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लाशों से पट चुके थे श्मशान- कब्रिस्तान, 17 साल पहले यहां हुआ था मौत का तांडव

इस भयानक प्राकृतिक आपदा में कच्छ के 450 गांवों का तो नामोनिशान ही मिट गया था।

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2018, 04:37 AM IST
ताश के महल की तरह बिखर गईं थीं इ ताश के महल की तरह बिखर गईं थीं इ

कच्छ (गुजरात). 26 जनवरी, 2001 की सुबह जब पूरा देश गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा था। उसी दौरान गुजरात में मातम छा गया था, क्योंकि यहां के दो जिले कच्छ व भुज की धरती को 6.9 रिएक्टर की तीव्रता वाले भूकंप ने हिलाकर रख दिया था। देश को इस घटना की जानकारी मिल पाती, तब तक भुज व कच्छ के श्मशान व कब्रिस्तान लाशों से पट चुके थे। इस भयानक प्राकृतिक आपदा में कच्छ के 450 गांवों का तो नामोनिशान ही मिट गया था।

ताश के महल की तरह बिखर गईं थीं इमारतें...

लोग कुछ समझ पाते ही कुछ ही सेकंड में बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के महल की तरह जमींदोज होने लगीं थीं। धरती की कंपकंपी सिर्फ दो मिनट की ही थी, लेकिन इसी दो मिनट में सब खत्म। अब खुशी की आवाजें दर्द की चीखों में तब्दील हो चुकी थीं। जब तक पूरे देश को इस घटना की जानकारी मिल पाती, तब तक कच्छ व भुज में श्मशान व कब्रिस्तान लाशों से पट चुके थे।

घटना आंकड़ों में...

दिन : 26 जनवरी, 2001
समय : सुबह 8.46 मिनट
कंपन : 2 मिनट
एपी सेंटर : चोबारी गांव, भचाऊ तहसील से 9 किमी और भुज से 20 किमी की दूरी पर।
तीव्रता : 6.9 रिएक्टर स्केल
भुज में मौत : 20 हजार
घायल : 1,67,000
मकानों की तबाही : 4 लाख
भूकंप का असर : 700 किमी तक। 21 जिले के 6 लाख लोग बेघर हुए।
कच्छ जिले में मौत : 12,290

मरने वाले 13,805 लोगों के नाम की स्टील की नेमप्लेट लगाई जाएगी

भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में भुज शहर के करीब स्थित भुजिया पर्वत की गोद में 460 एकड़ में राज्य सरकार स्मृति वन बना रही है। 155 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाले इस वन में भूकंप के दौरान मरने वाले 13,805 लोगों के नाम की स्टील की नेमप्लेट लगाई जाएगी। साथ ही सभी मृतकों की स्मृति में यहां पेड़ भी लगाए जाएंगे। स्मृति वन प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 58 करोड़ रुपए के खर्च से एक म्यूजियम बनाया जाएगा। इसमें प्रवेश करते ही लोगों को भूकंप आने का अहसास होगा। यानी जिस तरह से भूकंप में धरती में कंपन आता है, उसी तरह से लोगों को यहां कंपन महसूस होगा।

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