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रेप का आरोपी मुनि यूं हुआ कोर्ट में पेश, रंगीन चटाई समेत ये हैं अहम सबूत

स्टूडेंट से रेप के आरोपी शांति सागर की चार्जशीट सबसे पहले भास्कर में

Bhaskar News | Last Modified - Jan 18, 2018, 06:58 AM IST

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    पेशी के दौरान आरोपी मुनि ने लड़की के आरोपों पर ही सवाल उठा दिए।

    सूरत.वडोदरा की 19 साल की स्टूडेंट से रेप मामले में आरोपी शांति सागर का केस बुधवार को निचली कोर्ट से सेशन कोर्ट में चला गया। चार्जशीट के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में जिस्मानी रिश्ते बनाने की बात कंफर्म हुई है, लेकिन वारदात के 13 दिन बाद एफआईआर होने के कारण मौके से सीमन के सबूत नहीं मिल पाए। सभी 5 साइंटिफिक सबूतों को एफएसएल में जांच के लिए भेजा गया है। पेशी के दौरान आरोपी मुनि ने कहा कि देश में एक मिशनरी है जो धर्म की अस्मिता तोड़ना चाहती है। उस लड़की की ग्वालियर में दो होटल क्यों बंद हुईं थीं, इसकी जांच होनी चाहिए।

    ये हैं 5 अहम सबूत

    1. घटनास्थल से रंगीन चटाई बरामद की ।
    2. मुनि का सफेद रंग का मोबाइल फोन बरामद किया था।
    3. लड़की के कपड़े भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं।
    4. जैन मंदिर से पंचों के सामने बरामद किया गया सीसीटीवी का डीवीआर।
    5. लड़की के भाई द्वारा दिया गया आई फोन।

    जिस्मानी रिश्ते बनाने में सक्षम है अारोपी और लड़की के साथ रिश्ते बने थे

    - मामले की जांच कर रहे पुलिस अफसर के मुताबिक, आरोपी शांति सागर ने बहाने से लड़की की अश्लील तस्वीरें वाॅट्सएेप से मंगवाई थीं। वे तस्वीरें, शांति सागर की लड़की से मोबाइल पर बातचीत और शांति सागर के सीमन के नमूने फोरेंसिक लैब में भेजे गए हैं।

    - चार्जशीट में सबसे अहम सबूत है सिविल अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट। जिसके मुताबिक शांति सागर जिस्मानी रिश्ते बनाने के लिए सक्षम है और लड़की के साथ रिश्ते बने थे। सिविल के डॉक्टर के सामने शांति सागर ने खुद कबूल किया था कि लड़की से रिश्ते बने थे।

    - 13 अक्टूबर को मामला दर्ज होने के दूसरे दिन ही पुलिस ने जैन उपाश्रय के पास वाले कमरे का पंचनामा किया था। एक अक्टूबर को इसी कमरे में मुनि कथित रेप किया था।

    12 दिन बाद हुए लड़की अौर 24 दिन बाद पिता के बयान

    पुलिस ने लड़की के सीआरपीसी 164 के तहत बयान FIR दर्ज होने के 12 दिन बाद 25 अक्टूबर को सिविल कोर्ट में कराए। इसके अलावा लड़की के पिता के बयान भी 24 दिन बाद 7 दिसंबर को कराए गए।

    अहम सबूतों में से एक की भी रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली

    - जैन मुनि शांति सागर द्वारा एक स्टूडेंट से रेप करने के मामले में पुलिस ने तय समय सीमा 90 दिन पूरे होने से पहले कोर्ट में चार्जशीट तो पेश कर दी। चार्जशीट पेश करना जरूरी था, वरना आरोपी जमानत के लिए मजबूत दलील दे सकता था।

    - हालांकि, मामले में जो 5 अहम सबूत, जो विक्टिम को इंसाफ दिलवाने में ताकतवर हथियार साबित होंगे, उनमें से एक भी रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। ऐसे में यह चार्जशीट आधी-अधूरी ही कही जा सकती है। एफएसएल से रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस सप्लीमेंट चार्जशीट पेश कर सकती है।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें शांति सागर ने कहा था- सर्किल से बाहर नहीं आना...

