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लोक डायरा: दिग्गज कलाकार भीखूदान गढ़वी, बिहारी हेमु और ओसमान मीर ने छोड़ी छाप

एक लेख में अभी के राजनेताओं की सौराष्ट्र के बहारवटिया के साथ तुलना करते हुए कहा कि वे हजार गुना अच्छे थे।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:40 AM IST

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    सूरत.सूरतियों को मनाेरंजन के माध्यम से “स्वस्थ जीवन-सुखी जीवन’ का संदेश देने के लिए कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल एवं दैनिक भास्कर की ओर से एक अनोखा अभियान शुरू किया गया है। हनुमान जयंती के अवसर पर पूणा गांव के रंगाणी फार्म में शनिवार को लोक डायरा का आयोजन हुआ। इसमें पद्मश्री भीखूदान गढ़वी (इनसेट), आेसमान मीर, हंसा बारोट, बिहारी हेमु गढवी जैसे दिग्गज कलाकरों ने शहरवासियों को लोक रंग से भिगो दिया।

    दोहा-छंद के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

    भीखूदान गढ़वी, बिहारी हेमु गढ़वी और ओसमान मीर तीनों ने दोहा-छंद से कार्यक्रम की शुरुआत की। हंसाबेन बारोट ने "सायबो मारो...' गीत की प्रस्तुति दी। इसके बाद बिहारी हेमु गढवी ने "शिवाजीनु हालरडुं' और "ना चढ्या हथियार' सुनाकर उपस्थित अतिथियों एवं अग्रणियों का मनोरंजन किया।

    ‘ कादु मकराणी तुझे लूट लेगा...’

    भीखूदान गढ़वी ने साहित्य रचना सुनाते हुए कहा कि जूनागढ़ के पास वडाल गांव है। वहां एक बार एक बहू सोना पहनकर बाहर निकली थी तो सास ने व्यंग्य किया कि "कादु मकराणी लूंटी लेशे' (कादु मकराणी तुझे लूट लेगा)। बहू ने यह बात कादु मकराणी को जाकर बताई तो उन्होंने उस बहू को आश्वासन दिया कि जब तक मैं जिंदा हूं वडाली गांव की तरफ कोई नजर उठाकर नहीं देख सकता।

    राजनेताओं से तो सौराष्ट्र के बहारवटिया अच्छे

    दिग्गज कलाकार पद्मश्री भीखूदान गढ़वी ने लोक साहित्य की बात कही। भास्कर की रविवार के परिशिष्ट में एक लेख में अभी के राजनेताओं की सौराष्ट्र के बहारवटिया के साथ तुलना करते हुए कहा कि वे हजार गुना अच्छे थे।

    #पद्मश्री भीखूदान गढ़वी ने की दैनिक भास्कर के साथ खास मुलाकात

    कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल और भास्कर द्वारा आयोजित डायरा में सूरतियों को रसपान कराने आए भीखूदान गढ़वी ने अब तक के सफर पर बातचीत की

    Q. ऐसी घटना जो आज भी याद है?
    A.35 वर्ष पहले की बात है। एक कार्यक्रम के लिए हमारी तारीख बुक हो गई थी। कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले बहन की बेटी गुजर गई। हमको मालूम हुआ, फिर भी डायरा किया और लोगों को इसकी खबर भी नहीं पड़ने दिया। जब वह बात याद आती है तो मेरी आंखें नम हो जाती हैं।


    Q. डायरा का जीवन के साथ तुलना?
    A.डायरा में पिता-पुत्र, भाई-बहन, मित्र, पति-पत्नी और कुटुंब की बात होती है। डायरा यानी कि लोगों का एक समूह। जिसमें एक अथवा दो तीन लोग एकत्र होकर लोगों के हित की और लोगों के लिए बात करें। पहले किसी के घर के ओसारी में डायरा होता था अब स्टेज पर होता है।

    Q. नया साहित्य कैसे दे सकते हैं?
    A. कोई भी कलाकार 100 फीसदी नया नहीं दे सकता है। इसलिए प्रोग्राम करने के बाद किस जगह क्या बात की है उसको डायरी में लिखता हूं। जब दोबारा वहां जाता हूं तो नई बात करता हूं। हमारेे जीवन की बात लोगों तक न आए। इसलिए कई बार हास्य व करुण रस का पुट अपने गायन में डालते हैं। ये ओडियंस तो क्या हमको भी इस बात की खबर नहीं पड़ती।

    Q. भविष्य आप कैसा देख रहे हो?
    A. डायरा थोड़ा बहुत होता है पर यह कभी बंद नहीं होगा। अब डायरा कॉमर्शियल हो गया है। वहां किस तरह बोलना है, यह तय करना होता है, लेकिन डायरा को तो रहना ही है। डायरा को कुटुंब के बीच बैठकर सुना जा सकता है। गंगा का जल दुर्गंध मारेगा, सोना पर काट (जंग) लगेगा और सिंह घास खाएगा तभी डायरा बंद होगा।

    Q. ओडियंस पर क्या फर्क पड़ा है?
    A.जिस शहर में प्रोग्राम होता है वहां के लोग सुनने आते हैं। श्रोता तो अच्छा संगीत सुनते हैं। कलाकार की तुलना में श्रोताओं का ध्यान अधिक होता है। कभी कोई बात अधूरी रह गई हो तो श्रोता ही याद दिलाते हैं। हमारी 400 घंटे की ऑडियों कैसेट है। लोग अलग-अलग से सुने होते हैं। फिर लोग आते हैं और कहते हैं कि जो कैसेट सुना उसमें मजा आ गया , लेकिन रावणवध की बात की गई होती तो अधिक मजा आती। ऐसा कहने वाले लोग भी मिले हैं।

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    पहले ओसारे में डायरा होता था अब स्टेज पर: पद्ममश्री भीखुदान गढ़वी
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    सूरत की सांसद दर्शना जरदोश, लिंबायत विधायक संगीता बेन पाटिल भी डायरे में उपस्थित रहीं।
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