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ये हैं गुजरात दंगों के दो सबसे चर्चित चेहरे, अाज दोनों बन चुके हैं एक दूसरे के दोस्त

कुतुबुद्दीन को अशोक के वोट न डालने का है मलाल, मुकदमे की सुनवाई में साथ रहते हैं दोनों

Danik Bhaskar | Dec 15, 2017, 05:44 AM IST
कुतुबुद्दीन(L) और अशोक परमार(R) क कुतुबुद्दीन(L) और अशोक परमार(R) क

अहमदाबाद. गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों में अहमदाबाद शहर के दो अलग-अलग कम्युनिटी के दो चेहरे देश ही नहीं, बल्कि विदेशी अखबारों की सुर्खियां बने थे। दंगों के दौरान एक की जान बचाने की गुहार लगाती तस्वीर और दूसरे की तलवार के साथ चर्चित तस्वीर ने दोनों को नई पहचान दे दी, लेकिन गुरुवार को असेंबली इलेक्शन के दौरान एक-दूसरे के विरोधी रहे ये दोनों चेहरे, एक खास दोस्त के तौर पर सामने आए। भास्कर ने दोनों में से एक कुतुबुद्दीन अंसारी से कॉन्टेक्ट किया तो वह वोट डालकर खुश दिखे। हालांकि, उन्हें इस बात की तकलीफ थी कि उनका दोस्त अशोक परमार अपने वोट का इस्तेमाल नहीं कर पाया।

गुजरात छोड़कर बंगाल चला गया था, लेकिन गुजरात जैसा माहौल नहीं मिला

- कुतुबुद्दीन ने बताया कि दंगों के बाद वह गुजरात छोड़कर बंगाल चला गया था, लेकिन वहां कुछ दिन रहने के बाद लगा कि गुजरात जैसा माहौल कहीं नहीं मिल सकता। इसलिए वह लौटकर फिर अपने घर आ गया।

- वोट करने के एक्सपीरियंस पर उसने कहा कि मेरा लोकतंत्र में यकीन है। चुनाव में वोट डालकर खुशी मिलती है, लेकिन इस बार अशोक के वोट न डालने से वह दुखी है। उसने फोन पर अशोक से भास्कर कॉरेस्पोंडेंट की बात भी कराई।

अशोक ने कहा - गुजरात बदल रहा है, यह अच्छा है

- अशोक ने इस बारे बताया कि उनका वोटिंग लिस्ट में उसका नाम ही नहीं है, इसलिए वह वोट नहीं डाल सका। इसका उसे बहुत दुख है।

- दंगों की याद पर बात करने पर अशोक ने कहा कि गुजरात बदल रहा है, यह अच्छा है।

फिल्म में कुतुबुद्दीन के नाम का 'फेस ऑफ रॉयट’ के तौर पर इस्तेमाल

- अशोक ने बताया कि पहले हम दोनों अपनी-अपनी विचारधाराओं के कारण एक-दूसरे के विरोधी थे, लेकिन आज खास दोस्त हैं।

- एक हिंदी फिल्म में कुतुबुद्दीन के नाम का 'फेस ऑफ रॉयट’ के तौर पर इस्तेमाल करने पर अंसारी ने कहा कि यह गलत है। इसके खिलाफ हमने कोर्ट में मानहानि का केस भी दायर किया है और सुनवाई चल रही है।

- दिलचस्प यह है कि इस मामले की सुनवाई के दौरान दोनों दोस्त कोर्ट में साथ मौजूद रहते हैं।