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कारोबारियों के गढ़ में नोटबंदी-GST मुद्दा बेअसर, पाटीदार बहुल 4 सीटें भी जीत गई BJP

Bhaskar News | Last Modified - Dec 19, 2017, 07:00 AM IST

विस चुनाव में चर्चित रही टेक्सटाइल सिटी ने नतीजों से चौंकाया।
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    सूरत.इस बार का गुजरात विधानसभा चुनाव जितना रोमांचक रहा वैसे ही चौंकाने वाले नतीजे सूरत के रहे। डायमंड और टेक्सटाइल सिटी की वजह से व्यापारियों के इस गढ़ में जीएसटी मुद्दा बड़ा दिखने के बावजूद नाकाम साबित हुआ तो पाटीदार बहुल 4 सीटें भी बीजेपी ने फिर से जीत ली। बीजेपी जिले की 16 में से 15 सीटें जीतने में कामयाब रही। शहर की सभी 12 सीटें जीतने के साथ ही जिले की 4 में से 3 सीटें भी हासिल की। एक वही सीट मांडवी नहीं जीत सकी, जो पिछली बार भी हारी थी। यानी कि इस बार के चुनाव की सूरत भी 2012 जैसी ही रही।

    ‘कमल का फूल, हमारी भूल’ का नारा देने वाले व्यापारी बीजेपी के साथ रहे

    जीएसटी के मुद्दे पर एक ही भूल, कमल का फूल का नारा देने वाले सूरत के व्यापारियों ने नाराजगी के बावजूद बीजेपी का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ नहीं थामा। इसी तरह पाटीदारों का विरोध और हिंदीभाषियों के रेल आंदोलन का भी असर बीजेपी की जीत पर नहीं पड़ा। उसने 16 विधानसभा सीटों में से 15 सीटों पर जीत दर्ज की। हालांकि, इस बार लग रहा था कि बीजेपी की राह मुश्किल है, लेकिन चुनाव परिणाम पर इसकी असर देखने को नहीं मिला।

    आरक्षण के मुद्दे पर पाटीदारों के विरोध से माना जा रहा था कि पाटीदार बाहुल्य वराछा, करंज, सूरत उत्तर, कामरेज, कतारगाम में से 3 सीटें इस बार बीजेपी से छिन सकती हैं। बीजेपी ने इस बार चुनावी घोषणा पत्र भी जारी नहीं किया था।

    इन कारणों से ऐसा लग रहा था कि 2012 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस साल कुछ तो बदलाव जरूर आएगा। लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। जिन सीटों पर बीजेपी को झटका लगने की बात की जा रही थी उन पर बीजेपी प्रत्याशी को भारी मत मिले। सूरतियों ने बीजेपी पर अपना भरोसा कायम रखा।


    व्यापारी नाराज थे पर मन नहीं बदला

    जीएसटी लागू होने के बाद 21 दिन तक कपड़ा मार्केट बंद रहा। व्यापारियों ने आंदोलन किया, पुलिस की लाठियां खाईं, पर सरलीकरण नहीं हुआ। इससे नाराज कपड़ा व्यापारियों को लगा कि उनका भी प्रतिनिधि होना चाहिए, जो उनकी मांग सरकार तक पहुंचाए। इसका फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने कपड़ा व्यापारी अशोक कोठारी को टिकट दिया, लेकिन व्यापारियों ने उनकी जगह बीजेपी प्रत्याशी हर्ष संघवी को चुना। वह भी भारी मतों से।

    कई मुद्दे बीजेपी के लिए चुनौती बने हुए थे

    इन नतीजों से कांग्रेस, हार्दिक सहित राजनीतिक पंडित भी चौंक गए। बड़ी वजह ये कि जीएसटी का सबसे मुखर विरोध ही सूरत में हुआ। टेक्सटाइल बाजार पूरे 21 दिन बंद रहा और यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का बन गया। पाटीदार अनामत आंदोलन के संयोजक हार्दिक पटेल भी रोड शो और रैलियों में हजारों की भीड़ जुटाकर ताकत दिखा चुके थे। सूरत में पाटीदार आरक्षण आंदोलन, जीएसटी विरोध, उत्तर भारतीयों के प्रतिनिधित्व की मांग समेत कई मुद्दे बीजेपी के लिए चुनौती बने हुए थे।

