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ये हैं देश के पहले गे राजकुमार, शादी के बाद हुआ एहसास और आ गया बड़ा तूफान

राजकुमार 'गे' मानवेंद्र को सिर्फ गुजरात ही नहीं बल्कि अब देश-विदेश में भी पहचाना जाने लगा है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 09, 2018, 08:14 AM IST

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    मानवेंद्र सिंह गोहिल गुजरात के राजपीपला रियासत के राजकुमार हैं।

    नर्मदा/सूरत. समलैंगिकता को अपराध माना जाए या नहीं? सुप्रीम कोर्ट इस पर फिर सुनवाई को तैयार है। दो वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं मानने की मांग से जुड़ी याचिका कोर्ट ने संविधान पीठ को भेज दी है। केंद्र से भी रुख पूछा गया है।DainikBhaskar.com इस मौके पर ऐसे भारतीय राजकुमार की स्टोरी बता रहा है जिसने खुद स्वीकारा कि वह 'गे' (समलैंगिक) हैं।

    - दरअसल, अपने 'गे' होने की बात खुद ही स्वीकारने के बाद राजपीपला (गुजरात के नर्मदा जिले का एक नगर) के राजकुमार 'गे' मानवेंद्र को भारत ही नहीं बल्कि विदेश में भी पहचाना जाने लगा है।

    - मानवेंद्र गोहित समलैंगिकों के लिए कुछ न कुछ काम करते ही रहते हैं। उन्होंने राजपीपला में समलैंगिकों के लिए एक वृद्धाश्रम भी स्थापित किया।
    - इस आश्रम का नाम अमेरिकन लेखिका 'जैनेट' पर रखा गया है। यह भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का पहला 'गे' आश्रम है।

    शादी के बाद हुआ एहसास और आ गया बड़ा तूफान
    - 23 सितंबर 1965 को महाराजा रघुबीर सिंह जी राजेंद्र सिंह जी साहेब के घर में एक लड़के का जन्म हुआ था।

    - राजस्थान के अजमेर में जन्मे इस बालक का नाम मानवेंद्र रखा गया। उसकी जिंदगी भी आम पुरुषों के समान चलती रही।

    - उसकी पढ़ाई बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल और अम्रुतबेन जीवनलाल कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स, मुंबई से हुई।

    - 1991 में मध्यप्रदेश के झाबुआ की चंद्रेश कुमारी से विवाह होने के बाद उनकी जिंदगी में तूफान आ गया था, एक साल बाद यानी 1992 में दोनों अलग हो गए थे।

    - दोनों की शादी टूटने का सबसे बड़ा कारण राजकुमार के समलैंगिग होना बताया गया।

    विदेशी महिला ने दिया सबसे अधिक दान
    - आश्रम के इस नाम पर मानवेंद्र सिंह का कहना है कि जैनेट ने इस आश्रम के लिए सबसे अधिक रकम दान की थी।
    - इसके साथ ही उनका यह भी कहना रहा कि जैनेट ‘गे’ नहीं, फिर भी उन्होंने इस आश्रम के लिए सबसे अधिक योगदान दिया। इसलिए आश्रम का नाम उन्हीं के नाम पर रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया था।

    'गे' आश्रम का आइडिया
    - मानवेंद्र के अनुसार, 'गे' आश्रम बनाने का आइडिया उन्हें 2009 में ही आ गया था और तभी से वे इसके लिए कोशिश कर रहे थे।

    - आश्रम का उद्घाटन जेनेट की बहन कर्लाफाइन ने किया। वह अपने पति के साथ विशेष तौर पर अमेरिका से यहां आई थीं।

    - इस वृद्धाश्रम में करीब 50 समलैंगिकों के रहने की व्यवस्था और साथ ही मनोरंजन व स्विमिंग पूल की सुविधाएं भी होंगी।

    - वृद्धाश्रम का निर्माण 15 एकड़ जमीन में हो रहा है। 25 से 30 कमरे बनाए जाएंगे​। फिलहाल यहां चार रुम की व्यवस्था है। आने वाले कुछ दिनों में यहां 25 से 30 कमरे बनाए जाएंगे।

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    एक टॉक शो में अमेरिका की टीवी एंकर ओप्रा विनफ्रे के साथ।
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    मानवेंद्र समलैंगिकों के पक्ष में काम करते रहते हैं।
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    गे राजकुमार मानवेंद्र ने समलैंगिक बुजुर्गों के लिए एक आश्रम भी खोला है।
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    इस आश्रम का नाम अमेरिकन लेखिका 'जैनेट' पर रखा गया है।
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    यह भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का पहला 'गे' आश्रम है।
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Web Title: Indian Gay Prince Open His Palace Grounds To LGBT
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