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GST: रोज लौट रहा बेचा हुआ 10 लाख मीटर कपड़ा अब व्यापारी बोलेे- बिका माल वापस नहीं होगा

जीएसटी इफेक्ट| 8 महीने में आधा रह गया कारोबार, व्यापारी भी ले रहे जरूरत के हिसाब से कपड़ा

एजाज शेख | | Last Modified - Feb 28, 2018, 03:35 AM IST

  • GST: रोज लौट रहा बेचा हुआ 10 लाख मीटर कपड़ा अब व्यापारी बोलेे- बिका माल वापस नहीं होगा
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    सूरत. जीएसटी की प्रक्रियाओं से बचने के लिए सूरत के कपड़ा व्यापारी बेचा गया माल वापस नहीं ले रहे हैं। व्यापारियों ने अपनी दुकानों के आगे 1 जुलाई 2017 के बाद बिका माल वापस नहीं लिया जाएगा की सूचना लगा दी है। व्यापारी अब उधारी और एडवांस में माल नहीं दे रहे हैं। जितने माल का जीएसटी बिल बना सकते हैं उतना ही माल बेच रहे हैं। इसकी वजह से बाहर जाने वाला माल आधा रह गया है।

    जुलाई में जीएसटी लागू होने के पहले बड़े पैमाने पर माल वापस होता था, लेकिन अब यह आधे से भी कम हो गया है। 8 महीने पहले कपड़ा व्यापारी 400 ट्रक माल दूसरे राज्यों में भेजते थे। इसमें से 20 फीसदी यानी 80 ट्रक माल वापस आ जाता था। अब रोज 200 ट्रक कपड़ा दूसरे राज्यों में भेज रहे हैं। इसमें से करीब 5 फीसदी यानी 10 ट्रक माल वापस आ रहा है। जो माल वापस आ रहा है जीएसटी में उसका भी हिसाब देना होता है, इसलिए व्यापारी अब दूसरे राज्यों के व्यापारियों से कह रहे हैं, कि जितना जरूरत हो उतना ही माल लो, बिका हुआ माल वापस नहीं होगा। व्यापारियों की इस कवायद के बाद भी माल वापस आ रहा है। कपड़ा व्यापारियों का मानना है कि दुकानों पर सूचना लगाए जाने के बाद रिटर्न आने वाले माल में कमी आएगी।


    जितना कम माल वापस हो उतना अच्छा

    कपड़ा व्यापारी दिनेश कटारिया ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद सबसे ज्यादा प्रभाव सूरत के कपड़ा कारोबार पर पड़ा है। कारोबार आधे से भी कम हो गया है। पहले हम तीन महीने की उधारी पर माल दे देते थे। तीन महीने बाद भी जो माल नहीं बिकता था उसे वापस ले लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जीएसटी में हिसाब देना पड़ता है, इसलिए बाहर के व्यापारी भी सिलेक्टेड कपड़ा ही ले रहे हैं। ऐसे में जितना कम माल रिटर्न आए उतना ही अच्छा है। हम चाहते हैं कि माल रिटर्न ही नहीं आए। यही कारण है कि दुकानों पर सूचना लगा दी है कि रिटर्न माल वापस नहीं लेंगे।

    पहले: व्यापारी जो आर्डर देता था उससे पांच गुना माल ट्रक पर लाद भेज देते थे

    जीएसटी लागू होने से पहले बाहर का व्यापारी कपड़े का जो आर्डर देता था, उससे पांच गुना ज्यादा माल यहां के व्यापारी ट्रांसपोर्ट कर देते थे। यहां तक कि डिफेक्टिव या पुराना स्टॉक भी भेज देते थे। 125 करोड़ रुपए का 4 करोड़ मीटर कपड़ा 400 ट्रकों से अन्य राज्यों और शहरों में भेजा जाता था। इसमें से 20 फीसदी यानी 80 ट्रक कपड़ा रिटर्न आता था। जो करीब 30 करोड़ रुपए का होता था। इतने बड़े पैमाने पर वापस आए माल को यहां के व्यापारी दूसरे व्यापारियों को बेच देते थे। टैक्स का हिसाब-किताब इतना जटिल नहीं होने के कारण यहां के कपड़ा व्यापारियों को कोई दिक्कत नहीं होती थी।

    अब: हर बिक्री का देना पड़ रहा हिसाब इसलिए जितना चाहिए उतना ही भेज रहे

    जीएसटी में हर खरीदी-बिक्री का हिसाब देना होता है। इसकी वजह से अब ऑर्डर से ज्यादा माल यहां के व्यापारी नहीं देते हैं। अब अन्य राज्यों और शहरों के व्यापारी भी जितना उन्हें जरूरत होती है उतना ही सेलेक्टेड माल का आर्डर दे रहे हैं। यहां के व्यापारी चाहते हैं कि माल रिटर्न न हो, क्योंकि अब सभी पर टैक्स चुकाना पड़ रहा है। इसके अलावा पुराना माल रिटर्न आया तो दोबारा उसे बेचने में परेशानी होगी। स्थिति यह है कि अब रोज 65 करोड़ रुपए का 2 करोड़ मीटर कपड़ा का 200 ट्रकों में भरकर बाहर भेजा जा रहा है। इसमें से 5 फीसदी यानी 10 ट्रक माल रिटर्न हो रहा है।

    दिक्कत: अब वापस आया माल कोई व्यापारी लेने को तैयार नहीं हो रहा है

    बाहर के व्यापारी वैसे तो जो सूरत आकर कपड़ा लेकर जाते हैं। उनसे माल वापसी की उम्मीद कम रहती है, फिर भी पेमेंट चुकाने के समय जो माल बचा होता है, उसे विक्रेता बनकर वापस भेज देते हैं। बाहर के व्यापारी भी माल ले लेते थे, क्योंकि उन्हें माल बेचकर ही रुपए चुकाने होते थे। जब पैसे चुकाने होते थे, तब जितना माल नहीं बिका रहता था उतना वापस कर देते थे। वापस आए माल को यहां के व्यापारी किसी और को बेच देते थे। इस तरह रोटेशन चलता रहता था। अब जीएसटी में हर खरीदी-बिक्री का हिसाब देना पड़ता है। प्रक्रिया भी जटिल है, जिससे व्यापारी बचना चाहते हैं।

    जीएसटी में बिल मैच नहीं होने से बढ़ रही है परेशानी

    मैंने दूसरे राज्य के एक व्यापारी को 15, 17 और 20 हजार रुपए का अलग-अलग बिल बनाकर अलग-अलग समय पर कपड़ा भेजा। उसने कुछ दिनों बाद तीनों डिलेवरी का 20 हजार रुपए का एक बिल बनाकर कपड़ा वापस कर दिया। अब जीएसटी में यह बिल मैच नहीं हो रहा है। इसे परेशानी बढ़ गई है।

    - रितेश अग्रवाल,कपड़ा व्यापारी

    कपड़ा व्यापारी नहीं चाहते कि बेचा हुआ माल वापस आए

    साउथ गुजरात टेक्सटाइल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष युवराज देसले ने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले रोज करीब 80 ट्रक माल रिटर्न होता था। अब कारोबार आधा होने के बाद प्रति दिन 10 ट्रक माल वापस हो रहा है। यह पहले की अपेक्षा काफी कम है, फिर भी व्यापारी नहीं चाहते कि माल रिटर्न हो।

    - युवराज देसले, अध्यक्ष

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