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सूरत में मोदी की सभाओं और स्टार प्रचारकों की कोशिश, अाखिरी वक्त पर बाजी पलटी

Bhaskar News | Last Modified - Dec 19, 2017, 08:58 AM IST

पाटीदार आंदोलन और जीएसटी विरोध से बीजेपी को था सीटों के नुकसान का डर
सूरत में मोदी की सभाओं और स्टार प्रचारकों की कोशिश, अाखिरी वक्त पर बाजी पलटी

सूरत.आखिरी समय में प्रधानमंत्री मोदी की दो सभाएं, मीटिंग और बीजेपी के स्टार प्रचारकों की ताबड़तोड़ रैलियों ने सूरत के चुनावी रुख को मोड़ दिया। एक समय लग रहा था कि बीजेपी के खिलाफ विरोध की लहर चल रही है, लेकिन इन सभाओं और रैलियों की वजह से बीजेपी मतों को अपनी तरफ करने में कामयाब रही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूरत में 3 बार प्रचार करने के लिए आए। इसके अलावा गृहमंत्री राजनाथ सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पुरुषोत्तम रूपाला, स्मृति ईरानी और सांसद परेश रावल भी बीजेपी प्रत्याशियों के प्रचार के लिए सूरत में जन सभाएं कीं। चाय पर चर्चा कार्यक्रम में हिस्सा लेने वित्तमंत्री अरुण जेटली भी सूरत आए। बीजेपी के स्टार प्रचारक सूरत में बीजेपी को वोट दिलाने में कामयाब रहे।

अंत समय में मोदी की दो रैलियों व हिंदीभाषी नेताओं का मिला फायदा

लिंबायत में रंग लाई स्टार प्रचारकों की सभा
मोदी ने प्रचार के आखिरी दिन लिंबायत के नीलगिरी मैदान में सभा की थी। मराठी बहुल सीट पर कांग्रेस ने भी रविंद्र पाटिल को टिकट दिया जिस की वजह से मराठी वोट के बंटवारे का संकट था। मगर मोदी ने प्रचार के आखिरी दिन यहां सभा कर बीजेपी प्रत्याशी संगीता पाटिल की जीत तय कर दी। लिंबायत के नीलगिरी इलाके के वोटर निर्णायक साबित हुए। यहां योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सभा कर स्थानीय हिंदीभाषियों को बीजेपी को वोट देने की अपील की थी।

शहर के साथ ग्रामीण वोटरों का भी साधा
नरेंद्र मोदी ने कामरेज विधानसभा के कडोदरा में चुनावी सभा की थी। कामरेज विधानसभा में सूरत शहर में बसे सौराष्ट्र के पाटीदार वोटरों के अलावा ग्रामीण इलाकों के पटेल, देसाई, क्षत्रिय और हलपति समुदाय के भी निर्णायक वोटर हैं। मोदी की सभा में ग्रामीण इलाकों के वोटर बड़ी संख्या में जुटे थे। कामरेज विधानसभा के नतीजों पर इन्हीं ग्रामीण वोटरों का प्रभाव रहा और बीजेपी प्रत्याशी को जीत मिली।

प्रमुख कारण : मजूरा में सीएम का रोड शो और गृहमंत्री की सभा का असर

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का रोड शो और गृह मंत्री की सभा ने मजूरा के बीजेपी प्रत्याशी हर्ष संघवी को जीत दिला दी। विजय रुपाणी ने मजूरा के बीजेपी प्रत्याशी हर्ष संघवी के प्रचार में रोड शो किया। जैन और राजस्थानी समाज के इलाकों में आयोजित रूपाणी के रोड शो ने हर्ष संघवी की लीड बढ़ाने में काफी मदद की। इसके अलावा मजूरा विधानसभा के हिंदीभाषी इलाकों में गृह मंत्री राजनाथ सिंह की सभा करवा कर हर्ष ने अपने मार्जिन को बढ़ाने की रही सही कसर भी पूरी कर दी।

रणनीति : नाराज पाटीदारों को समझाने के लिए रूपाला को दी गई जिम्मेदारी
चुनाव की तारीखें घोषित होते ही पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति ने सूरत के वराछा, करंज, कतारगाम और कामरेज में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। यहां तक कि बीजेपी के प्रत्याशियों को प्रचार करना भी मुश्किल हो गया था। बीजेपी का कोई नेता पाटीदार क्षेत्र में रिस्क उठाना नहीं चाहता था। ऐसे वक्त में बीजेपी के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय कृषिराज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने पाटीदार विरोध के केंद्र माने जाने वाले इलाकों में सभा कर पाटीदारों को फिर से बीजेपी की तरफ खींचने की कोशिश की।

चौर्यासी में हिंदीभाषियों की नाराजगी दूर की

चौर्यासी विधानसभा के हिंदीभाषी क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ की सभा आयोजित कर हिंदीभाषियों की नाराजगी खत्म करने की बीजेपी ने कोशिश की। यही वजह है की चौर्यासी की बीजेपी प्रत्याशी झंखना पटेल सूरत जिले में सबसे ज्यादा मतों के साथ जीतने में सफल रहीं। कोली पटेल समाज के अलावा हिंदीभाषियों ने भी बड़ी संख्या में झंखना पटेल को वोट दिया।

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Web Title: surt mein modi ki sbhaaon aur staar prCharkon ki koshish, aaakhiri waqt par baaji plti
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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