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ट्रेन कोच में लगा क्यूआर कोड बताएगा RPF जवान वहां तैनात था या नहीं

राजधानी, शताब्दी एक्सप्रेस के लिए तैयार किया जा रहा है ई-पेट्रोलिंग सिस्टम

लवकुश मिश्रा | Last Modified - Mar 25, 2018, 03:32 AM IST

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    सूरत. पश्चिम रेलवे के मुंबई डिवीजन में ट्रेनों के अंदर एस्कॉर्टिंग ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कर्मियों पर नजर रखने और रेल संपत्ति एवं यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ई-पेट्रोलिंग एप लांच करने जा रही है। इस तकनीकी का उद्देश्य सुरक्षा उद्देश्य कम मैन पावर में अधिक से अधिक अत्याधुनिक सुरक्षा मुहैया कराना है। पश्चिम रेल मुंबई मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े स्टेशनों पर प्री-फेब्रिकेटेड क्यूआर कोड लगाने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही एक्सप्रेस ट्रेनों में भी प्री-फेब्रिकेटेड क्यूआर कोड लगाने की योजना है।

    रेलवे का मानना है कि ट्रेनों में तैनात सुरक्षा कर्मियों पर मॉनिटरिंग जरूरी है, क्योंकि अधिकांश मामलों में सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही सामने आई है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेल यह एप लाने जा रही है ताकि ट्रेन में तैनात सुरक्षाकर्मी नियमित रूप से ट्रेन में गश्त कर रहे हैं या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग की जा सके।


    ई-पेट्रोलिंग से दो सुरक्षाकर्मी से होगी सुरक्षा
    एक्सप्रेस ट्रेनों में इस एप के जरिए ई-पेट्रोलिंग होगी। आपको बता दें कि वर्तमान में पश्चिम रेलवे की लंबी दूरी की ट्रेनों में चार आरपीएफ-कर्मी पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात होते हैं, जिसमें एक जवान इंजन के पास वाले कोच में, जबकि 2 जवान आरक्षित एवं एसी कोच में होते हैं। 2 जवान पीछे वाले गॉर्ड केबिन कोच में तैनात रहते हैं। कंट्रोल रूम से इनका संपर्क वाकी-टाकी के जरिए होता है, लेकिन ई-पेट्रोलिंग एप से 2 आरपीएफ कर्मियों में ही यात्रियों की सुरक्षा काफी आधुनिक तरीके से की जा सकेगी।

    लोकेशन ट्रेस करना होगा आसान
    क्यूआर कोड लगाने और ई-पेट्रोलिंग एप के तैयार करने का सबसे पहला और प्रमुख उद्देश्य आरपीएफ कर्मियों को ड्यूटी के प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार बनाना है, क्योंकि यह एप ऑन ड्यूटी आरपीएफ कर्मियों पर तीसरी आंख बनकर नजर रखेगा। जबकि दूसरा उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में ट्रेन में नजदीकी लोकेशन पर तैनात जवान को ट्रेस कर उसे वहां भेजना होगा। तीसरा उद्देश्य कम से कम मैन पावर में ट्रेन व यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा प्रदान करना है।

    घटना: कच्छ एक्सप्रेस में सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही सामने आई
    उल्लेखनीय है कि 22 मार्च की रात कच्छ एक्सप्रेस में यात्रियों ने बूटलेगर को लेकर हंगामा किया। ट्रेन में आरपीएफ एस्कॉर्टिंग टीम तैनात थी, लेकिन हंगामा रोकने में नाकाम रही। ऐसी स्थिति में यह क्यूआर कोड काफी कारगर साबित होगा। आपात स्थिति में जरूरत के अनुसार और भी एस्कॉर्टिंग जवान तैनात किए जा सकेंगे। प्रायोगिक तौर पर इसे राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस में लगाया जाएगा।

    बदलाव: पहले एप को सभी कार-शेड की दीवारों पर लगाने की योजना थी
    इससे पहले रेल यात्रियों की सुरक्षा के अलावा यह क्यूआर कोड पश्चिम रेल मुंबई मंडल के सभी कार-शेड के दीवारों पर भी लगाए जाने की योजना थी। दीवारों पर क्यूआर कोड लगा देने से रात के समय कार-शेड में फेरे खत्म कर खड़ी होने वाली उपनगरीय ट्रेनें ई- पेट्रोलिंग एप की नजर में होंगी। किसी भी संदिग्ध परिस्थितियों का आसानी से पता लगाया जा सकता था, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है और सबसे पहले इसे राजधानी और शताब्दी में लगाया जाएगा।

    प्रायोगिक तौर पर होगी एप की शुरुआत
    इस तकनीकी को परखने के लिए सबसे पहले इस एप का प्रायोगिक तौर पर ट्रेनों से शुरू कराया जाएगा और इस एप से इसके परिणाम की जांच की जाएगी। यदि यह योजना के मुताबिक सफल रहा तो जल्द ही ई-पेट्रोलिंग से रेल संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा संभव हो सकेगी।

    तरीका: हर दो घंटे में आरपीएफ को अपनी लोकेशन बतानी होगी
    ट्रेनों में कोच के अंदर प्री-फेब्रिकेटेड क्यूआर कोड लगाए जाएंगे और ई-पेट्रोलिंग का एक एप तैयार किया जाएगा जो ऑन ड्यूटी आरपीएफ कर्मियों के स्मार्ट फोन में इंस्टॉल होगा। प्रशासन के आदेशानुसार ड्यूटी के दौरान हर दो घंटे में आरपीएफ कर्मियों को अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करना होगा। स्कैन करने के बाद कंट्रोल रूम को आरपीएफ जवानों के लोकेशन की लाइव जानकारी सीधे कंट्रोल रूम को मिलेगी। इससे चलती ट्रेन में किसी भी आपात स्थिति में आरपीएफ कर्मियों के लोकेशन को ट्रेस कर उन्हें फौरन मौके पर तैनात किया जा सकेगा।

    प्रयोग: सबसे पहले राजधानी और शताब्दी में होगा इस्तेमाल: शुक्ला
    मुंबई मंडल के वरिष्ठ मंडल विभागीय सुरक्षा आयुक्त अनूप शुक्ला ने बताया कि ट्रेनों में एस्कॉर्टिंग टीम पर इस एप से नजर रखी जा सकेगी। सबसे पहले यह सुविधा राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस में शुरू की जाएगी। एक महीने के भीतर इस योजना को शुरू करने की संभावना है।

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