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गुजरात बजट 2018-19: GST की मार झेल रहे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को हाथ लगी निराशा

कारोबारियों की आखिरी उम्मीद भी धराशायी, कहा- इससे तो पलायन को मजबूर होंगे।

Dainik Bhaskar

Feb 21, 2018, 08:30 AM IST
सूरत का टेक्सटाइल उद्योग जीएस सूरत का टेक्सटाइल उद्योग जीएस

सूरत. केंद्र सरकार द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए आम बजट में टेक्सटाइल उद्योग के लिए 7 हजार करोड़ की घोषणा की थी, लेकिन उसमें सूरत के कपड़ा कारोबार को क्या मिला वह किसी को नहीं पता। इस आंशिक राहत से सूरत को लाभ होगा या नहीं वह भी नहीं पता। जिसके चलते बजट को लेकर भी कपड़ा व्यापारी नाराज थे। अब इस नाराजगी को राज्य सरकार ने और बढ़ा दिया है। मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा पेश किए बजट में भी सूरत के कपड़ा उद्योग की अनदेखी की गई है। व्यापारियों का कहना है कि टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने भी ध्यान नहीं दिया। व्यापारियों को उम्मीद थी कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र ने टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बिजली का रेट भी प्रति यूनिट 3.5 रुपए किया था तो गुजरात सरकार भी व्यापारियों के हित में कुछ फैसला लेगी, लेकिन राज्य सरकार ने बजट में ऐसा कोई पैकेज या बड़ी राहत नहीं दी। इससे व्यापारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।


सूरत में टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी की घोषणा आज भी नहीं हुई पूरी
डायमंड बुर्श का भूमिपूजन करने सूरत आई तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने यहां टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन इसके बाद आज तक यूनिवर्सिटी बनाने की दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सूरत आए थे तब उन्होंने रोजगार देने की कहते हुए कहा था कि गारमेंट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं को सरकार 5 साल तक प्रति माह 5 हजार रुपए अपनी तरफ से देगी। इस बजट में उन्होंने 5 के बजाय 4 हजार की घोषणा की। वहीं सूरत में गारमेंट हब का कोई जिक्र नहीं है, जबकि सूरत में गारमेंट हब बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है।


महाराष्ट्र के मुकाबले गुजरात सरकार ने नहीं रखा व्यापारियों का ख्याल
महाराष्ट्र में पावर लूम्स, टेक्सटाइल ट्रेडिंग, निटिंग और विविंग इंडस्ट्री को बिजली बिल में बड़ी राहत दी है। साथ ही टेक्सटाइल पार्क बनाने के लिए 36 हजार करोड़ के निवेश के साथ 10 लाख रोजगार पैदा करने के लिए 4649 करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। इधर गुजरात सरकार ने बजट में टेक्सटाइल, एपेरल, गार्मेंट तथा प्लास्टिक उद्योग के लिए 850 करोड़ के पैकेज की घोषणा की है, लेकिन इसमें सूरत के कपड़ा उद्योग पर कितना खर्च होगा, यह स्पष्ट नहीं है।

संकट गहरा: टेक्सटाइल इंडस्ट्री के पलायन का खतरा: फोस्टा प्रमुख
फोस्टा अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार का सूरत के टेक्सटाइल उद्योग को लेकर रवैया ठीक नहीं है। इससे कपड़ा कारोबार पर यहां से स्थानांतरित होने का खतरा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार टेक्सटाइल उद्योग को इतना बढ़ावा दे रही है ऐसे में तो गुजरात सरकार को भी बड़े पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

उपेक्षा: बजट में व्यापारियों की अनदेखी हुई: चैंबर प्रमुख
साउथ गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पीएम शाह का कहना है कि राज्य सरकार का बजट कृषि और रोजगार लक्षी है। उम्मीद थी कि महाराष्ट्र सरकार की तरह गुजरात सरकार भी उद्योगों के लिए पैकेज देगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उद्योग के लिए बजट में कोई विशेष घोषणा नहीं की गई। गुजरात सरकार ने व्यापारियों को निराश किया है।

