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अमरीकी महिला गांधी से हुई इम्प्रैस, 71 की उम्र में दांडी से अहमदाबाद कर रही पैदल सफर

एलिस-रे 50 साल से अमरीका में गांधी फिलॉस्फी पर जीवन व्यतीत कर रही हैं।

Danik Bhaskar | Feb 06, 2018, 11:21 PM IST
एलिस-रे ने किया दांडी से साबरम एलिस-रे ने किया दांडी से साबरम

नवसारी. ये हैं एलिस -रे। अमेरिका में पांच दशक से गांधी विचार के अनुसार जीवन व्यतीत कर रही हैं। अब दांडी से साबरमती आश्रम-अहमदाबाद तक पदयात्रा पर निकली हैं। सोमवार सुबह लगभग नौ बजे एलिस-रे ने सहयोगी के साथ साबरमती आश्रम के लिए कूच किया। नमक सत्याग्रह के लिए 1930 के दशक में गांधीजी ने जिस मार्ग से कूच की थी, एलिस-रे उसी मार्ग पर चलते हुए साबरमती आश्रम तक जाने की इच्छुक हैं। साबरमती कूच के तहत वह हर दिन औसतन 15 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगी। उम्र के इस पड़ाव पर भी एलिस-रे युवाओं जैसे फुर्ती के साथ कदम बढ़ाती हैं। एलिस के साथ मुंबई के शाहिद खान सहयात्री हैं। एलिस-रे 50 साल से अमरीका में गांधी फिलॉस्फी पर जीवन व्यतीत कर रही हैं। सत्याग्रह और अहिंसा पर किताबें भी लिखी हैं।

इसलिए ये फैसला
दांडी से साबरमती आश्रम की यात्रा शुरू करने पर एलिस का कहना है कि- गांधीजी ने अहिंसा-सत्याग्रह के बारे में लोगों को बहुत सीख-समझाइश दी लेकिन लोग आज तक गांधीजी की बात अच्छी तरह समझ नहीं सके हैं। यही कारण है कि समाज में आज अत्याचार-हिंसा की घटनाएं हो रही है। लोग गांधीजी के बताए मार्ग से विमुख हो रहे हैं। मैं गांधीजी के विचार लोगों तक पहुंचाने के लिए दांडी से साबरमती आश्रम-अहमदाबाद की यात्रा करने की इच्छुक हूं।