सूरत

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तापी नदी के किनारों पर लगाए मोशन सेंसर कैमरे, दिखा दुर्लभ 15 उदबिलाव का झुंड

कुछ साल पहले तापी नदी में सूरत के नेचर क्लब को इस प्रजाति के कुछ उदबिलाव दिखे थे।

Danik Bhaskar

Feb 26, 2018, 01:53 AM IST

सूरत. गवियर गांव के पास तापी नदी में 15 स्मूद कोटेड ओटर यानी उदबिलाव का झुंड दिखने के बाद उनकी गणना के बारे में प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वैसे तो राज्य भर में विलुप्त होते उदबिलाव के संरक्षण के लिए 2013 से ही प्रयास किए जा रहे हैं।


वन विभाग और नेचर क्लब सूरत द्वारा तापी नदी के किनारों पर मोशन सेंसर कैमरे लगाए जा रहे हैं। अब तक लगभग 11 कैमरे लगाए जा चुके हैं। 2010 के बाद ओटर की संख्या में कमी देखी गई थी। सरकार ने इसे विलुप्त हो रही प्रजातियों में शामिल किया और संरक्षण की मुहिम शुरू की है। स्मूथ कोटेड ओटर उदबिलाव की एक दुर्लभ प्रजाति है। वर्ष 2010 तक राज्य में इस प्रजाति के बारे में बहुत कम जानकारी थी। सरकार और निजी संस्थाओं द्वारा इस प्रजाति से संबंधित डेटा इकट्ठे किए गए। इस डेटा के अनुसार यह दुर्लभ प्रजाति गुजरात में विलुप्त हाेने के कगार पर है। कुछ साल पहले तापी नदी में सूरत के नेचर क्लब को इस प्रजाति के कुछ उदबिलाव दिखे थे। उसके बाद नेचर क्लब और वन विभाग ने मिलकर इनके संरक्षण का उपाय किया। अब तापी नदी में इनकी गणना के लिए कैमरे लगाए जा रहे हैं।

2013 से चल रही संरक्षण की मुहिम
नेचर क्लब से गोल्डी गांधी बताते हैं कि स्मूद कोटेट ओटर पानी और जमीन दोनों जगहों पर रह सकते हैं। तेजी से औद्योगीकरण और शहरीकरण की वजह से यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है। नेचर क्लब ने वर्ष 2013 में इनके संरक्षण की मुहिम शुरू की थी। अब सूरत के तापी नदी में 25 जगहों पर इनका झुंड देखा गया।

मछुआरों की ली जा रही मदद
जिन जगहों पर उदबिलाव के आने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं, वहां मोशन सेंसर कैमरे लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है। साथ ही मछुआरों की भी मदद ली जा रही है। इनके विलुप्त का एक कारण यह भी था कि मछली के जाल में फंसकर इनकी मौत हो जाती थी।

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