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ये लड़की गरीबों से पूछती है- क्या खाना है? फिर तैयार होता है मीनू और डिशेज

अब सभी बच्चे और लोग भी जया नंदवानी को पहचानने लगे हैं।

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 05:22 AM IST
अपनी इस मुहिम को जया ने \'दो निव अपनी इस मुहिम को जया ने \'दो निव

सूरत. गुजरात के भटार की रहने वाली 21 साल की जया नंदवानी गरीबों का पेट भरने के साथ उनके सुख-दुख को भी बांटती है। अपने सोसाइटी और दोस्तों की मदद से वह गरीबों को हर रविवार खाना खिलाती हैं। निजी स्कूल में टीचर होने के नाते हर दिन तो वक्त नहीं दे पाती हैं, लेकिन हर रविवार को गरीबों के लिए वक्त जरूर निकाल लेती हैं।

गरीबों से पूछती है- क्या खाना है?

- 21 मई 2017 से वह हर रविवार को गरीबों को खाना खिलाने का ये काम जारी है। इसलिए अब हर बच्चे और अन्य लोग जया को पहचानने लगे हैं और अब अपना दुख-सुख भी शेयर करते हैं। यही नहीं अगले रविवार को क्या खाना है उसे भी जया से बच्चे शेयर करते हैं।

वाॅट्सएेप ग्रुप के जरिए हो जाती है प्लानिंग

- जया के पिता कृष्ण कुमार नंदवानी और मां संगीता नंदवानी इस काम में उनकी मदद करते हैं। साथ ही ऐसे ही दोस्त भी इस काम में साथ देते हैं। कुछ फल और बिस्किट समेत खाने के दूसरे समान लेने के लिए ग्रुप के सभी मेंबर को 50 रुपए चंदा देना होता है।

- वह शनिवार को वाॅट्सएेप ग्रुप पर मैसेज कर देती हैं और जिसको जो लाना है वह बता देता हैं। रात को ही इनकी प्लानिंग हो जाती है। अपनी इस मुहिम को 'दो निवाले प्यार के’ दिया है।

- जया कहती हैं, "अगर ज्यादा लोग जुड़ जाएं तो एक साथ शहर के कई जगहों पर खाना खिलाया जा सकता है। अभी महज एक या दो जगहों पर ही पहुंच पाती हैं। उनकी मुहिम में अभी 50 लोग जुड़े हैं। सभी अपनी-अपनी सोसाइटी में खाना मांगकर यहां लाते हैं और गरीबों में बांटते हैं।

मुहिम को नाम दिया ‘दो निवाले प्यार के’

- जया बताती हैं कि उनको यह प्रेरणा पापा से मिली है। हर रविवार वह कम से कम 150 लोगों को खाना खिलाती हैं।

- उनके पिता वनवासी कल्याण संस्था से जुड़े हुए हैं। इसलिए वह बेटी को सोशल सर्विस में बड़ा काम करते देखना चाहते हैं। इसी से इंस्पायर बेटी जया गरीबों को खाना खिलाती हैं। जया का सपना है कि गरीब बच्चों को टैलेंट के हिसाब से तैयार किया जाए, ताकि वह अपना फ्यूचर बना सकें।