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आज से किसी को भी पानी का दुरुपयोग करते हुए देखो, तो उससे कहो- जल श्री कृष्ण

दैनिक भास्कर जल अभियान, भास्कर लाखों पाठकों के साथ मिलकर चलाएगा अभियान

Bhaskar News | Last Modified - Mar 09, 2018, 05:36 AM IST

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    सूरत. पानी के मामले में पिछले 10-15 वर्षों से समृद्ध माना जाने वाला गुजरात इस बार जल संकट का सामना कर रहा है। गुजरात की जीवनरेखा नर्मदा गर्मी से पहले ही सूख गई है। सौराष्ट्र, मध्य गुजरात, उत्तर गुजरात की स्थिति अभी से गंभीर है। बारिश शुरू होने में अभी चार महीने का समय बाकी है। ऐसे में स्थिति बेकाबू न हो, इसलिए हमें ही पहल करनी होगी। शुरुआत खुद से, अपने घर से करें। जितना हो सके उतना पानी बचाएं। छोटे-छोटे उपयोग से हम इस संकट से उबर सकते हैं। क्योंकि कहा गया है कि हम पानी नहीं बना सकते हैं, केवल बचा सकते हैं। इसलिए गर्मी में हमें हर प्रकार से पानी बचाने का प्रयास करना चाहिए और बरसात में वॉटर हार्वेस्टिंग और अन्य तरीके से धरती को जल दान करना चाहिए। ताकि बरसात का पानी ज्यादा से ज्यादा मात्रा में धरातल तक पहुंच सके। इससे भूगर्भ का जलस्तर ऊपर आएगा और गर्मी में हमें जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    युवा बन सकते हैं जल क्रांतिकारी

    युवा हमेशा परिवर्तन करने में आगे रहे हैं। गुजरात में 20 से 30 वर्ष के युवकों की कुल आबादी 1,10,59,544 है। राज्य के 1.10 करोड़ युवक रोज 2 लीटर पानी बचाएं तो रोजाना 2.20 करोड़ लीटर पानी की बचत हो सकती है।

    अभी तो गर्मी की शुरुआत हुई है और गांवों में जल संकट शुरू हाे गया है

    प्रदेश में जल संकट के और विकट होने के संकेत मिल रहे हैं। पानी की कमी के कारण राजकोट के 84 गांवों में चार दिन की कटौती की गई है तो पंचमहाल के पावागढ़ में लोग 15 लीटर पानी के लिए 20 रुपए चुकाने को मजबूर हैं। उत्तर गुजरात के 15 जलाशयों में 43 फीसदी पानी बचा है। जबकि मध्य गुजरात के 17 जलाशयों में 60 फीसदी, दक्षिण गुजरात के 13 जलाशयों में 43 फीसदी और सौराष्ट्र-कच्छ के 138 जलाशयों में 31 फीसदी पानी है। प्रदेश के सभी बड़े बांधों में कुल क्षमता का 41 फीसदी पानी ही है।

    संकट को ऐसे समझें
    नर्मदा पर हम 75% निर्भर हैं। पर 8 साल में नर्मदा में पानी की आवक 1.5 करोड़ लीटर घटी है। दूसरी ओर प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत 8 साल में 109 लीटर से बढ़कर 133 लीटर हो गई है। अत: 25 लीटर पानी और चाहिए।

    भास्कर विचार

    क्योंकि अब हमें पानी को ईश्वर के प्रसाद के समान मानना होगा। जैसे प्रसाद का सम्मान करते हैं, वैसे ही पानी का सम्मान करना पड़ेगा। आप अपने घर में, दोस्तों में, रिश्तेदारों अथवा सोसाइटी में कहीं भी, किसी को भी पानी का दुरुपयोग करते हुए देखो, तो उसे जल श्री कृष्ण कहो। शायद इससे उसमें पानी में ईश्वर दिखाई दे और वह दुरुपयोग करना बंद कर दे।

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