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भास्कर हस्तक्षेप: अय्यर का मोदी को 'नीच' कहना; क्या ये शब्द मौत का सौदागर पार्ट-2 है?

देवेंद्र भटनागर | Last Modified - Dec 08, 2017, 09:16 AM IST

मणिशंकर अय्यर का मोदी को नीच और असभ्य कहना कांग्रेस के लिए मौजूदा चुनाव में आत्मघाती साबित हो सकता है।
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    मौजूदाराजनीति का एक चर्चित सच है कि "कांग्रेस को भाजपा नहीं, खुद कांग्रेसी हराते हैं।" मणिशंकर अय्यर का मोदी को नीच और असभ्य कहना कांग्रेस के लिए मौजूदा चुनाव में आत्मघाती साबित हो सकता है। मोदी ने एक बार फिर कांग्रेस की गलती को भुना लिया है। मणिशंकर अय्यर का मोदी को नीच और असभ्य कहना राजनीति ही नहीं, किसी भी नीति में जायज नहीं ठहराया जा सकता।

    मोदी इसे गुजरात अस्मिता से जोड़कर और गुजरात का अपमान करार देकर इसे राजनीति से भी आगे ले गए और एक इमोशनल मुद्दा बना दिया। जिस तरह से भाजपा ने इस पर पलटवार किया है, उससे साफ हो गया है कि वोटिंग तक वो इसे बेहद आक्रामक ढंग से उठाएगी। यह मुद्दा कांग्रेस के लिए किस तरह आत्मघाती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि ताबड़तोड़ प्रेस कॉन्फ्रेंस की गईं।

    राहुल के ट्वीट आए और रात होते-होते अपने सबसे वरिष्ठ नेता को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया। संभवत: कांग्रेस में ऐसा पहली बार ही हुआ होगा। वो भी संभवत: इसलिए क्योंकि कांग्रेस के दिमाग में कहीं न कहीं 2007 का मौत का सौदागर, 2014 का चायवाला और प्रियंका गांधी का वो बयान कि मोदी नीच राजनीति करते हैं, घूम रहा होगा। लेकिन क्या इससे डैमेज कंट्रोल हो पाएगा? कुल मिलाकर कांग्रेस ने एक बार फिर वही गलती की जो वो हर चुनाव में करती है।

    मोदी ने अय्यर के इस एक बयान से नोटबंदी, जीएसटी, पाटीदार आंदोलन, ओबीसी-दलित नाराजी, महंगाई आदि सारे मुद्दों के सामने गुजरात अस्मिता को खड़ा कर दिया है। मोदी की सबसे बड़ी ताकत रही है कि विरोधी गलती करें और वो मुद्दा बना दें। 2007 के गुजरात चुनाव में मोदी ने सोनिया गांधी के एक बयान (मौत का सौदागर) को ऐसा भुनाया था कि कांग्रेस चारों खाने चित्त हो गई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में इन्हीं अय्यर ने मोदी को चायवाला कहा था तो मोदी ने चाय पर चर्चा शुरू कर माहौल बदल डाला था।


    कांग्रेस भी ये बात अच्छी तरह जानती थी कि किसी भी तरह मोदी को मुद्दा न मिले। यही वजह थी कि वो पूरे प्रचार के दौरान 2002 के दंगे, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का जिक्र तक करने से बचती रही। यहां तक कि अहमद पटेल तक को अपने साथ नहीं रखा। पिछले 15 दिन से मोदी और पूरी भाजपा इसी कोशिश में थी कि कांग्रेस को किसी भी तरह अपने पाले में खींचा जाए। शुरुआत में लगा कि इस बार राहुल गांधी बहुत सोच समझकर चालें चल रहे हैं और मोदी की रणनीति में नहीं उलझ रहे हैं। लेकिन जनेऊ कार्ड के साथ ही पूरी कांग्रेस मोदी की चाल में फंसी और फिर फंसती चली गई।

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Web Title: Politacal Review On Gujarat Elections Mani Shankar Aiyar Statement
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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