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सूरत में सैलून में चुनावी चर्चा : 4 सीटों पर कांग्रेस-भाजपा में कांटे का मुकाबला

60 वर्षीय भीखा लापसीवाला ने चुनावी चर्चा छेड़ते हुए कहा कि सूरत के पुराने इलाके में हजारों समस्याएं हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2017, 04:09 AM IST
Congress and BJP face tough competition on Surat s four seats

सूरत. राज्य विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों के साथ आम लोगों में भी चर्चा तेज है। दैनिक भास्कर ने सूरत के 12 विधानसभा क्षेत्रों में से 4 क्षेत्रों ओलपाड, मजूरा, सूरत पश्चिम और पूर्व में चुनाव को लेकर लोगों का मूड जानने की कोशिश की तो कई रोचक बातें सामने आईं। चुनावी मौसम में चाय की टपरियों, पान की दुकानों, हेयर कटिंग सैलूनों पर चुनावी चर्चा ही सुनने को मिल रही है। इस बार किसकी सरकार बनेगी, पाटीदार आरक्षण आंदोलन का चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ेगा, जीएसटी और नोटबंदी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों के अलावा स्थानीय मुद्दों पर भी गरमागरम बहस देखने को मिली।

ओलपाड : नए इलाके जुड़ने से बदले समीकरण, किसान-पाटीदार मुद्दे अहम

ओलपाड टाउन के एक सैलून में बाल कटवाने आए मनसुख पटेल ने कहा कि ओलपाड में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होगी। ओलपाड में नए इलाके जुड़ने से समीकरण बदल गए हैं। किसानों और पाटीदारों के आरक्षण के मुद्दे चुनाव परिणाम पर असर डाल सकते हैं। नटु भाई नाम के सज्जन ने बताया कि पाटीदार आरक्षण का मुद्दा चुनाव पर नहीं पड़ेगा। वह अपनी बात पर अड़े रहे और 100 रुपए की शर्त लगाने को भी तैयार हो गए।

सूरत पश्चिम : राष्ट्रीय मुद्दों के साथ स्थानीय समस्याएं भी हैं महत्वपूर्ण

मोराभागल और पालनपुर पाटिया में हेयर कटिंग सैलूनों में चल रही चर्चा के मुताबिक सरदार ब्रिज की ट्रैफिक समस्या को लेकर लोग नाराज हैं। मनपा ब्रिज निर्माण बहुत धीमी गति से कर रही है। इसकी वजह से हजारों लोग रोज ट्रेफिक जाम का सामना कर रहे हैं। कुछ लोग जीएसटी के दूरगामी फायदे गिनवा रहे हैं, तो कुछ नुकसान। कुल मिलाकर सूरत पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में लोग स्थानीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बात करते दिखे।

मजूरा : हिंदीभाषियों को टिकट से लेकर राहुल के मंदिर जाने की चर्चा

भटार इलाके के एक सैलून में बाल कटवाने आए कुछ लोगों ने न्यूज चैनल पर खबरें देखते-देखते चुनावी चर्चा शुरू कर दी। एक महाशय ने जीएसटी को भाजपा के लिए आत्मघाती बताया। वहीं दूसरे महाशय जीएसटी के दूरगामी फायदे गिनवाने लगे। हिंदीभाषी दावेदारों को विधानसभा चुनाव का टिकट देने, नहीं देने से लेकर नरेंद्र मोदी और राहुल के मंदिर दर्शन तक चर्चा पहुंच गई। मजूरा विधानसभा में विकास हुआ या नहीं इस पर भी जमकर बहस हुई।

सूरत पूर्व : सरकारें आईं-गईं, पर ट्रैफिक समस्या नहीं सुलझी

भागल के एक सैलून में दाढ़ी बनवाने आए 60 वर्षीय भीखा लापसीवाला ने चुनावी चर्चा छेड़ते हुए कहा कि सूरत के पुराने इलाके में हजारों समस्याएं हैं। जो सालों से जस की तस हैं। सरकारें आती-जाती रहीं पर यहां की ट्रैफिक समस्या दूर नहीं कर पाईं। भीखा भाई की बात काट कर विक्की तमाकूवाला ने कहा कि सूरत के पुराने इलाके अब पुराने नहीं रहे। यहां बहुत काम हुए हैं। हालांकि ट्रैफिक की समस्या पर विक्की भी कुछ बोल नहीं पाए। वह सूरत पूर्व की सीट पर किस समाज का वोट निर्णायक रहेगा, इसकी बात करने लगे। यहां लोगों के बीच राष्ट्रीय राजनीति पर भी खूब बहस हुई। -जैसा मेहुल पटेल ने देखा और सुना।

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