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    मुंह छिपाकर बोले मुनि, विदेशी ताकतें धार्मिक अस्मिता भंग करना चाहती हैं।

    शांति सागर ने कहा था- सर्किल से बाहर नहीं आना

    वारदात वाले दिन जैन मुनि ने जाप के लिए परिवार को बुलाया था। लड़की, माता-पिता एवं भाई को मुनि मंदिर के कक्ष में ले गए थे। माता-पिता को एक कमरे में जाप करने बैठाया था। उनके सिर पर चंदन के टुकड़े को हवा में फिराकर तब तक एक मंत्र का उच्चारण करने को कहा, जब तक वह नहीं बुलाए। माता-पिता के चारों तरफ सर्किल बनाकर कहा कि जब तक कहा न जाए, तब तक सर्किल से बाहर नहीं आना है।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें महिला डॉक्टरों ने हिम्मत बंधाई, तब जाकर पुलिस के पास पहुंची लड़की और परिवार...

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    लड़की के बयान FIR दर्ज होने के 12 दिन बाद 25 अक्टूबर को सिविल कोर्ट में कराए गए थे।

    लेडी डॉक्टरों ने हिम्मत बंधाई, तब जाकर पुलिस के पास पहुंची लड़की और परिवार


    सूरत में घटना के बाद लड़की परिवार के साथ वडोदरा पहुंची। दूसरे दिन यानी 2 अक्टूबर को पीड़िता गांधीनगर कॉलेज पहुंची। कॉलेज में तबीयत खराब होने पर मां को फोन किया था। पीड़िता को वडोदरा वापस लाने के बाद 4 अक्टूबर को वडोदरा में साइकैट्रिस्ट डॉ. अंकिता जैन और गायनिक डॉ. भावना पटेल से चेकअप करवाया। दोनों डॉक्टर्स ने पीड़िता और परिवार को पुलिस में शिकायत देने की हिम्मत बंधाई। इसके बाद ही परिवार ने शिकायत दर्ज कराई।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें जैनमुनि की गिरफ्तारी के बाद ट्रस्टी ने साध्वियों को चले जाने को कहा...

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    मामले में लड़की के पिता के बयान भी 24 दिन बाद 7 दिसंबर को कराए गए।

    मुनि की गिरफ्तारी के बाद ट्रस्टी ने साध्वियों को चले जाने कहा

    घटना के बाद जब जैनमुनि को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो शहर मे हड़कंप मच गया था। इसके बाद मंदिर में रह रही अन्य तीन साध्वियों को भी मंदिर के ट्रस्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

    1995 से मंदिर में रह रही साध्वी वसंत ने पुलिस को बताया कि उनके साथ साध्वी कल्पना 1997 से और साध्वी दीपा 2003 से जैन मंदिर में रहती थीं। मुनि की गिरफ्तारी के बाद मंदिर के ट्रस्टी नरेश भाई मंदिर में आए और तीनों साध्वियों को अपने रहने के लिए कहीं और इंतजाम कर लेने को कहा था। अचानक इस परिस्थिति से तीनों साध्वियां मुसीबत में पड़ गईं। मंदिर में नियमित रूप से दर्शन करने आने वाली गृहस्थी प्रिया बहन अंकित भाई जैन को साध्वी ने अपनी परेशान बताई तो उन्होंने साध्वी के रहने का प्रबंध अपने मकान पर ही किया था।

    प्रिया बहन ने साध्वीजी का परवत पाटिया स्थित मॉर्डन टाउनशिप में रहने का प्रबंध किया। प्रिया जैन ने पुलिस को बताया कि तीनों साध्वियों की सहायता करने के लिए 15 अक्टूबर को उनके रहने का प्रबंध अपने घर पर ही किया था।

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    नानपुरा दिगंबर जैन मंदिर का आचार्य रह चुका है आरोपी शांति सागर।
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