    पाटीदार : उग्र विरोध के बावजूद जिताया

    वराछा, कामरेज, करंज और कतारगाम में पाटीदार वोटर निर्णायक होने के बावजूद बीजेपी जीती। चुनाव की घोषणा के बाद से ही इन इलाकों में पास कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करते रहे। कई पाटीदार सोसायटियों में बीजेपी प्रचार भी नहीं कर सकी। विरोध में बैनर लगे। पास के दबाव में कांग्रेस को प्रत्याशी बदलने पड़े। बीजेपी ने भी वराछा को छोड़ सभी पाटीदार बहुल सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए। हार्दिक पटेल का रोड शो और रैलियां हुईं।

    जीएसटी : लंबा संघर्ष, 22 दिन कारोबार बंद

    सूरत में व्यापारियों द्वारा जीएसटी का जमकर विरोध किया गया था। सूरत के टेक्सटाइल व्यापरियों ने जीएसटी में राहत देने के लिए लंबा आंदोलन चलाया। आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज भी हुआ। कांग्रेस ने जीएसटी को चुनाव प्रचार में खूब इस्तेमाल किया। मगर जीएसटी विरोध को वोट में नहीं बदल पाई। कांग्रेस ने व्यापारी वोटों को पाने के लिए एक टेक्सटाइल व्यापारी अशोक कोठारी को टिकट भी दिया मगर बीजेपी के हर्ष संघवी पिछली बार से भी बड़े अंतर से जीत गए।

    हिंदीभाषी : टिकट नहीं मिला तो बगावत भी

    सूरत की पाटीदार बहुल वराछा, कामरेज, करंज और कतारगाम में पाटीदार वोटर निर्णायक होने के बावजूद बीजेपी जीती। चुनाव की घोषणा के बाद से ही इन इलाकों में पास कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करते रहे। कई पाटीदार सोसायटियों में बीजेपी प्रचार भी नहीं कर सकी। विरोध में बैनर लगे। पास के दबाव में कांग्रेस को प्रत्याशी बदलने पड़े। बीजेपी ने भी वराछा को छोड़ पाटीदार बहुल सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए। हार्दिक पटेल का रोड शो और रैलियां हुईं।

    35,823 : मतदाताओं ने इस बार नोटा विकल्प का प्रयोग किया।

    9708 : वोट पाए निर्दलीय लड़े उत्तर भारतीय अजय चौधरी ने।

    बीजेपी ने रणनीति बदलकर विरोध का बदला समर्थन में

    जीएसटी : 22 दिनों तक आंदोलन करने वाले व्यापारी बीजेपी के पक्ष में

    - 3 जून 2017 को कपड़ा व्यापारियों को जीएसटी के दायरे में लाने की घोषणा की गई। यह सुनकर व्यापारियों ने काम बंद कर दिया।
    - जीएसटी लागू होने से पहले कपड़ा व्यापारियों ने जीएसटी संघर्ष समिति बनाई।
    - जीएसटी संघर्ष समिति ने 15 जुलाई को एक दिवसीय हड़ताल की।
    - 24,27 और 29 जून को फिर से हड़ताल की।
    - जीएसटी लागू होने के बाद संघर्ष समिति ने 3 जुलाई से अनिश्चित कालीन हड़ताल की घोषणा की।
    - हड़ताल को रोकने के लिए बीजेपी सांसद सीआर पाटिल ने व्यापारियों के साथ बैठक की।
    - 3 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल।
    - आंदोलन कर रहे व्यापारियों पर लाठी चार्ज।
    200 से ज्यादा व्यापारियों को हिरासत में लिया गया।
    - 16 जुलाई को व्यापारी अरुण जेटली से मिले।

