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बिजनेसमैन वसंत गजेरा गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की जमीन करवा ली थी अपने नाम

वसंत गजेरा लक्ष्मी डायमंड और लक्ष्मी बिल्डर के मालिक हैं। उनका हीरा का बड़ा कारोबार है।

Danik Bhaskar | Mar 22, 2018, 04:40 AM IST
गिरफ्त में भी बेपरवाह गिरफ्त में भी बेपरवाह

सूरत. फर्जी दस्तावेजों के सहारे वेसू की करोड़ों रुपए की जमीन अपने नाम लिखवा लेने वाले उद्योगपति वसंत हरीभाई गजेरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गजेरा के खिलाफ हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। उन्हें उमरा पुलिस थाने के लॉकअप में रखा गया है। गजेरा को गुरुवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। उधर, गिरफ्तारी के बाद गजेरा को पुलिस इंस्पेक्टर के राइटर रूम में बैठाया गया। मीडिया वाले गजेरा की तस्वीर न ले सकें, इसलिए उन्होंने अपने आदमी गेट पर खड़े कर दिए। वहीं, गजेरा की गिरफ्तारी की जानकारी मिलते ही रुंढ के तेजस रमेश पटेल और कतारगाम के मनहरभाई छोटुभाई पटेल थाने पहुंचे और गजेरा और उसके भाई चुनी गजेरा के खिलाफ जमीन कब्जा करने व धमकी देने का आरोप लगाया।

- छोटुभाई के अनुसार, मृत महिला के जाली दस्तखत कर उनकी 500 करोड़ की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। कडोदरा रोड पर सजावट बंगलोज में रहनेवाले किसान वजुभाई उर्फ व्रजलाल नागजी मालाणी ने 26 नवंबर 1990 में वेसू की 18,500 स्क्वॉयर मीटर जमीन सुभाष लालजी मुंशी से खरीदी थी। मुंशी ने मई 2002 में इसी जमीन का फर्जी दस्तावेज कांतिभाई मुलजीभाई पटेल के नाम से बनवा लिया। फिर वसंत गजेरा ने कांतिभाई से मिलीभगत कर 13 मार्च 2003 को जमीन अपने नाम रजिस्ट्री करवा ली। इसके खिलाफ वजुभाई सिविल कोर्ट चले गए।

लक्ष्मी डायमंड के मालिक हैं गजेरा

वसंत गजेरा लक्ष्मी डायमंड और लक्ष्मी बिल्डर के मालिक हैं। उनका हीरा का बड़ा कारोबार है। गजेरा के कई स्कूल और संस्थाएं भी हैं। खोलवड में वह बालाश्रम चलाते हैं। उनके भाई धीरुभाई गजेरा भाजपा से दो बार विधायक रह चुके हैं।

डीसीपी बोलीं- एसीपी ने 20 मार्च 2018 को की थी केस दर्ज करने की सिफारिश

इस मामले में पुलिस की भूमिका और उसके दावों पर सवाल उठ रहे हैं। जोन-2 की डीसीपी विधि चौधरी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि कोर्ट ने 13 मार्च 2018 को वसंत गजेरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस को 20 मार्च को आदेश की कॉपी मिली।

डीसीपी चौधरी ने यह भी कहा कि एसीपी एफ डिविजन ने भी गजेरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश 20 मार्च को ही की थी। लेकिन पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें लिखा हुआ है कि एसीपी एफ डिविजन ने 29 सितंबर 2017 को पुलिस कमिश्नर को जांच रिपोर्ट सौंपी और उसी दिन केस दर्ज करने की सिफारिश की।

इस पर जब डीसीपी चौधरी से भास्कर ने सवाल किया तो वह बचाव की स्थिति में आ गई। उन्होंने कहा कि एसीपी की रिपोर्ट में कुछ सुधार की जरूरत थी, इसलिए फिर से उन्हें मामले की जांच करने को कहा गया। इसमें महत्वपूर्ण बात यह भी है कि हाई कोर्ट ने गजेरा के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश एसीपी के 29 सितंबर 2017 की रिपोर्ट के आधार पर ही दिया।

लॉकअप में भी हंसते रहे लॉकअप में भी हंसते रहे