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भूमि अधिग्रहण के विरोध में बच्चों को स्कूल से निकाल रहे

सरकार को संदेश देने के लिए घोघा के ग्रामीणों का अजीबोगरीब तरीका

Danik Bhaskar | Apr 04, 2018, 06:54 AM IST

भावनगर. जिले के घोघा तालुका के बाडी और आसपास के 11 गांवों के ग्रामीणों ने एक अप्रैल से गुजरात पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (जीपीसीएल) की ओर से कथित तौर पर उनकी मर्जी के विरुद्ध अधिग्रहित उनकी जमीन पर कोयला खनन का काम शुरू करने पर अब विरोध जताने के लिए एक अजीबोगरीब तरीका अपनाते हुए अपने बच्चों को एक साथ स्कूल से निकाल लेने का कार्यक्रम शुरू किया है। इस क्रम में सबसे पहले मलेकवदर गांव के 95 बच्चों ने सरकारी स्कूल से एक साथ त्याग प्रमाणपत्र ले लिया।

- एक ग्रामीण ने बताया कि प्रत्येक दिन एक प्रभावित गांव के ग्रामीण ऐसा करेंगे। यह ग्रामीणों की परवाह नहीं करने वाली सरकार को एक कड़ा संदेश देने के लिए किया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि एक अप्रैल को पुलिस को करीब ढाई से तीन हजार प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े तथा लाठी चार्ज करना पड़ा और इस दौरान महिलाओं समेत 50 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।

बाडी व 12 गांव के किसानों और जीपीसीएल की जानकारी

- किसानों को 2.50 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया गया। कंपनी का दावा है कि तीन गुना ज्यादा मुआवजा दिया गया।

- सरकार ने बाडी में भावनगर एनर्जी कंपनी लिमिटेड के 500 मेगावॉट के थर्मल पावर प्लांट के लिए 5000 करोड़ का निवेश किया गया है।

ठेका कंपनी के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही
- एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि पहले चूंकि गुजरात राज्य खनिज निगम यानी जीएमडीसी के पास पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध था इसलिए जीपीसीएल को इस जमीन से कोयला खनन की आवश्यकता महसूस नहीं हुई थी पर अब इसकी जरूरत है। ग्रामीणों के साथ समाधान के प्रयास के तहत सोमवार को उनके प्रतिनिधियों उक्त निजी ठेका कंपनी के अधिकारियों की एक बैठक हुई थी पर यह बेनतीजा रही।