स्टाफ वर्षों से नहीं बढ़ाए गए हैं।

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