सूरत

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जल श्री कृष्ण: जान खतरे में डालकर गांववालों ने खोदा 30 फीट गहरा कुआं

आदिवासी जान खतरे में डालते हुए 20 फीट बांस की सीढ़ी के सहारे 30 फीट गहरा कुआं खोद डाले।

Danik Bhaskar

Mar 13, 2018, 06:11 AM IST

नवसाड़ी/सूरत(गुजरात). नसवाडी तहसील में नर्मदा के किनारे स्थित हरखोड गांव के टेकरा फलिया में रहने वाले आदिवासियों के लिए पानी का कोई स्रोत नहीं बचा है। ग्रामीणों को आसपास के नालों से पानी मिलता था। नाला सूखने के बाद ग्रामीण पानी के लिए कुआं खोद रहे हैं। आदिवासी जान खतरे में डालते हुए 20 फीट बांस की सीढ़ी के सहारे 30 फीट गहरा कुआं खोद डाले। पहाड़ी इलाका होने के कारण कुदरत भी आदिवासियों के साथ खिलवाड़ कर रही है। आदिवासी पाताल से पानी लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जल ही जीवन है शब्द को आदिवासियों ने कुआं खोदकर सार्थक साबित किया है। यहां रहने वाले ग्राामीण 3 किमी दूर कुंडा गांव की गहरी खांईं में उतर कर पीने का पानी लाते हैं।

लोग एकसाथ कुआं खोद रहे हैं
ग्रामीण टेकरा फलिया में एक साथ मिलकर कुआं खोद रहे हैं। मेरा गांव नर्मदा नदी के एकदम नजदीक है इसके बावजूद पानी की विकट समस्या है। रोज पानी लाने के लिए उंडा की खाड़ी तक जाना पड़ता है। पशुओं को पानी पिलाने के लिए खाड़ी तक लेकर जाते हैं।
-बचूभाई भील, ग्रामीण टेकरा फलिया, हरखोड

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