    पाटीदार : आरक्षण की मांग पर अंत तक करते रहे बीजेपी का विरोध

    - मई 2016 में पाटीदारों ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया।

    - आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार अारक्षण आंदोलन समिति बनाई।
    - 17 अगस्त को रैली निकाली, जिसमें 5 लाख पाटीदार शामिल हुए।
    - 25 अगस्त 2016 में अहमदाबाद जीएमडीसी ग्राउंड पर सभा कर रहे पाटीदारों पर लाठीचार्ज।
    - लाठीचार्ज के बाद पूरे राज्य में हंगामा।
    - राज्यभर में आंदोलन कर रहे 14 पाटीदारों की मौत।
    - हार्दिक पटेल सहित के कई पाटीदार युवकों को गिरफ्तार किया गया।
    - पाटीदारों के खिलाफ राज्य के अलग-अलग पुलिस थानों में 2 दर्जन से अधिक मामले दर्ज हुए।
    - हार्दिक पटेल 10 महीने तक सूरत की जेल में रहे।
    - मतदान के दिन तक बीजेपी का विरोध किया।

    2012 में भी बीजेपी के साथ थे व्यापारी

    कपड़ा व्यापारियों ने 2012 के विधानसभा चुनाव में व्यापारी का हाथ बीजेपी के साथ, स्लोगन बनाया था। तब कांग्रेस ने कपड़ा व्यापारी धनपत जैन को टिकट दिया था, लेकिन व्यापारियों ने उन्हें नकार दिया। विधानसभा चुनाव के परिणाम से लगता है कि भले व्यापारी बीजेपी से नाराज हों, लेकिन वे उसका साथ नहीं छोड़ेंगे।

    आरक्षण पर कांग्रेस रुख साफ नहीं कर पाई

    पाटीदारों की नाराजगी से बीजेपी को 2015 के निकाय चुनाव में नुकसान हुआ था। लेकिन इस बार वह असर नहीं देखने को मिला। इस बार राहुल गांधी ने पाटीदारों को आरक्षण देने की बात कही, लेकिन फॉर्मूला नहीं बता पाए।

    जेटली खुद आए कपड़ा बाजार, बदल दिया रुख

    जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा व्यापारी तो नाराज ही थे। बार-बार अपनी डिमांड रखने के बाद भी उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी सिर्फ आश्वासन ही दिया। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह, पीयूष गोयल और मनसुख मांडविया कपड़ा कारोबारियों से मिले। जेटली भी 2 बार सूरत आए और कपड़ा व्यापारियों से मिले। साथ ही उन्हें भरोसा दिलाया कि जीएसटी को सरल किया जाएगा। व्यापारियों को लगा कि केंद्र में बीजेपी की सरकार है और जीएसटी में सरलीकरण भी बीजेपी ही कर सकती है।

    राजस्थानी नेता भी आए मनाने

    नाराज व्यापारियों को मनाने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी। सूरत के राजस्थानी व्यापारियों को अपने पक्ष में करने के लिए बीजेपी ने राजस्थानी नेताओं को सूरत बुलाया। इन नेताओं में केंद्रीय मंत्री और राज्य के कई मंत्री शामिल थे। इन नेताओं ने लगातार दो दिन तक राजस्थानी व्यापारियों से मुलाकात की और उन्हें समझाया। इसका असर भी चुनान परिणाम पर देखने को मिला। नाराज होने के बाद भी व्यापारियों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। इसी तरह नाराज उत्तर भारतीयों को मनाने के लिए उत्तर प्रदेश के नेताओं की सभाएं करवाईं।

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    सूरत में सुबह 8 बजे मतगणना शुरू होने के साथ ही मतगणना स्थल पर भाजपाइयों का जुटना शुरू हो गया। एक झटके बाद रुझान में बढ़त शुरू होते ही जोश परवान चढ़ता रहा।
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