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नरोडा पाटिया कांड: तीस्ता की जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची राज्य सरकार

मामला गुजरात दंगा पीडि़तों के फर्जी शपथपत्र पेश करने के मामले का है। इस मामले में तीस्ता को अग्रिम जमानत मिली है।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:25 AM IST

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    अहमदाबाद. गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट में मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड की अग्रिम जमानत को चुनौती दी है। अदालत ने इस अर्जी पर तीस्ता को नोटिस जारी किया है। मामला गुजरात दंगा पीडि़तों के फर्जी शपथपत्र पेश करने के मामले का है। इस मामले में तीस्ता को अग्रिम जमानत मिली है। तीस्ता की अग्रिम जमानत रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी हुई थी-जहां हाईकोर्ट में मामला प्रस्तुत करने को कहा गया। इस पर सरकार हाईकोर्ट पहुंची है।


    ये है मामला

    - तीस्ता शीतलवाड के पूर्व सहयोगी रईसखान पठान के बीच विवाद सामने आया। इसके बाद रईस खान ने अर्जी लगा कर आरोप लगाया था कि- तीस्ता ने नरोडा पाटिया केस में गवाहों के फर्जी शपथपत्र पेश किए थे। मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने इस मामले में फरियाद दर्ज करने का आदेश दिया। हालांकि सेशन कोर्ट से इस मामले में तीस्ता को अग्रिम जमानत मिल गई।

    - दूसरी ओर, फरियाद रद्द करने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। ऐसे में प्रस्तुत केस में तीस्ता की अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में आवेदन किया है।

    - उल्लेखनीय है कि नरोडा पाटिया कांड में गवाहों के बयानों के मद्देनजर आरोपियों को सजा हुई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी यह मुद्दा लाया गया कि तीस्ता शीतलवाड द्वारा पेश किए गए गवाहों के बयान फर्जी ढंग से पेश किए गए।

    जज ने विधायक खांट की सुनवाई से खुद को किया अलग

    - हाई कोर्ट के जज आशुतोष जे शास्त्री ने पंचमहाल जिले के मोरवा हडफ (सुरक्षित) सीट के निर्दलीय विधायक भूपेन्द्र खांट के जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित करने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका की सुनवाई से आज खुद को अलग कर लिया।

    - खांट के वकील पंकज चांपानेरी ने बताया कि जैसे न्यायमूर्ति शास्त्री को बताया गया कि इस मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पी के जानी पेश होंगे।

    - उन्होंने ‘नाॅट बिफोर मी’ (मेरे समक्ष नहीं) कहते हुए इसकी सुनवाई से इनकार कर दिया। अब मुख्य न्यायाधीश इस मामले को नये सिरे से अन्य अदालत को सौंपेंगे।

    - कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ कर जीते 38 वर्षीय खांट गैर आदिवासी पिता और आदिवासी मां (स्वर्गीय सविता खांट, जिनका 2012 के चुनाव में इस सीट पर जीत के तत्काल बाद निधन हो गया था) के पुत्र हैं। राज्य के आदि जाति विकास अायुक्त की अगुवाई वाली एक जांच समिति ने हाल में एक बार फिर उनके जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया था।

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