सूरत

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राज्य के निजी स्कूलों में फीस कंट्रोल का कानून अगले सेशन से, HC का अहम फैसला

निजी स्कूलों की फीस को कंट्राेल करने बनाए गए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज।

Dainik Bhaskar

Dec 28, 2017, 05:21 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

अहमदाबाद. गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले के तहत राज्य में निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। बुधवार को आए हाईकोर्ट के इस फैसलने के साथ ही इस कानून को वर्ष 2018 के शैक्षणिक सत्र से लागू करने के निर्देश दिए हैं। गुजरात स्व-वित्त पोषित स्कूल (फीस विनियमन) कानून 2017 को राज्य सरकार ने इसी साल मार्च में पारित किया था। इसके तहत प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में स्टूडेंट्स से सालाना फीस लेने की अधिकतम सीमा क्रमश: 15 हजार, 25 हजार और 27 हजार रुपए तय की गई है।

कानून तोड़ने पर जुर्माना और मान्यता भी रद्द

इसके उल्लंघन पर पांच से दस लाख तक जुर्माना और बाद में मान्यता रद्द करने जैसे प्रावधान कानून में हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए कायदा को संवैधानिक व्यवस्था के तहत बनाए जाने को योग्य ठहराया है। चीफ जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस वीएम पंचोली की बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी कर गत 31 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर फैसला बुधवार को सुनाया गया।

सरकार ने ये दिए थे तर्क

- नियम बनाने का अधिकार सरकार को है। जनहित में नियम बनाया गया है।
- स्कूल चैरिटी स्तर पर चलती हैं इसलिए मोटी फीस नहीं वसूल सकती।
- स्कूलों को न हानि, न लाभ के संतुलन पर चलाना होगा।
- विशेष गतिविधियों के लिए फीस निर्धारण समिति से मांग कर सकते हैं।
- प्रदेश में चलने वाले सभी तरह के स्कूलों पर सरकार का अधिकार है।

फीस नियमन समितियों, सरकार के निर्णय को संवैधानिक माना

हाई कोर्ट ने कानून और इसके तहत बनी फीस नियमन समितियों को संवैधानिक करार दिया। वहीं, अधिक फीस लेने वाले स्कूलों को छह हफ्तों में अपना पक्ष सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखने को कहा है। स्कूलों को अपनी आय और अन्य जानकारी भी देने को कहा गया है। नियम लागू करने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर संचालकों द्वारा की गई स्टे की मांग को भी चीफ जस्टिस आर सुभाष रेड्‌डी और जस्टिस वीएम पंचोली की खंडपीठ ने रद्द कर दिया। सीबीएससी, इंटरनेशनल बोर्ड और मायनोरिटी शालाओं को भी इस दायरे में रखा है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने 8 सप्ताह में इस प्रस्ताव पर निर्णय लेने के लिए भी निर्देश दिया है।

प्रदेश में 15,927 स्कूलों में से 4,753 ले रहे हैं ज्यादा फीस

गुजरात सरकार के आंकड़ों के अनुसार कानून के दायरे में आने वाले राज्य के 15,927 स्कूलों में से 11,174 कानून में निर्धारित अधिकतम सीमा से कम फीस लेते हैं। 841 ने फीस नियमन समिति से संपर्क किया है। 2,000 से अधिक स्कूलों ने कोई हलफनामा नहीं दिया और 2,300 से अधिक स्कूलों ने कानून को चुनौती दी थी। अभिभावकों के वकील रोहित पटेल ने बताया कि अदालत ने समिति में अभिभावकों को प्रतिनिधित्व देने की मांग भी खारिज कर दी है। अधिक फीस लेने वाले स्कूलों को छह सप्ताह में अपना पक्ष सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखने को कहा है। स्कूलों को अपनी आय और अन्य जानकारी भी देने को कहा गया है।

शिकायतों के निस्तारण के लिए चार बड़े शहरों में समितियां

गुजरात स्व वित्त पोषित स्कूल (फीस विनियमन) कानून 2017 को सरकार ने इसी साल मार्च में पारित किया था। हाईकार्ट के बुधवार को आए फैसले के बाद इस नियम के तहत किसी तरह की शिकायत आदि के निपटारे के लिए राज्य को चार क्षेत्रों - अहमदाबाद, राजकोट, सूरत और वडोदरा में बांटकर फीस नियमन समितियां बनाई गई हैं। यहां शिकायत की जा सकेगी। कानून का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूलों पांच से दस लाख रुपए तक दंड और बाद में मान्यता रद्द करने जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।

कानून को लागू करने का फ्रेमवर्क तैयार

स्टेट एजुकेशन डिपार्टमेंट की चीफ सेक्रेटरी सुनयना तोमर के मुताबिक,गुजरात में कानून को लागू करने की पूरा फ्रेमवर्क तैयार है। बुधवार से एक वेबसाइट भी शुरू की जा रही है। इसके जरिये लोग स्कूलों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन फार्म भर सकेंगे। इसमें स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच सीधा संपर्क नहीं होगा।’

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