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नीरव मोदी की 126 शेल कंपनियों की जांच शुरू, सेज की 5 यूनिटों में नहीं मिले डायमंड

दिल्ली से मिली जानकारी अनुसार गुजरात में नीरव मोदी की सबसे अधिक शेल कंपनी है।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 23, 2018, 07:28 AM IST

नीरव मोदी की 126 शेल कंपनियों की जांच शुरू, सेज की 5 यूनिटों में नहीं मिले डायमंड

सूरत.देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले में आयकर विभाग ने नीरव मोदी की शेल कंपनियों की जांच शुरू की है। सीबीआई की जांच के दौरान पूरे देश में नीरव मोदी की 126 सेल कंपनियों की लिस्ट सामने आई थी। आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली से मिली जानकारी अनुसार गुजरात में सबसे अधिक शेल कंपनी है। सूरत में भी नीरव मोदी की सेल कंपनी होने की आशंका है। सीबीआई के मुताबिक 20 शेल कंपनी विदेश में है और 100 शेल कंपनी भारत में है। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पूर्व कौन सी सेल कंपनी कहां है उसकी जानकारी सीबीआई द्वारा देश की आयकर विभाग को दी गई थी। इस दिशा में गुजरात आयकर विभाग एक्टिव हो गया था।

क्या होती है शेल कंपनी?

सीए बिरजू शाह ने बताया कि आमतौर पर शेल कंपनियां कागज पर होती हैं। छोटे-छोटे लोगों को उनका डायरेक्टर बनाकर कारोबार किया जाता है। एंट्री द्वारा ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल खेला जाता है।

सचिन स्थित स्पेशल इकोनॉमिक जोन स्थित गीतांजलि ग्रुप की 5 यूनिटों पर भी डीआरआई ने कार्रवाई कर करोड़ों के डॉक्यूमेंट जब्त किए हैं। यहां से डायमंड और ज्वेलरी का कोई स्टॉक नहीं मिला।

नहीं खुल रहा लॉकर
आयकर विभाग और डीआरआई द्वारा महिधर पुरा स्थित गीतांजलि ग्रुप के ऑफिस से बरामद किए गए लॉकर नहीं खुल रहे हैं। अधिकारियों ने मुंबई से एक्सपर्ट को बुलाया है। मामले की जांच चल रही है।

3 दिन पहले भागे कर्मी
लॉकर वाल्ट डिजिटल होने से ऑपरेट नहीं हो पाया। आयकर अधिकारियों ने कहा कि जांच के 3 दिन पूर्व ही कर्मचारी भाग गए थे जिसके चलते लॉकर में कुछ विशेष नहीं मिलने की संभावनाएं हैं।

नीरव मोदी की कंपनी के बेरोजगार हुए कर्मचारियों ने दिया धरना

पीएनबी घोटाले को अंजाम देने वाले नीरव मोदी के सचिन जीआईडीसी स्थित डायमंड फैक्ट्री सीज कर देने से वहां काम करने वाले 800 कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। अचानक बेरोजगार हुए करीब 100 कर्मचारियों ने गुरुवार अपराह्न 3 से 4 बजे तक धरना प्रदर्शन किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी। कर्मचारी का कहना था कि वह बेरोजगार हो गए अब अपना परिवार कैसे चलाएंगे। 10 साल से लेजर कटिंग का काम करने वाले जीतू वानखेड़े ने बताया कि अचानक नौकरी चले जाने से कर्मचारियों पर मुसीबत टूट पड़ा है। कई कर्मचारियों ने हाउस लोन ले रखी है। कई कर्मचारियों के बच्चों की स्कूल की फीस भी संस्था देती थी। उनका कहना था कि सरकार को उनकी समस्या के बारे में ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उसमें उनका कोई दोष नहीं है।

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