गारमेंट हब की बात को भूली सरकार

फोस्टा सेक्रेटरी चम्पालाल बोथरा ने बताया कि गारमेंट हब की बात को राज्य सरकार भूल गई। सूरत की पहचान कपड़ा बाजार से है, उम्मीद थी कि खत्म हो चुके कपड़ा कारोबार को बढ़ावा मिलने के लिए सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। यहां तक की इकोनाॅमिकल सेल की बात भी घोषणा के आगे नहीं बढ़ पाई।

महाराष्ट्र सरकार की तुलना में कुछ नहीं दिया: वीवर्स एसोसिएशन

पांडेसरा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष गुजराती ने बताया कि महाराष्ट्र ने बिजली में जो राहत दी है उसकी तुलना में राज्य सरकार ने कुछ नहीं दिया। आने वाले दिनों में हम राज्य सरकार से राहत देने की डिमांड करेंगे।

ड्रीम सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए 30 करोड़

राज्य सरकार ने आम बजट में ड्रीम सिटी प्रोजेक्ट के लिए 30 करोड़ रुपए की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट से डायमंड बुर्श को भी लाभ होगा। शहर के खजोद विस्तार में डायमंड बुर्श के कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। 66 लाख स्क्वायर फीट में 2,400 करोड़ के खर्च से बन रहे डायमंड बुर्श के लिए जारी किए गए 30 करोड़ में से कुछ रुपए डायमंड बुर्श के लिए बनाए जाने वाले सड़क, ड्रेनेज सहित अन्य सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा। हालांकि राज्य सरकार ने 30 करोड़ की घोषणा ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए की है और डायमंड बुर्श बनाने में 2,400 करोड़ का खर्च होने वाला है। इसलिए कहा जा रहा है कि 30 करोड़ की राशि बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती है। जीजेईपीसी के रीजनल अध्यक्ष दिनेश नावड़िया ने बताया कि बजट में ड्रीम सिटी के लिए की गई घोषणा डायमंड बुर्श के उपयोग में आएगी।

विशेष पैकेज की आवश्यकता थी

वीवर्स अग्रणी मयूर गोलवाला ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा कारोबार चारो ओर से घिर गया है। जीएसटी काउंसिल मीटिंग व बजट में तो वीवर्स को कोई राहत नहीं मिली। आखिरी उम्मीद राज्य सरकार से थी, लेकिन वहां से भी निराशा हाथ लगी है। कपड़ा उद्योग को राहत देना चाहिए था।

कम से कम जीएसटी सरलीकरण की ही कोई घोषणा कर देते
कपड़ा व्यापारी अरुण पाटोदिया ने बताया कि वैसे तो जीएसटी में सरलीकरण तो केंद्र सरकार ही कर सकती है, लेकिन जो राज्य सरकार के बस में है वही निर्णय ले लेती।

सरकार का टेक्सटाइल पर ध्यान नहीं

फिआसवी के अध्यक्ष भरत गांधी ने बताया कि इतनी बड़ी टेक्सटाइल इंडस्ट्री होने के बाद भी सरकार इस पर ध्यान नहीं दे पा रही है। हमें उम्मीद थी कि आईटीसी रिफंड, ओपनिंग स्टॉक पर रिफंड, महाराष्ट्र सरकार जैसी कोई घोषणा करें, लेकिन कुछ नहीं किया। महाराष्ट्र की तरह यहां भी विशेष पैकेज की जरूरत थी।

जीआईडीसी की घोषणा ही कर देते

व्यापारी बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि सूरत के कपड़ा बाजार की गाड़ी पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार को सचिन जीआईडीसी की तरह एक और जीआईडीसी की घोषणा करनी चाहिए थी। व्यापार तेजी से बढ़े इस प्रकार की घोषणा करनी चाहिए थी। व्यापार कम होता जा रहा है, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही है।

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